West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट के बीच मोदी सरकार ने 25 मार्च को बुलाई सर्वदलीय बैठक; रक्षा तैयारियों की समीक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलावों को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने 25 मार्च (बुधवार) को शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है.

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West Asia Crisis:  पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलावों को देखते हुए केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) ने 25 मार्च (बुधवार) को शाम 5 बजे एक महत्वपूर्ण सर्वदलीय बैठक बुलाई है. इस बैठक का उद्देश्य सभी राजनीतिक दलों को क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और भारत पर इसके संभावित प्रभावों से अवगत कराना है. इससे पहले आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने देश की रक्षा तैयारियों और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की.

शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ सुरक्षा समीक्षा

रक्षा मंत्री द्वारा आयोजित इस समीक्षा बैठक में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी शामिल हुए. इनके अलावा डीआरडीओ (DRDO) के अध्यक्ष समीर कामत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे. बैठक में मुख्य रूप से खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और भारतीय हितों की सुरक्षा पर चर्चा की गई. यह भी पढ़े: Middle East Conflict: पश्चिम एशिया तनाव के बीच PM नरेंद्र मोदी करेंगे तेल-गैस हालात की समीक्षा, सप्लाई पर सरकार की कड़ी नजर

पश्चिम एशिया संकट की वर्तमान स्थिति

पश्चिम एशिया में संघर्ष अब अपने चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद तनाव चरम पर पहुंच गया है. इसके जवाब में ईरान ने कई खाड़ी देशों में मौजूद इजराइली और अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया है. इस टकराव के कारण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) जैसा महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग बाधित हो गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार और आर्थिक स्थिरता पर बुरा असर पड़ रहा है.

ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियां

इससे पहले लोकसभा में सांसदों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने स्थिति को "चिंताजनक" बताया था. उन्होंने रेखांकित किया कि यह संघर्ष न केवल आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पेश कर रहा है, बल्कि एक मानवीय संकट भी बन गया है.

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की कच्चे तेल और गैस की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी युद्ध प्रभावित क्षेत्र से पूरा होता है. साथ ही, यह क्षेत्र अन्य देशों के साथ भारत के व्यापार के लिए एक प्रमुख मार्ग भी प्रदान करता है.

राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का रुख

जहां सरकार इस मुद्दे पर राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्षी दलों ने सरकार के रुख की आलोचना की है. विपक्ष ने प्रधानमंत्री के पिछले संबोधनों को "आत्म-प्रशंसा और पक्षपातपूर्ण संवाद" करार दिया है. हालांकि, सरकार का तर्क है कि इस वैश्विक संकट के समय में राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है. दुनिया भर के देश अब इस संघर्ष के जल्द समाधान के लिए सभी पक्षों से अपील कर रहे हैं ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके.

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