Hindu New Year 2026: 1 जनवरी को क्यों नहीं मनाया जाता हिंदू नववर्ष? जानें प्रमुख वजह

पूरी दुनिया 1 जनवरी 2026 का स्वागत कर रही है. लेकिन भारत और दुनिया भर में फैले हिंदू समुदाय के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने की एक विशेष चर्चा छिड़ गई है. नागरिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए भले ही ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) का उपयोग किया जाता है

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Hindu New Year 2026: पूरी दुनिया 1 जनवरी 2026 का स्वागत कर रही है. लेकिन भारत और दुनिया भर में फैले हिंदू समुदाय के बीच अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटने की एक विशेष चर्चा छिड़ गई है. नागरिक और प्रशासनिक कार्यों के लिए भले ही ग्रेगोरियन कैलेंडर (अंग्रेजी कैलेंडर) का उपयोग किया जाता है, लेकिन हिंदू धर्म और पंचांग के अनुसार 1 जनवरी का कोई धार्मिक महत्व नहीं है. सवा अरब से अधिक लोगों के लिए नए साल की शुरुआत कड़ाके की ठंड में नहीं, बल्कि प्रकृति के खिलने और वसंत ऋतु के आगमन के साथ होती है.

1 जनवरी हिंदू नववर्ष क्यों नहीं है?

हिंदू समय की अवधारणा 'चक्रीय' है और यह प्राचीन चंद्र-सौर (Lunisolar) प्रणाली पर आधारित है. हिंदू नववर्ष, जिसे 'नव संवत्सर' कहा जाता है, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होता है. इसी दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है। भारत में 1 जनवरी मनाने की परंपरा ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की देन है, जो आज केवल एक सामाजिक उत्सव बनकर रह गया है, जबकि हिंदू नववर्ष 'शुभ आरंभ' और धार्मिक अनुष्ठानों का समय होता है. यह भी पढ़े:  Happy New Year 2026: PM मोदी ने देशवासियों को दी नए साल की शुभकामनाएं, संस्कृत श्लोक और विशेष ऑडियो संदेश के साथ लोगों में भरा नया उत्साह

साल 2026 में कब है हिंदू नववर्ष?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, 2026 में नववर्ष की तारीखें क्षेत्रीय विविधता के अनुसार अलग-अलग हैं। मुख्य रूप से इसे तीन चरणों में देखा जा सकता है:

1. चंद्र नववर्ष (मार्च 2026):

2. सौर नववर्ष (अप्रैल 2026):

3. शरद नववर्ष (नवंबर 2026):

क्षेत्रीय नववर्ष 2026 की समय सारणी

त्योहार क्षेत्र/समुदाय तारीख (2026)
गुड़ी पड़वा / उगादि महाराष्ट्र, दक्षिण भारत 19 मार्च (गुरुवार)
बैसाखी पंजाब 14 अप्रैल (मंगलवार)
विशु केरल 14/15 अप्रैल
पोइला बैसाख पश्चिम बंगाल 15 अप्रैल (बुधवार)
बेस्तु वरस गुजरात 9 नवंबर (सोमवार)

बदल रहा है नजरिया

हाल के वर्षों में युवा पीढ़ी के बीच अपनी पारंपरिक जड़ों की ओर लौटने का रुझान बढ़ा है. सोशल मीडिया पर भी 1 जनवरी के बजाय क्षेत्रीय नववर्ष की शुभकामनाओं का चलन बढ़ा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत जैसे विविध देश में सांस्कृतिक साक्षरता के लिए इन तिथियों को जानना आवश्यक है. यदि आप अपने दोस्तों को सही मायने में सांस्कृतिक रूप से सटीक बधाई देना चाहते हैं, तो 19 मार्च या 14 अप्रैल की तारीखें याद रखें.

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