Mahashivratri 2026 Sanskrit Wishes: संस्कृत में अपनों से कहें महाशिवरात्रे: शुभाशया:, शेयर करें ये WhatsApp Messages, Shlokas और Facebook Greetings
शिव-पार्वती के मिलन के पर्व महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यदि आप अपने परिजनों और मित्रों को पारंपरिक अंदाज में बधाई देना चाहते हैं, तो इन संस्कृत श्लोकों और संदेशों का उपयोग कर सकते हैं. इस अवसर पर आप इन विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, श्लोक, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर करके महाशिवरात्रे: शुभाशया: कह सकते हैं.
Mahashivratri 2026 Sanskrit Wishes: हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक 'महाशिवरात्रि' (Mahashivratri) का भक्तों को साल भर बेसब्री से इंतजार रहता है. इस साल यह महापर्व 15 फरवरी 2026 को मनाया जा रहा है. फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह उत्सव देवों के देव महादेव (Mahadev) और माता पार्वती (Mata Parvati) के विवाह के प्रतीक के रूप में श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. देशभर के ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि वह रात है जब भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था. शिवपुराण में इस तिथि को महादेव की साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ बताया गया है. माना जाता है कि जो भक्त इस दिन व्रत रखकर पूरी निष्ठा से भोलेनाथ की पूजा करते हैं, उन्हें सौभाग्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है. कुंवारी कन्याएं सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए तो विवाहित महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए इस दिन विशेष व्रत रखती हैं.
शिव-पार्वती के मिलन के पर्व महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यदि आप अपने परिजनों और मित्रों को पारंपरिक अंदाज में बधाई देना चाहते हैं, तो इन संस्कृत श्लोकों और संदेशों का उपयोग कर सकते हैं. इस अवसर पर आप इन विशेज, वॉट्सऐप मैसेजेस, श्लोक, फेसबुक ग्रीटिंग्स को शेयर करके महाशिवरात्रे: शुभाशया: कह सकते हैं.
महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक का विशेष महत्व है. 'रुद्र' भगवान शिव का ही एक प्रचंड रूप है और 'अभिषेक' का अर्थ है पवित्र स्नान. ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से रुद्राभिषेक करने से जातक के ग्रह जनित दोष शांत होते हैं. दूध, दही, शहद, घी और गन्ने के रस से भगवान शिव का अभिषेक करने से भक्तों के रोग, कष्ट और संचित पापों का नाश होता है.
15 फरवरी को होने वाले इस महापर्व के लिए देश के प्रसिद्ध शिव मंदिरों जैसे काशी विश्वनाथ, महाकालेश्वर और सोमनाथ में विशेष सुरक्षा और दर्शन व्यवस्थाएं की गई हैं. कई शहरों में इस दिन 'शिव बारात' निकालने की भी परंपरा है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.