Nirjala Ekadashi 2026 Messages in Hindi: हिंदू कैलेंडर में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष महत्व है, जिसे निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi) के नाम से जाना जाता है. साल 2026 में श्रद्धालु इस बेहद कठिन और पवित्र व्रत को 25 जून को रख रहे हैं. सनातन परंपरा में इस तिथि को भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है. मान्यता है कि इस एक एकादशी का पूरी निष्ठा से व्रत रखने पर साल भर की सभी 24 एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है. इस पावन अवसर पर लोग एक-दूसरे को भक्तिमय संदेश, कोट्स और फेसबुक-वॉट्सऐप ग्रीटिंग्स भेजकर पर्व की शुभकामनाएं देते हैं.
निर्जला एकादशी यानी भीमसैनी एकादशी को साल की सभी 24 एकादशियों में सबसे कठिन और पुण्यदायी माना गया है, जिसका विशेष महत्व बताया जाता है. ऐसे में इस मंगलकारी दिन पर आप अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को इन हिंदी मैसेजेस, वॉट्सऐप विशेज, कोट्स, जीआईएफ ग्रीटिंग्स के जरिए हैप्पी निर्जला एकादशी कहकर बधाई दे सकते हैं. यह भी पढ़ें: Nirjala Ekadashi 2026 Wishes: निर्जला एकादशी पर प्रियजनों को भेजें ये खास हिंदी Quotes, WhatsApp Messages, Facebook Greetings और दें शुभकामनाएं





अन्न और जल के त्याग का है कड़ा नियम
निर्जला एकादशी को हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती (व्रत रखने वाले) सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी तिथि के पारण तक अन्न और जल की एक बूंद भी ग्रहण नहीं करते हैं. भीषण गर्मी के मौसम में इस तरह का संयम रखना शारीरिक और मानसिक शुद्धि का परिचायक माना गया है. इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करते हैं और रात में जागरण कर भजन-कीर्तन करते हैं.
महाभारत काल से जुड़ी है इसकी महिमा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास ने पांडव पुत्र भीम को इस व्रत की महिमा और इसके अक्षय पुण्य के बारे में बताया था. चूंकि भीम अपनी अत्यधिक भूख के कारण महीने की दोनों एकादशियों का व्रत नहीं रख पाते थे, इसलिए उन्होंने वर्ष में केवल एक बार आने वाली इस महापर्व की तिथि को पूरी तरह निर्जल रहकर व्रत किया था. इसी कारण इसे 'भीमसेनी एकादशी', 'भीम एकादशी' और 'पांडव एकादशी' के नाम से भी जाना जाता है.
दान-पुण्य का विशेष महत्व
इस पावन तिथि पर धार्मिक कार्यों के साथ-साथ दान-पुण्य करने का भी विशेष विधान है. ज्येष्ठ के महीने में गर्मी अपने चरम पर होती है, इसलिए इस दिन जरूरतमंदों को शीतल जल, शर्बत, अन्न, वस्त्र, और मिट्टी के घड़े (कलश) दान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है. ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को सांसारिक दुखों से मुक्ति मिलती है और मृत्यु के बाद विष्णु लोक (मोक्ष) में स्थान प्राप्त होता है.













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