Paush Amavasya 2025: देशभर में करोड़ों श्रद्धालु इस सप्ताह पौष अमावस्या (Paush Amavasya) का व्रत-पूजन करने की तैयारी कर रहे हैं. हिंदू पंचांग में अत्यंत आध्यात्मिक महत्व रखने वाली यह अमावस्या पौष माह में आती है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष पौष अमावस्या विशेष मानी जा रही है क्योंकि सूर्य और मंगल की युति से मंगलादित्य योग बन रहा है. पौष अमावस्या 2025 की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि से जुड़ी पूरी जानकारी नीचे दी गई है.
इसे आमतौर पर ‘छोटा पितृ पक्ष’ भी कहा जाता है. यह दिन पितरों की शांति, आत्मशुद्धि और दान-पुण्य के लिए समर्पित होता है. धार्मिक विद्वानों के अनुसार, यह 2025 की अंतिम अमावस्या है और खरमास के तपस्यामय काल में पड़ने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है. यह भी पढ़ें: Spiritual Tourism in India: ना पहाड़, ना समुद्र... घूमने के लिए 2025 में गूगल पर सबसे ज्यादा खोजी गई ये जगह, देखें VIDEO
पौष अमावस्या 2025 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि 19 दिसंबर सुबह 4:59 बजे से शुरू होकर 20 दिसंबर सुबह 7:12 बजे तक रहेगी. उदया तिथि मान्य होने के कारण व्रत और मुख्य पूजन शुक्रवार, 19 दिसंबर को किया जाएगा.
- स्नान व दान का समय: सुबह 5:19 बजे से 6:14 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:58 बजे से 12:39 बजे तक
- पितृ तर्पण का समय: दोपहर 12:00 बजे से 3:00 बजे तक
- अमृत काल: सुबह 9:43 बजे से 11:01 बजे तक
पितृ पूजा और तर्पण का महत्व
पौष अमावस्या विशेष रूप से पितृ तर्पण और पिंड दान के लिए जानी जाती है. गरुड़ पुराण के अनुसार, इस दिन जल में काले तिल मिलाकर पितरों को अर्पण करने से उन्हें शांति प्राप्त होती है. इसके फलस्वरूप परिवार में सुख-शांति आती है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है.
इस अवसर पर कई श्रद्धालु वाराणसी में गंगा, प्रयागराज के त्रिवेणी संगम और हरिद्वार के हर की पौड़ी जैसे पवित्र तीर्थों पर स्नान करते हैं. जो लोग यात्रा नहीं कर पाते, वे घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं.
सूर्य उपासना और दान
पौष माह सूर्य देव को समर्पित होता है. इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है, जिससे स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक स्पष्टता की प्राप्ति होती है. साथ ही अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और गर्म कपड़ों का दान विशेष फलदायी माना जाता है.
ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिषियों के अनुसार, 2025 की पौष अमावस्या मेष, सिंह और तुला राशि वालों के लिए शुभ फल देने वाली हो सकती है, क्योंकि सूर्य और मंगल की अनुकूल स्थिति बन रही है. हालांकि, चूंकि यह समय खरमास का है (जब सूर्य धनु राशि में होते हैं), इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और नए मकान या वाहन की खरीद जैसे शुभ कार्यों से परहेज किया जाता है. ये कार्य मकर संक्रांति के बाद ही करना शुभ माना जाता है.












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