Easter 2026 Date in India: 'ऐश वेडनेसडे' के साथ आज से शुरू हुआ लेंट का पवित्र सीजन, जानें भारत में कब मनाया जाएगा ईस्टर संडे
भारत सहित दुनिया भर में आज, 18 फरवरी को 'ऐश वेडनेसडे' मनाया जा रहा है, जो ईस्टर से पहले 40 दिनों के उपवास और प्रार्थना (लेंट) की शुरुआत का प्रतीक है. जानें इस साल ईस्टर की तारीख और इसके पीछे की धार्मिक गणना.
Easter 2026 Date in India: भारत के करोड़ों ईसाई समुदाय (Christians) के लोगों के लिए आज, बुधवार 18 फरवरी 2026 से 'लेंट' (Lent) के पवित्र सीजन की शुरुआत हो गई है. आज 'ऐश वेडनेसडे' (Ash Wednesday) मनाया जा रहा है, जो ईस्टर संडे (Easter Sunday) की तैयारी के लिए 40 दिनों के उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित का आधिकारिक प्रारंभ है. इस साल ईस्टर संडे 5 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा. ईस्टर को एक 'चलायमान उत्सव' (Movable Feast) माना जाता है, क्योंकि इसकी तारीख हर साल चंद्र चक्र के आधार पर बदलती रहती है. यह भी पढ़ें: Chhatrapati Shivaji Jayanti 2026 Date and Tithi: तारीख और तिथि के अनुसार कब है छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती का उत्सव
ईस्टर 2026 का कैलेंडर और महत्वपूर्ण तिथियां
ईसाई परंपरा में ईस्टर की तारीख 'वसंत विषुव' (Spring Equinox) के बाद आने वाली पहली पूर्णिमा के बाद के पहले रविवार को निर्धारित की जाती है. इस गणना के आधार पर 2026 के पवित्र सप्ताह का शेड्यूल इस प्रकार है:
- ऐश वेडनेसडे (प्रारंभ): 18 फरवरी, 2026
- पाम संडे: 29 मार्च, 2026
- गुड फ्राइडे: 3 अप्रैल, 2026
- ईस्टर संडे: 5 अप्रैल, 2026
क्या है 'ऐश वेडनेसडे' का महत्व?
आज के दिन दिल्ली, मुंबई, गोवा और केरल जैसे प्रमुख केंद्रों के गिरजाघरों में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जा रही हैं. इस दौरान पादरी श्रद्धालुओं के माथे पर राख से 'क्रॉस' का चिन्ह बनाते हैं. यह राख पिछले वर्ष के पाम संडे पर इस्तेमाल की गई खजूर की टहनियों को जलाकर बनाई जाती है.
यह अनुष्ठान मनुष्य को उसकी नश्वरता की याद दिलाता है. राख लगाते समय 'याद रख कि तू मिट्टी है और मिट्टी में ही मिल जाएगा' जैसे वाक्यों का उच्चारण किया जाता है, जो 46 दिनों की आध्यात्मिक यात्रा (रविवारों को छोड़कर 40 दिन का उपवास) की शुरुआत का संकेत है.
भारत में 'लेंट' के दौरान पालन की जाने वाली परंपराएं
भारत के विभिन्न चर्चों और समुदायों में लेंट का पालन पूरी श्रद्धा के साथ किया जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- उपवास और परहेज: कई श्रद्धालु इन 40 दिनों के दौरान मांस, शराब या अपनी पसंदीदा विलासिता की वस्तुओं का त्याग करते हैं.
- दान-पुण्य (Almsgiving): इस सीजन में गरीबों और वंचितों की सहायता करने और दान देने पर विशेष जोर दिया जाता है.
- वे ऑफ द क्रॉस (Stations of the Cross): लेंट के दौरान हर शुक्रवार को विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं, जो ईसा मसीह के अंतिम घंटों और उनके बलिदान को याद करती हैं.
क्यों हर साल बदल जाती है ईस्टर की तारीख?
क्रिसमस (25 दिसंबर) के विपरीत, ईस्टर की तारीख स्थिर नहीं होती. इसका मुख्य कारण 325 ईस्वी में हुई नाइसिया की परिषद (Council of Nicaea) का निर्णय है. तब यह तय किया गया था कि ईस्टर चंद्र कैलेंडर (Lunar Calendar) के आधार पर मनाया जाएगा. चूंकि चंद्र मास सौर वर्ष से छोटा होता है, इसलिए ईस्टर 22 मार्च से 25 अप्रैल के बीच किसी भी रविवार को पड़ सकता है. ईस्टर की तारीख तय होने के ठीक 46 दिन पहले ऐश वेडनेसडे निर्धारित किया जाता है.