Muharram 2026: 'हजरत इमाम हुसैन का सर्वोच्च बलिदान करोड़ों लोगों को देता है प्रेरणा'- मुहर्रम पर पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को मुहर्रम के अवसर पर हजरत इमाम हुसैन के सर्वोच्च बलिदान को याद किया. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा कि इमाम हुसैन का जीवन और उनकी शहादत सत्य, न्याय और साहस के मूल्यों के प्रति अडिग रहने की शाश्वत प्रेरणा देती है.
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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने शुक्रवार, 26 जून 2026 को मुहर्रम (आशूरा) के अवसर पर देशवासियों के नाम अपना संदेश जारी किया. अपने सार्वजनिक संदेश में प्रधानमंत्री ने हजरत इमाम हुसैन (Hazrat Imam Hussain) के सर्वोच्च बलिदान को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन और शहादत आज भी वैश्विक स्तर पर करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है. पीएम मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि इतिहास की यह महान घटना हमें सत्य, न्याय, साहस और सिद्धांतों के प्रति अडिग रहने जैसे बुनियादी मानवीय मूल्यों की याद दिलाती है. यह भी पढ़ें: Ratlam: रतलाम में मुहर्रम जुलूस के दौरान बड़ा हादसा, हाईटेंशन लाइन से टकराया ताजिया; करंट लगने से लोगों की मौत, कई झुलसे
सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "हजरत इमाम हुसैन (अलेहि सलाम) का सर्वोच्च बलिदान कई लोगों को सत्य और न्याय के मार्ग पर दृढ़ रहने के लिए प्रेरित करता रहता है. उनका जीवन हमें अदम्य साहस और अटूट विश्वास की स्थायी शक्ति की याद दिलाता है."
पीएम मोदी ने अपने संदेश में आगे रेखांकित किया कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों और गंभीर संकट के समय में भी धर्म और धार्मिकता की राह पर खड़े रहने के लिए इमाम हुसैन का बलिदान एक कालजयी मार्गदर्शक (Timeless Guide) की तरह काम करता है.
देश भर में पूरी अकीदत के साथ मनाया जा रहा 'यौम-ए-आशूरा'
मुहर्रम इस्लामिक कैलेंडर (हिजरी संवत) का पहला महीना होता है, जो दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत गहरा धार्मिक महत्व रखता है. मुहर्रम के महीने में होने वाले शोक और स्मरण के कार्यक्रम इस महीने के 10वें दिन चरम पर पहुंचते हैं, जिसे 'यौम-ए-आशूरा' (Day of Ashura) के रूप में जाना जाता है.
आज भारत के सभी हिस्सों में आशूरा का दिन पूरी श्रद्धा, गंभीरता और शांतिपूर्ण ढंग से मनाया जा रहा है. शिया मुस्लिम समुदाय के लोग, जिनमें कई स्थानों पर अन्य धर्मों और संप्रदायों के लोग भी शामिल होते हैं, कर्बला के शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मजलिसों (शोक सभाओं), मातम और पारंपरिक ताजिए के जुलूसों का आयोजन कर रहे हैं.
'हज़रत इमाम हुसैन की कुर्बानी लाखों लोगों को प्रेरित करती है'
The sacrifice of Hazrat Imam Hussain (AS) continues to inspire many people to remain steadfast in the pursuit of truth and justice. It is also a reminder of the enduring power of courage and conviction.
— Narendra Modi (@narendramodi) June 26, 2026
क्या है मुहर्रम और कर्बला की पृष्ठभूमि?
इतिहास और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन इस्लामिक पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे (पोते) इमाम हुसैन इब्न अली, उनके परिजनों और वफादार साथियों की शहादत की याद में मनाया जाता है. सन 680 ईस्वी (61 हिजरी) में वर्तमान समय के इराक में स्थित कर्बला के मैदान में एक क्रूर और अन्यायी शासक यजीद की अधीनता स्वीकार करने से इनकार करने पर इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों को भूखा-प्यासा शहीद कर दिया गया था. उन्होंने मानवता और न्याय की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी, जिसे इस्लाम में सबसे बड़ा बलिदान माना जाता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 26, 2026 12:15 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

