Sajjan Kumar Dies: 1984 के सिख विरोधी दंगों में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 साल की उम्र में निधन
1984 के सिख विरोधी दंगा मामलों में तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार का गुरुवार (20 अगस्त) को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया. जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
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नई दिल्ली: वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में दोषी करार दिए गए कांग्रेस के पूर्व सांसद सज्जन कुमार (Sajjan Kumar) का गुरुवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में निधन हो गया. वे 80 वर्ष के थे. दिल्ली की तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे सज्जन कुमार को स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत (Brought Dead) घोषित कर दिया.
पालम कॉलोनी हिंसा और 2018 में मिली उम्रकैद की सजा
तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली में भड़की सिख विरोधी हिंसा के दौरान दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम कॉलोनी (राज नगर) इलाके में एक ही सिख परिवार के पांच लोगों की हत्या कर दी गई थी.
- निचली अदालत का फैसला पलटा: वर्ष 2013 में कड़कड़डूमा अदालत ने सज्जन कुमार को बरी कर दिया था, जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई.
- हाईकोर्ट की सजा: 17 दिसंबर 2018 को दिल्ली उच्च न्यायालय ने निचली अदालत का फैसला पलटते हुए सज्जन कुमार को आपराधिक षड्यंत्र, दंगा भड़काने और सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का दोषी पाया और उम्रकैद की सजा सुनाई. इसके बाद उन्होंने आत्मसमर्पण किया और तब से वे तिहाड़ जेल में बंद थे.
- सुप्रीम कोर्ट में लंबित थी अपील: उन्होंने अपनी दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की थी, जो उनके निधन के समय लंबित थी.
सज्जन कुमार का निधन
Sajjan Kumar, former Member of Parliament and leader of the Indian National Congress, is no more. He was brought dead to Delhi's Safdarjung Hospital: Hospital sources
ANI File Photo pic.twitter.com/BvYJR9PXcT
— ANI (@ANI) August 20, 2026
सरस्वती विहार हिंसा मामले में भी ठहराए गए थे दोषी
सज्जन कुमार को 1984 दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में भी अदालत ने दोषी ठहराया था:
- 1 नवंबर 1984 को सरस्वती विहार इलाके में भीड़ का नेतृत्व करने, घरों में लूटपाट व आगजनी करने और जसवंत सिंह व उनके बेटे तरुणदीप सिंह को जिंदा जलाने के मामले में भी उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.
- वहीं, जनवरी 2026 में दिल्ली की राउज एवेन्यू विशेष अदालत ने जनकपुरी हिंसा से जुड़े एक मामले में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए उन्हें बरी किया था, हालांकि अन्य मामलों में आजीवन कारावास के चलते वे जेल में ही रहे.
राजनीतिक करियर और दंगों का साया
सज्जन कुमार दिल्ली की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में गिने जाते थे. वे बाहरी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से तीन बार सांसद निर्वाचित हुए थे.
1984 के दंगों में उनकी कथित भूमिका को लेकर सिख समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने दशकों तक कानूनी लड़ाई लड़ी. इन मामलों में नाम आने के बाद कांग्रेस पार्टी ने उन्हें चुनावी राजनीति से अलग कर दिया था. अस्पताल प्रशासन और पुलिस ने आवश्यक औपचारिकताओं के बाद उनके शव को पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए सुरक्षित रखा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 20, 2026 02:36 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

