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Old Monk Ban: बॉम्बे हाईकोर्ट में ओल्ड मोंक निर्माता की दलील; खोपोली प्लांट बंद होने से महाराष्ट्र को 300 करोड़ के आबकारी राजस्व का नुकसान, 300 कर्मचारी बेरोजगार

भारत के सबसे लोकप्रिय रम ब्रांड 'ओल्ड मोंक' (Old Monk) के निर्माता मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने बॉम्बे हाईकोर्ट को सूचित किया है कि खोपोली स्थित उसकी निर्माण इकाई के बंद होने से महाराष्ट्र सरकार को अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी (एक्साइज) राजस्व का नुकसान हो चुका है.

Old Monk Ban: बॉम्बे हाईकोर्ट में ओल्ड मोंक निर्माता की दलील; खोपोली प्लांट बंद होने से महाराष्ट्र को 300 करोड़ के आबकारी राजस्व का नुकसान, 300 कर्मचारी बेरोजगार
Old Monk (File Image)

मुंबई: देश के प्रतिष्ठित और सबसे ज्यादा बिकने वाले डार्क रम ब्रांड 'ओल्ड मोंक' की बिक्री और लेबलिंग को लेकर छिड़ा कानूनी विवाद अब बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंच गया है. निर्माता कंपनी मोहन रॉकी स्प्रिंगवाटर प्राइवेट लिमिटेड ने अदालत को बताया कि विनियामक अड़चनों के कारण महाराष्ट्र के खोपोली स्थित विनिर्माण संयंत्र के बंद होने से राज्य के खजाने को भारी वित्तीय चोट पहुंच रही है.

मुख्य न्यायाधीश एम. सी. त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की खंडपीठ के समक्ष सोमवार, 12 अक्टूबर को हुई सुनवाई के दौरान कंपनी ने पक्ष रखते हुए कहा कि अकेले महाराष्ट्र में लगी रोक से राज्य को अब तक 300 करोड़ रुपये से अधिक के आबकारी राजस्व से हाथ धोना पड़ा है.

देश भर में 88% बाजार हिस्सेदारी, केवल महाराष्ट्र में रोक पर उठाए सवाल

अदालत में कंपनी का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने इस बात पर जोर दिया कि देश के अन्य सभी राज्यों में ओल्ड मोंक का निर्माण और वितरण सामान्य रूप से जारी है:

  • राष्ट्रीय वितरण बनाम राज्यवार प्रतिबंध: वरिष्ठ वकील ने दलील दी, "चूंकि शराब पर आबकारी शुल्क राज्य का विषय है, इसलिए हर राज्य में हमारे संयंत्र हैं. अकेले महाराष्ट्र में प्रतिबंध के कारण राज्य को 300 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व नुकसान हुआ है और कारखाने के 300 कर्मचारी बेरोजगार बैठे हैं."
  • बाजार में दबदबा: कंपनी ने रेखांकित किया कि वह 88 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी के साथ देश में रम की सबसे बड़ी निर्माता है. इस पर पीठ ने भी सवाल किया कि यदि उत्पाद पूरे देश में वितरित किया जा रहा है, तो केवल महाराष्ट्र में ही आपत्तियां क्यों उठाई गईं.

लेबलिंग विवाद: 'रम' बनाम 'रम-लाइक' (Rum-like) पर खींचतान

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, यह विधिक गतिरोध भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा कंपनी के उत्पाद लेबल को खारिज करने के बाद पैदा हुआ:

  • एफएसएसएआई की आपत्ति: नियामक का कहना है कि प्रयोगशाला परीक्षणों में उत्पाद में कृत्रिम या प्रकृति-समान (nature-identical) फ्लेवरिंग एजेंट पाए गए हैं. प्राधिकरण के अनुसार, न्यूट्रल स्पिरिट में फ्लेवर मिलाकर तैयार किए गए पेय को सीधे 'रम' के रूप में बेचना उपभोक्ताओं को गुमराह करना है, बल्कि इसे 'फ्लेवर्ड स्पिरिट' या 'रम-लाइक' के तौर पर लेबल किया जाना चाहिए।
  • एजिंग टैग पर सवाल: नियामक ने बोतल पर लिखे '7 इयर्स ओल्ड ब्लेंडेड' (7 Years Old Blended) और 'वेरी ओल्ड वेटेड' जैसे विवरणों पर भी सवाल उठाए थे.
  • कंपनी का संशोधन: विवाद सुलझाने के लिए कंपनी ने '7 इयर्स ओल्ड' टैग हटाने और 'एडेड फ्लेवर' (Added Flavor) को प्रमुखता से दर्शाने वाले संशोधित लेबल जमा किए थे, लेकिन नियामक के साथ सहमति नहीं बन सकी.

पेय उद्योग पर एफएसएसएआई की सख्त कार्रवाई

ओल्ड मोंक के खिलाफ यह कदम पेय पदार्थों की मानक लेबलिंग को लेकर चल रहे एफएसएसएआई के व्यापक अभियान का हिस्सा है:

  • अन्य शराब ब्रांड्स पर कार्रवाई: इससे पहले यूनाइटेड स्पिरिट्स के 'मैकडॉवेल्स नंबर 1 रम', 'एंटीक्विटी ब्लू' और 'रॉयल चैलेंज' तथा इनब्रू बेवरेजेस के 'बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की' और 'ओल्ड कास्क रम' के विशिष्ट वेरियंट्स की बिक्री पर भी नियामक ने रोक लगाई थी. (हालांकि, यूनाइटेड स्पिरिट्स ने बाद में नियामक के साथ समझौता कर याचिका वापस ले ली थी).
  • एनर्जी ड्रिंक्स पर शिकंजा: गैर-अल्कोहलिक पेय क्षेत्र में भी एफएसएसएआई ने पेप्सिको, रिलायंस के 'कैम्पा' और मॉन्स्टर एनर्जी को कुछ उत्पादों के लिए "एनर्जी ड्रिंक" शब्द का इस्तेमाल बंद करने का निर्देश दिया था, जिस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी किए थे.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मामले में पक्षों को सुनने के बाद गुण-दोष के आधार पर अगली विस्तृत सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित की है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 13, 2026 09:20 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).