Shaban Moon Sighting 2026 in India: भारत में आज शाबान का चांद देखने की होगी कोशिश, नजर आने पर 20 जनवरी से शुरू होगा इबादत का पाक महीना

भारत समेत दक्षिण एशियाई देशों में आज यानी 19 जनवरी 2026 को शाबान का चांद देखने की कोशिश की जाएगी. यदि आज चांद नजर आता है, तो कल से शाबान का पाक महीना शुरू हो जाएगा. जानें क्या कहती हैं खगोलीय गणनाएं.

(Photo Credits Twitter)

Shaban Moon Sighting 2026 in India: भारत में आज, सोमवार 19 जनवरी 2026 को इस्लामी महीने 'शाबान' (Shaban 1447 AH) का चांद देखने की कोशिश की जाएगी. शाबान का महीना इस्लामी कैलेंडर का आठवां महीना होता है, जो रमजान के पवित्र महीने के आने की दस्तक देता है. यदि आज शाम को चांद नजर आता है, तो मंगलवार 20 जनवरी को शाबान की पहली तारीख होगी.

क्या आज दिखेगा चांद?

खगोलीय गणनाओं और मौसम विभाग के पूर्वानुमानों के अनुसार, 19 जनवरी की शाम को चंद्रमा की आयु कम होने के कारण इसे देख पाना मुश्किल हो सकता है. यदि आज देश के किसी भी हिस्से में चांद की तस्दीक नहीं होती है, तो रजब का महीना 30 दिन का पूरा किया जाएगा. ऐसी स्थिति में शाबान का महीना बुधवार, 21 जनवरी 2026 से शुरू होगा. यह भी पढ़े:  Rajab Moon Sighting 2023 in India Live Update: चांद दिखने के बाद शुरू होता है रजब का महीना

शबे बारात 2026 की संभावित तारीख

शाबान महीने की 15वीं रात को 'शबे बारात' मनाई जाती है, जिसे 'मगफिरत की रात' भी कहा जाता है. चांद दिखने के आधार पर इसकी तारीख तय होगी:

मुस्लिम समुदाय के लिए यह रात इबादत, दुआओं और अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातिहा पढ़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है.

रमजान की तैयारियों का आगाज

शाबान का महीना शुरू होते ही दुनिया भर के मुसलमान रमजान के रोजों की तैयारी शुरू कर देते हैं. पैगंबर मुहम्मद (स.) इस महीने में अक्सर नफिल रोजे रखा करते थे. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, शाबान हमें शारीरिक और मानसिक रूप से रमजान के लिए तैयार होने का अवसर देता है. भारत में इस साल रमजान का पहला रोजा 19 फरवरी 2026 के आसपास होने की उम्मीद है.

चांद कमेटियों की बैठक

आज शाम दिल्ली की जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और लखनऊ की मरकजी चांद कमेटी समेत देश के विभिन्न हिस्सों में हिलाल कमेटियों की बैठक होगी. सूर्यास्त के बाद जैसे ही चांद की गवाही मिलेगी, आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी. श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय मस्जिदों और विश्वसनीय समाचार माध्यमों से पुष्टि होने के बाद ही महीने की शुरुआत मानें.

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