पश्चिम बंगाल की बाढ़ के लिए भूटान से मुआवजे की मांग क्यों?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के उत्तर बंगाल इलाके में आई बाढ़ के लिए भूटान को जिम्मेदार ठहराते हुए इस पड़ोसी देश से मुआवजे की मांग की.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य के उत्तर बंगाल इलाके में आई बाढ़ के लिए भूटान को जिम्मेदार ठहराते हुए इस पड़ोसी देश से मुआवजे की मांग की. उन्होंने भारत-भूटान साझा नदी आयोग बनाने की मांग भी दोहराई.उत्तर बंगाल के आठ में से पांच जिले बीते कुछ सप्ताह से भारी बाढ़ की चपेट में हैं. इनमें चाय बागान बहुल डुआर्स इलाका भी शामिल है. इसमें अब तक कम से कम तीस लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर होकर राहत शिविरों में दिन काट रहे हैं. इसके अलावा धान के खेतों और चाय बागानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते दिनों दो बार इलाके का दौरा किया है. उन्होंने केंद्र सरकार पर राहत और बचाव कार्यो के लिए जरूरी मदद नहीं देने का आरोप लगाया है.
बीते चार-पांच अक्टूबर को आई बाढ़ के अगले दिन ममता बनर्जी ने पहली बार जलपाईगुड़ी जिले के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया था. उसके बाद वो फिर से वहां गईं. उन्होंने इलाके के कई राहत शिविरों का दौरा कर पीड़ितों को मुआवजा दिया और बाढ़ से नष्ट सरकारी दस्तावेजों को नए सिरे से बनाने के लिए विशेष कैंप लगाने का भरोसा दिया.
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भूटान पर आरोप क्यों?
ममता बनर्जी ने इलाके की बाढ़ के लिए भूटान में डोलोमाइट के खनन और टाला हाइड्रो पावर परियोजना के बांध में तकनीकी गड़बड़ी को जिम्मेदार ठहराया है. मुख्यमंत्री का आरोप है कि इस परियोजना से जरूरत से ज्यादा मात्रा में छोड़े गए पानी ने बाढ़ की स्थिति गंभीर बना दी. सरकार ने इस बाढ़ से करीब पांच सौ करोड़ रुपए का नुकसान होने का दावा किया है.
ममता बनर्जी ने कहा, "भूटान से अतिरिक्त मात्रा में छोड़े गए पानी के कारण ही उत्तर बंगाल इलाके में हर साल भयावह बाढ़ आती है. भूटान सरकार को इसके लिए मुआवजा देना चाहिए." ममता बनर्जी के मुताबिक, भूटान से छोड़े गए पानी के साथ वहां डोलोमाइट की खदानों से बहकर आने वाला डोलोमाइट इलाके के खेतों की उर्वरता खत्म करता है. इसका असर नदियों की गहराई और बहाव पर भी नजर आने लगा है. उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को इस डोलोमाइट को पानी और तटवर्ती इलाकों से हटाने का निर्देश दिया है. ममता ने कहा, "इस डोलोमाइट को बेच कर बाढ़ के नुकसान की कुछ हद तक क्षतिपूर्ति की जा सकती है."
मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं लंबे समय से भारत-भूटान संयुक्त नदी आयोग के गठन की मांग करती रही हूं. इसमें पश्चिम बंगाल का भी प्रतिनिधित्व होना चाहिए." ममता का आरोप है कि केंद्र सरकार ने प्राकृतिक आपदा से निपटने के मद में राज्य को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी है.
टी, टिंबर और टूरिज्म
डुआर्स इलाके की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से अंग्रेजी के टी अक्षर से बने तीन शब्दों 'टी', 'टिंबर' और 'टूरिज्म' पर निर्भर है. लेकिन इस बाढ़ ने इनमें से दो क्षेत्रों, चाय और पर्यटन को भारी नुकसान पहुंचाया है.
राज्य पर्यटन विभाग की ईको-टूरिज्म कमेटी के अध्यक्ष राज बसु डीडब्ल्यू से कहते हैं, "इस साल दुर्गा पूजा अपेक्षाकृत थोड़ा पहले पड़ी. बंगाल में यह पीक टूरिस्ट सीजन माना जाता है. इस दौरान इलाके के तमाम होटल और होमस्टे 90 फीसदी बुक थे. लेकिन इस बाढ़ ने पर्यटन उद्योग की कमर तोड़ दी है."
डुआर्स टूरिज्म डेवलपमेंट फोरम के संयुक्त सचिव बिप्लब दे ने डीडब्ल्यू से कहा, "भूटान से आने वाले पानी के कारण आई बाढ़ की वजह से होटलों, रिसॉर्ट्स और होमस्टे को भारी नुकसान पहुंचा है. पीक सीजन में यह भारी झटका है."
चाय बागान मालिकों के संगठन इंडियन टी एसोसिएशन की डुआर्स शाखा के एक प्रवक्ता ने डीडब्ल्यू को बताया कि इलाके के कम कम तीस चाय बागानों में बाढ़ का पानी भरने से 50 करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है. वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ के कारण जलदापाड़ा नेशनल पार्क में एक सींग वाले छह गैंडों के अलावा कई हाथियों की मौत हो गई है.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर बंगाल की ज्यादातर नदियां भूटान की पहाड़ियों से निकलती हैं. उद्गम क्षेत्र में भारी बारिश होने पर इनका जलस्तर तेजी से बढ़ता है. भूटान में डोलोमाइट के खनन ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है. इस साल वहां एक पनबिजली परियोजना के लिए बने बांध में तकनीकी गड़बड़ी से जरूरत से बहुत ज्यादा पानी छोड़े जाने के कारण स्थिति भयावह हो गई है.
पर्यावरण कार्यकर्ता सनत कुमार गांगुली डीडब्ल्यू ने बताया, "बांग्लादेश की तर्ज पर भूटान के साथ भी संयुक्त नदी आयोग का गठन जरूरी है. इससे नदियों के जलस्तर और भूटान से छोड़े जाने वाले पानी पर निगाह रखी जा सकती है. ऐसा नहीं होने तक हर साल यह इलाका बाढ़ में डूबता रहेगा."
एक गैर-सरकारी संगठन की सचिव नवनीता मंडल डीडब्ल्यू से कहती हैं, "उत्तर बंगाल में बाढ़ की समस्या दशकों पुरानी है. लेकिन हाल के वर्षो में इसकी गंभीरता बढ़ी है. अब इसका स्थाई समाधान जरूरी है. संयुक्त नदी आयोग का गठन इस दिशा में पहला ठोस कदम हो सकता है."
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 19, 2025 01:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

