Vande Bharat Sleeper Trains Update: वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें देरी के शिकार? इंडियन रेलवे ने बताई फर्निशिंग और गुणवत्ता संबंधी समस्याएं
(Photo Credits WC)

Vande Bharat Sleeper Trains Update: भारत की सबसे तेज और आधुनिक ट्रेनों में शुमार वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का इंतजार अब और लंबा हो सकता है. रेलवे बोर्ड ने फर्निशिंग, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों से जुड़ी कई कमियों की ओर इशारा किया है, जिसके चलते ट्रेन का व्यावसायिक संचालन अक्टूबर 2025 की मूल योजना से आगे खिसक गया है. रेल मंत्रालय ने सभी जोनल रेलवे को निर्देश जारी किए हैं कि इन खामियों को दूर करने के बाद ही ट्रेन को अधिकतम 160 किमी/घंटा की गति से चलाया जाए

कोच की अहम बातें

यह 16-कोच वाली प्रोटोटाइप ट्रेन इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) द्वारा डिजाइन की गई है और BEML द्वारा निर्मित, जिसकी लागत करीब 120 करोड़ रुपये है. RDSO ने 1 सितंबर 2025 को अपनी अपडेटेड रिपोर्ट भेजी थी, लेकिन चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CCRS) की अंतिम मंजूरी के बाद ही मंत्रालय से संचालन की स्वीकृति मिलेगी. यह भी पढ़े: Vande Bharat Sleeper Express: दिवाली से पहले दौड़ेगी वंदे भारत स्लीपर एक्सप्रेस, दिल्ली पटना के बीच में चलेगी ट्रेन, जाने डिटेल्स

 फर्निशिंग और गुणवत्ता संबंधी खामियां

रेलवे बोर्ड के 28 अक्टूबर 2025 के पत्र में फर्निशिंग और वर्कमैनशिप से जुड़ी कई कमियों का जिक्र किया गया है. इनमें शामिल हैं:

समस्या का प्रकार विवरण
बर्थिंग क्षेत्र तेज किनारे और कोने, जो यात्रियों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
खिड़की के पर्दे हैंडल का खराब डिजाइन, जो उपयोग में असुविधा पैदा करता है।
बर्थ कनेक्टर्स बीच में 'पिजन पॉकेट' (छोटी-छोटी जगहें), जो सफाई और मेंटेनेंस में बाधा.
सामान्य वर्कमैनशिप निर्माण गुणवत्ता में कमी, जो भविष्य की रेकों में सुधार की जरूरत.

बोर्ड ने मौजूदा रेक में तत्काल सुधार और भविष्य की ट्रेनों में डिजाइन अपग्रेडेशन का आदेश दिया है.

रक्षा और संचालन संबंधी निर्देश

रेल मंत्रालय ने सभी जोनल रेलवे को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि ट्रेन का संचालन सुरक्षित और सुगम हो। मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • फायर-सेफ्टी: सभी उपायों का कड़ाई से पालन.
  • कावच 4.0: ट्रेन में फिटमेंट अनिवार्य।
  • संचार प्रणाली: लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर और स्टेशन मास्टर के बीच विश्वसनीय कनेक्टिविटी।
  • ब्रेक सिस्टम: सभी प्रकार का उचित रखरखाव.
  • आपातकालीन प्रशिक्षण: सेमी-पर्मानेंट कपलर को 15 मिनट में अलग करने का लोको पायलट को ट्रेनिंग; टूल किट में जरूरी उपकरण.
  • तापमान नियंत्रण: कोच में AC का सही मैनेजमेंट.
  • तकनीकी स्टाफ: आपात स्थितियों के लिए प्रशिक्षित कर्मचारी की उपलब्धता.
  • PA सिस्टम: यात्रियों को सुरक्षा निर्देश तीन भाषाओं (स्थानीय, हिंदी, अंग्रेजी) में प्री-रिकॉर्डेड मैसेज से दें; प्रस्थान से पहले गैर-यात्रियों को उतरने की चेतावनी.
  • मेंटेनेंस: योग्य स्टाफ, पर्याप्त स्पेयर पार्ट्स और कंज्यूमेबल्स की व्यवस्था.

हालांकि RDSO द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन करते हुए ट्रेन को 160 किमी/घंटा तक चलाने की अनुमति दी गई है, लेकिन रूट अभी फाइनल नहीं हुआ है.