असम में क्यों तेज हो रही है 'मिया' मुसलमानों के खिलाफ मुहिम
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले से ही बांग्लाभाषी मुसलमानों के खिलाफ मुहिम चलाते रहे हैं. लेकिन हाल ही में असम बीजेपी के सोशल मीडिया पर पोस्ट हुए एक वीडियो पर विवाद बढ़ने के बाद अब पुलिस ने शिकायत दर्ज की है.असम प्रदेश बीजेपी ने बीते सप्ताह अपने एक्स हैंडल से मुख्यमंत्री का एक वीडियो जारी किया था. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बनाए गए उस वीडियो में उनको राइफल से मुस्लिम पहचान से जुड़े टोपी और दाढ़ी वाले लोगों पर बेहद करीब से निशाना साधते दिखाया गया था. उसमें 'विदेशी-मुक्त असम' और 'बांग्लादेशियों को कोई माफी नहीं' जैसे कैप्शन भी लगाए गए थे. वीडियो में मुख्यमंत्री के निशाने पर रहे लोगों में से एक चेहरा राज्य के कांग्रेस सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई से मिलता-जुलता बताया जा रहा है.

लेकिन यह वीडियो सामने आते ही विवाद तेज हो गया. कांग्रेस ने इसे बेहद भड़काऊ और नरसंहार भड़काने का प्रयास बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई. सीपीएम और सीपीआई ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की है.

विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने वीडियो को डिलीट करते हुए सफाई दी है कि समुचित जांच के बिना ही उसे अनधिकृत रूप से जारी किया गया था. प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने पत्रकारों से कहा, "बिना समुचित मंजूरी के अपरिपक्व तरीके से काम करने के लिए एक सह-संयोजक को हटा दिया गया है."

मुख्यमंत्री की सफाई: बांग्लादेश से अवैध रूप से आने वाले यानी मिया मुसलमानों के खिलाफ हैं, असमिया मुसलमानों के खिलाफ नहीं

दिलचस्प बात यह है कि बीते साल अगस्त में ही सैकिया ने पार्टी का सोशल मीडिया सेल के प्रबंधन के लिए चार लोगों को सह-संयोजक बनाया था. सैकिया डीडब्ल्यू से कहते हैं, "पार्टी असम में वाले अवैध अप्रवासी बांग्लादेशियों को लेकर चिंतित है. समाज में इनके खिलाफ आंदोलन जरूरी है. लेकिन पार्टी लेकिन पार्टी दुर्भावनापूर्ण तरीके से मुसलमानों को गोलियों से निशाना बनाने के विचार का समर्थन नहीं करती. संज्ञान में आते ही उस वीडियो को हटा दिया गया."

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने भी अपनी सफाई में कहा है कि वो बांग्लादेश से अवैध रूप से राज्य में आने वाले यानी मिया मुसलमानों के खिलाफ हैं, असमिया मुसलमानों के खिलाफ नहीं. सरमा ने गुवाहाटी में पत्रकारों को बताया, "वीडियो के खिलाफ कांग्रेस की शिकायत पर दिसपुर थाने में एक मामला दर्ज किया गया है. बीजेपी के एक कार्यकर्ता ने भी ऐसी ही शिकायत दर्ज कराई है."

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यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि असम में 'मिया' शब्द का इस्तेमाल बांग्लाभाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है. मिया को अपमानजनक माना जाता है. उन पर अवैध रूप से बांग्लादेश से आकर राज्य में बसने के आरोप लगाए जाते रहे हैं.

सीएम बिस्वा सरमा के सोशल मीडिया पोस्ट पर पहले भी हुए हैं विवाद

असम में प्रदेश बीजेपी के एक्स हैंडल से पोस्ट कंटेंट पर विवाद का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले बीते साल सितंबर में एआई से बना एक और वीडियो पोस्ट किया गया था जिसका शीर्षक था बीजेपी के बिना असम. उसमें मुसलमान समुदाय के लोगों को पारंपरिक पोशाक और महिलाओं को बुर्के में राज्य के विभिन्न इलाकों में दिखाया गया था. वीडियो में ऐसे कुछ लोग सीमा पर लगी कंटीले तारों की बाड़ के करीब से गुजरते नजर आते हैं. उसी समय वीडियो पर कैप्शन लिखा आता है अवैध अप्रवासी. उसका मकसद यह दिखाना था कि बीजेपी के सत्ता में नहीं रहने की स्थिति में असम पर घुसपैठियों का कब्जा हो जाएगा. करीब एक महीने बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका के आधार पर असम बीजेपी और एक्स से उस वीडियो को हटाने का निर्देश दिया था.

