Vat Purnima 2026 Wishes: वट पूर्णिमा पर अपनी सखी-सहेलियों को इन खूबसूरत हिंदी WhatsApp Messages, Quotes, Facebook Greetings के जरिए दें शुभकामनाएं
अखंड सौभाग्य का पर्व वट पूर्णिमा इस साल 29 जून 2026 को मनाया जा रहा है. इस खास मौके पर सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं. इस पावन अवसर पर आप अपनी सखी-सहेलियों और सगे-संबंधियों को ये चुनिंदा हिंदी कोट्स, व्हाट्सएप मैसेजेस और फेसबुक ग्रीटिंग्स भेजकर शुभकामनाएं दे सकती हैं.
Vat Purnima 2026 Wishes In Hindi: सुहागन महिलाओं (Married Women) के लिए अखंड सौभाग्य और वैवाहिक खुशहाली का प्रतीक माना जाने वाला वट पूर्णिमा (Vat Purnima) का व्रत इस साल सोमवार, 29 जून 2026 को मनाया जा रहा है. मुख्य रूप से महाराष्ट्र (Maharashtra), गुजरात (Gujarat) और दक्षिण भारत (South India) में अत्यंत धूमधाम से मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं के अटूट विश्वास को दर्शाता है. इस दिन शादीशुदा महिलाएं सोलह श्रृंगार कर निर्जला व्रत रखती हैं और बरगद (वट) के पेड़ की विधि-विधान से पूजा करके पति की दीर्घायु की कामना करती हैं.
इस पावन अवसर पर अपनी सखी-सहेलियों और प्रियजनों को बधाई देने के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर शुभकामना संदेशों की काफी मांग देखी जा रही है. ऐसे में आप भी इन खूबसूरत हिंदी विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, फेसबुक ग्रीटिंग्स, कोट्स के जरिए वट पूर्णिमा की शुभकामनाएं दे सकती हैं.





ज्येष्ठ अमावस्या और पूर्णिमा के व्रत में क्या है अंतर?
हिंदू पंचांग के अनुसार, सुहाग की रक्षा के लिए यह व्रत साल में दो बार रखा जाता है. पहली बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत रखा जाता है, जो उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में बेहद लोकप्रिय है.
वहीं, दूसरी बार ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा तिथि को यह व्रत रखा जाता है, जिसे वट पूर्णिमा कहा जाता है. दोनों ही व्रतों की पूजन विधि, कथा और धार्मिक महत्व एक समान हैं, केवल तिथियों और क्षेत्रीय परंपराओं का अंतर होता है.
वट वृक्ष की परिक्रमा और सत्यवान-सावित्री की पौराणिक कथा
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वट पूर्णिमा के दिन बरगद के पेड़ के नीचे बैठकर ही माता सावित्री और उनके पति सत्यवान की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है.महिलाएं पेड़ की जड़ में जल अर्पित करती हैं और तने पर कच्चे सूत (सफेद या पीले रंग के धागे) को लपेटते हुए सात बार परिक्रमा करती हैं.
इस दौरान सत्यवान और सावित्री की पौराणिक कथा सुनी जाती है. मान्यता है कि सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और बुद्धिमत्ता से मृत्यु के देवता यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस ले लिए थे. बरगद के पेड़ को हिंदू धर्म में त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का रूप माना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से अखंड सौभाग्य और वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 28, 2026 03:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

