कौन है भगोड़ा Harshit Babulal Jain? ₹2,300 करोड़ के सट्टेबाजी घोटाले का मास्टरमाइंड पकड़ाया, UAE से हुआ प्रत्यर्पित

Who Is Harshit Babulal Jain: देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी (Online Betting) और मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) मामलों में से एक के मुख्य आरोपी हर्षित बाबूलाल जैन को आखिरकार भारत वापस लाया गया है. गुजरात पुलिस और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के सहयोग से यह बड़ी कार्रवाई की. जैन को 5 सितंबर 2025 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत प्रत्यर्पित किया गया था. वह लगभग दो साल से फरार था और उस पर लगभग 2300 करोड़ रुपये की कर चोरी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध सट्टेबाजी (Satta Matka) का आरोप है. अधिकारियों के अनुसार, जैन को अगस्त 2023 में इंटरपोल द्वारा रेड नोटिस जारी करके वैश्विक रूप से वांछित घोषित किया गया था.

इसके बाद, भारत ने दुबई प्रशासन से लगातार संपर्क बनाए रखा और आखिरकार उसकी वापसी संभव हो पाई. माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी से इस अवैध नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े राज खुलेंगे.

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कौन हैं हर्षित बाबूलाल जैन?

हर्षित जैन का जन्म 12 फरवरी 1985 को अहमदाबाद, गुजरात में हुआ था. वह 39 साल के हैं और क्रिकेट सट्टे (Cricket Betting) के सबसे बड़े गिरोहों में गिने जाते हैं. बताया जाता है कि जैन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सट्टे का बड़ा कारोबार खड़ा किया है. इसमें महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप (Mahadev Online Betting App) जैसे प्लेटफॉर्म और कई फॉरेक्स ट्रेडिंग शामिल हैं.

 2023 में हुआ था खुलासा

मार्च 2023 में गुजरात पुलिस की छापेमारी में उसके नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ था. उस समय सैकड़ों बैंक खाते, मोबाइल डिवाइस और लेन-देन के रिकॉर्ड जब्त किए गए थे. जांच में पता चला कि जैन ने एजेंटों और सट्टेबाजों के ज़रिए 2300 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की.

जैन का नाम सिर्फ सट्टेबाजी तक ही सीमित नहीं था. बताया जाता है कि वह सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) और अमित मजीठिया (Amit Majithia) जैसे इस अवैध कारोबार के दूसरे बड़े खिलाड़ियों का भी करीबी है. इन रिश्तों ने उसे एक अवैध साम्राज्य खड़ा करने में मदद की.

2 साल से पीछे लगी थीं एजेंसियां

मार्च 2023 की कार्रवाई के बाद जैन दुबई भाग गया. तभी से भारतीय एजेंसियां उसके पीछे लगी हुई थीं. अब उसके भारत लौटने के बाद, उससे कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है, जिससे जांच इस बड़े गिरोह के और सदस्यों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

यह मामला न केवल एक आर्थिक अपराध माना जा रहा है, बल्कि देश की वित्तीय सुरक्षा के लिए भी एक चुनौती माना जा रहा है. अब देखना यह है कि पूछताछ के दौरान हर्षित जैन और कौन-कौन से नाम उजागर करता है.