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मुस्लिम समुदाय के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंता सरमा के विवादास्पद बयानों का सिलसिला काफी लंबा है. वोमा इससे पहले मुस्लिम समुदाय पर बाढ़ जिहाद और खाद जिहाद के आरोप भी लगा चुके हैं. उसके बाद राज्य में मतदाता सूची का विशेष संशोधन शुरू होने पर उन्होंने दावा किया था कि सूची से चार से पांच लाख मिया वोटरों के नाम कट जाएंगे. हालांकि अंतिम सूची में 2.4 लाख नाम ही कटे हैं. उन्होंने लोगों से मिया समुदाय को परेशान करने की अपील करते हुए कहा था कि परेशान होने पर ही वो असम छोड़ कर बाहर जाएंगे. मुख्यमंत्री ने इसी साल 28 जनवरी को कहा था, मिया समुदाय का रिक्शावाला अगर पांच रुपए किराया मांगे तो उसे चार रुपए ही देना चाहिए.

वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक, राज्य की आबादी में 34.22 फीसदी मुसलमान थे. मोटे अनुमान के मुताबिक, अब यह बढ़कर करीब 40 फीसदी तक पहुंच गई है. राज्य के 11 जिले मुस्लिम बहुल हैं. इनमें सबसे ज्यादा करीब 95 फीसदी मुस्लिम आबादी साउथ सालमारा जिले में रहती है. बांग्लादेश की सीमा से सटे इस इलाके को धुबड़ी जिले से काटकर अलग जिला बनाया गया था. इसके बाद क्रमशः धुबड़ी (79.67 फीसदी) और बरपेटा (70.74 फीसदी) का स्थान है. इन जिलों में बीते दो साल से बड़े पैमाने पर चलाया गया अतिक्रमण अभियान भी सुर्खियों में रहा है. इसके निशाने पर भी बांग्लाभाषी मुसलमान ही रहे हैं. असम में मतदाता सूची का 'गहन' नहीं 'विशेष पुनरीक्षण' क्यों?

राजनीतिक विश्लेषक: बीजेपी का निशाना असम नहीं पश्चिम बंगाल है

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मुख्यमंत्री सरमा पर राज्य में हिंसा को बढ़ावा देने के लिए भड़काऊ बयान देने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि इससे राज्य में बड़े पैमाने पर अशांति पैदा होने की आशंका है. कांग्रेस नेता अमन वदूद वे भी ऐसा ही आरोप लगाया है. उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, "बीजेपी ने बार-बार साबित कर दिया है कि उसे कानून या बुनियादी शिष्टाचार की कोई परवाह नहीं है. इससे पार्टी की हताशा जाहिर होती है. उसे अगले चुनाव में हार का खतरा सता रहा है."

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी 'एक्स' पर अपनी एक पोस्ट में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों से सरमा के उस वीडियो का संज्ञान लेने की अपील की है. लेकिन देश के बाकी हिस्सों में जहां एक मामूली टिप्पणी या सोशल मीडिया पोस्ट पर गिरफ्तारिया हो जाती हैं वहीं सरमा के ऐसे वीडियो के बावजूद अब तक उनके या इसे पोस्ट करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी है?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि हिमंता सरमा को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने काफी ढील दे रखी है. इसकी वजह उनका पूर्वोत्तर की राजनीति में चाणक्य की भूमिका में होना है. इलाके के तमाम राज्यों में होने वाले चुनाव और सरकार के गठन में उनकी अहम भूमिका रही है.

राजनीतिक विश्लेषक सुमन भट्टाचार्य डीडब्ल्यू से कहते हैं, "बीजेपी की निगाहें दरअसल असम से सटे बंगाल पर है. वो यहां बांग्लादेशी मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर मुहिम चला कर बंगाल में रहने वाले कथित बांग्लादेशियों को कड़ा संदेश देना चाहती है." उनका कहना था कि बीजेपी की प्राथमिकता बंगाल है, असम नहीं.

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कोलकाता में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर रहे देवाशीष सेन डीडब्ल्यू से कहते हैं, "हिमंता सरमा मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद से ही बांग्ला भाषी मुसलमानों को निशाना बनाते रहे हैं. उनका एक मकसद खुद को असम के सबसे बड़े हितैषी बताकर सत्ता पर काबिज रहना है. यही वजह है कि वो बांग्लाभाषी मुसलमानों के साथ ही कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर भी लगातार हमले कर रहे हैं."

लेकिन उनके खिलाफ ऐसे बयानों के लिए अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी है? इस पर सेन ने उल्टे सवाल किया कि आखिर कार्रवाई कौन करेगा? उनके सर पर बीजेपी के केंद्रीय नेताओं का हाथ है. अगर पहले ही उनको ऐसी टिप्पणियों के लिए टोका गया होता तो अब ऐसे वीडियो सामने नहीं आते.