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Who Invented Butter Chicken: बटर चिकन और दाल मखनी का आविष्कार किसने किया? दिल्ली हाईकोर्ट करेगा फैसला

एक दिलचस्प कानूनी लड़ाई सामने आई है. दिल्ली उच्च न्यायालय प्रिय भारतीय व्यंजनों - बटर चिकन और दाल मखनी को विकसित करने के अधिकार के सही दावेदार का फैसला करने के लिए तैयार है.

Who Invented Butter Chicken: बटर चिकन और दाल मखनी का आविष्कार किसने किया? दिल्ली हाईकोर्ट करेगा फैसला
दिल्ली उच्च न्यायालय, बटर चिकन और दाल मखनी (Photo Credits: ANI/Wikimedia Commons)

नई दिल्ली: एक दिलचस्प कानूनी लड़ाई सामने आई है. दिल्ली उच्च न्यायालय प्रिय भारतीय व्यंजनों - बटर चिकन और दाल मखनी को विकसित करने के अधिकार के सही दावेदार का फैसला करने के लिए तैयार है. लड़ाई मोती महल और दरियागंज रेस्तरां के बीच शुरू हुई है. वे "बटर चिकन और दाल मखनी के आविष्कारक" टैगलाइन के उपयोग को लेकर आमने-सामने हैं.

मोती महल का आरोप है कि दरियागंज रेस्तरां दोनों रेस्तरांओं के बीच कनेक्‍शन होने की बात कहकर भ्रम फैला रहा है. मामले की जड़ मोती महल के इस तर्क में निहित है कि उसके रेस्तरां की पहली शाखा दरियागंज इलाके में खोली गई थी. उसका तर्क है कि इस भौगोलिक संबंध का दरियागंज द्वारा एक ऐसे पाक संबंध को दर्शाने के लिए शोषण किया जा रहा है, जो वजूद में ही नहीं है. Delhi Hospitals Half Day: 22 जनवरी को दिल्ली में AIIMS समते कई बड़े हॉस्पिटल आधे दिन के लिए रहेंगे बंद, जारी रहेंगी इमरजेंसी सेवाएं

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजीव नरूला की पीठ ने की. उन्होंने दरियागंज रेस्तरां के मालिकों को समन जारी कर एक महीने के भीतर लिखित जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया. इसके अतिरिक्त, अलावा उन्होंने अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए मोती महल के आवेदन पर नोटिस जारी किया और सुनवाई के लिए इसी साल 29 मई की तारीख तय की.

विवाद की जड़ बटर चिकन और दाल मखनी के आविष्कार पर प्रत्येक रेस्तरां के ऐतिहासिक दावे में निहित है. मोती महल इन प्रतिष्ठित व्यंजनों को बनाने का श्रेय अपने संस्थापक स्वर्गीय कुंदन लाल गुजराल को देता है जो विश्‍व स्तर पर भारतीय व्यंजनों का पर्याय बन गए थे.

मोती महल के अनुसार, देश विभाजन के बाद भारत आए गुजराल ने न केवल तंदूरी चिकन का आविष्कार किया, बल्कि बटर चिकन और दाल मखनी का भी आविष्कार किया.

मोती महल का सूट एक पाक-कथा का खुलासा करता है, जहां गुजराल, बिना बिके बचे हुए चिकन के सूखने से चिंतित थे, उन्होंने चतुराई से 'मखनी' या बटर सॉस का आविष्कार किया. यह सॉस, टमाटर, मक्खन, क्रीम और मसालों का मिश्रण, स्वादिष्ट बटर चिकन का आधार बन गया.

मोती महल ने आगे तर्क दिया कि दाल मखनी का आविष्कार बटर चिकन के आविष्कार से जटिल रूप से जुड़ा हुआ है, क्योंकि दाल मखनी बनाने के लिए काली दाल के साथ भी यही नुस्खा लागू किया गया था.

दरियागंज रेस्तरां ने अभी तक अपना आधिकारिक जवाब दाखिल नहीं किया है. इसके वरिष्ठ वकील अमित सिब्बल ने मोती महल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संदीप सेठी के आरोपों को सख्ती से खारिज कर दिया, और पूरे मुकदमे को स्पष्ट रूप से "बंबुनियाद" करार दिया.

अदालत के आदेश में कहा गया है, "उन्होंने (सिब्बल) श्री सेठी की दलीलों का पुरजोर विरोध किया और पूरे मुकदमे को गलत, निराधार और कार्रवाई के कारण से रहित करार दिया. श्री सिब्बल और श्री आनंद ने आगे तर्क दिया कि प्रतिवादी (दरियागंज के मालिक) किसी भी गलत प्रतिनिधित्व में शामिल नहीं हुए हैं. दावा और मुकदमे में लगाए गए आरोप सच्चाई से बहुत दूर हैं.”

उन्होंने दोनों पार्टियों के पूर्ववर्तियों - मोती महल के गुजराल और दरियागंज रेस्तरां के जग्गी द्वारा पेशावर में पहले मोती महल रेस्तरां की संयुक्त स्थापना को भी रेखांकित किया.

पेशावर में मोती महल रेस्तरां की तस्वीर के संबंध में, सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उक्त रेस्तरां दोनों पक्षों के पूर्ववर्तियों द्वारा संयुक्त रूप से स्थापित किया गया था, इस प्रकार छवि पर विशेष अधिकार के किसी भी दावे को अमान्य कर दिया गया, जिसका वादी दावा कर सकते हैं.

"श्री सिब्बल इस बात पर जोर देते हैं कि प्रतिवादी भी इस तस्वीर का उपयोग करने के लिए समान रूप से हकदार हैं. वह इस तथ्य पर जोर देते हैं कि प्रतिवादियों की वेबसाइट पर मौजूद तस्वीर में 'मोती महल' शब्द को हटा दिया गया है, जिससे वादी की शिकायत निराधार हो गई है." अदालत ने नोट किया.

वरिष्ठ अधिवक्ता सिब्बल, अधिवक्ता प्रवीण आनंद, ध्रुव आनंद सहित अन्य लोग दरियागंज रेस्तरां के मालिकों की ओर से पेश हुए, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता सेठी और चंदर एम. लाल और अन्य ने मोती महल का प्रतिनिधित्व किया.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 20, 2024 11:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).