Eid-Ul-Fitr 2025: भारत में इस दिन मनाई जाएगी ईद! जानें इसकी तिथि और इस पर्व से जुड़े 'जकात' के बारे में विस्तार से!

ईद की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. पूरे माह रोजा रखने वाले मुसलमानों को अब बेसब्री से ईद के चांद के दीदार का इंतजार है, इसके साथ ही माह-ए-रमजान का त्योहार सम्पन्न होगा, और अगले दिन ईद मनाई जाएगी.

ईद-उल-फितर मुबारक 2025 (Photo Credits: File Image)

 Eid-Ul-Fitr 2025:  ईद की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. पूरे माह रोजा रखने वाले मुसलमानों को अब बेसब्री से ईद के चांद के दीदार का इंतजार है, इसके साथ ही माह-ए-रमजान का त्योहार सम्पन्न होगा, और अगले दिन ईद मनाई जाएगी. आइये जानते हैं, इस वर्ष इस्लामिक गणना के अनुसार ईद-उल-फितर कब मनाया जाएगा, साथ ही जानेंगे ईद के त्योहार के साथ ही जकात की परंपरा क्यों और कैसे निभाई जाती है, और क्या है इसका महत्व.

कब मनाई जाएगी ईद?

इस वर्ष 1 मार्च 2025 को भारत में चांद दिखने के बाद 2 मार्च 2025 से पवित्र रमजान माह की शुरुआत हुई थी. इस वजह से इस वर्ष अगर 30 मार्च को चांद दिखता है तो 31 मार्च 2025 को ईद मनाई जाएगी, अथवा 01 अप्रैल 2025 को ईद-उल-फितर का पर्व मनाया जाएगा. यह भी पढ़ें : Eid ul Fitr Moon Sighting Saudi Arabia 2025: सऊदी अरब में कब मनाई जाएगी ईद? जानें कब होगा चांद का दीदार  

इस्लाम में जकात क्यों जरूरी है?

  इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार जकात इस्लाम के पांच स्तंभों में एक है, जो धन को शुद्ध करता है, गरीबों की मदद करता है, और समाज में आर्थिक असमानता को कम करता है. इसलिए ईद-उल-फितर पर्व पर जरूरतमंदों को जकात देना आवश्यक है. इसके महत्व को निम्न बिंदुओं से समझा जा सकता

धन की शुद्धता: जकात देने से निजी संपत्ति शुद्ध होती है, और यह सुनिश्चित होता है कि धन का उपयोग सामाजिक न्याय की कसौटी पर खरा उतरे. 

गरीबों की मदद: जकात का उद्देश्य समाज के गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करना हैताकि वे अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा कर सकें. 

आर्थिक असमानता को कम करना: जकात अर्थात दान की प्रक्रिया समाज में आर्थिक असमानता को कम करने में मदद करता है, क्योंकि यह अमीरों के धन को गरीबों में वितरित करता है.

सामाजिक न्याय: ईद जैसे पर्व के अवसर पर अमीर से गरीबों को जकात बांटना सामाजिक न्याय की भावना को बढ़ावा देता है. यह दर्शाता है कि समाज के हर वर्ग पर्व को सेलिब्रेट करने योग्य बनें.

अल्लाह की उपासनाः जकात अल्लाह की इबादत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, और हर मुसलमान अल्लाह की इबादत करने में सक्षम होता है.  

जकात बांटने का आधार

जकात हर उस मुसलमान के लिए आवश्यक है, जिसके पास पर्याप्त धन राशि जिसे 'निसाब' कहा जाता है, से अधिक की संपत्ति होती है. इस्लामिक नियमों के अनुसार जकात वितरण की धनराशि जकात देने योग्य मुसलमान की संपत्ति का 2.5 प्रतिशत होता है, जिसे गरीबों अथवा जरूरतमंदों को वितरित किया जाना चाहिए. इसके लिए कोई तिथि मुकर्रर नहीं होती. साल में किसी भी समय जकात दिया जा सकता है. यहां बता दें कि ईद के पश्चात जो दान दिया जाता है, उसे फितरा अथवा जकात-अल-फित्र कहा जाता है, जो जकात से अलग होता है. 

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