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उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश देने पर भी, तैनाती स्थल पर रात नहीं गुजारते हैं अफसर!

मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी तहसील स्तरीय राजस्व और पुलिस अधिकारियों को अपने तैनाती स्थल पर 24 घंटे मौजूद रहने की हिदायत दी थी, तो अपर जिलाधिकारी ने कहा, "हिदायतें तो मिलती ही रहती हैं."

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  के आदेश देने पर भी, तैनाती स्थल पर रात नहीं गुजारते हैं अफसर!
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Photo Credits: PTI)

लखनऊ/बांदा: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तमाम हिदायतों के बाद भी बांदा जिले की विभिन्न तहसीलों में तैनात उपजिलाधिकारी अपना ठिकाना नहीं बदल रहे हैं. तहसील मुख्यालयों में सरकारी आवास होने के बावजूद सभी उपजिलाधिकारी जिला मुख्यालय को ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं. अपर जिलाधिकारी (वित्त/राजस्व) संतोष बहादुर सिंह ने बताया, "सभी उपजिलाधिकरियों को शासनादेश के मुताबिक जिला मुख्यालय में आवास आवंटित किए गए हैं. जिला मुख्यालय में रात गुजारना शासनादेश का उल्लंघन नहीं है."

जब उनसे पूछा गया कि सभी उपजिलाधिकारी शाम पांच बजे के बाद तहसील मुख्यालय छोड़ कर जिले में हाजिर हो जाते हैं, ऐसे में अन्य प्रशासनिक कामों और आम आदमी के कामों का निपटारा कैसे होता है? तो उन्होंने कहा, "शाम पांच बजे के बाद ज्यादातर काम पुलिस विभाग से जुड़े होते हैं, तो क्षेत्राधिकारी और थानाध्यक्ष उपजिलाधिकारी से आपसी सामंजस्य बनाकर निपटारा कर लेते हैं."

जब उन्हें ध्यान दिलाया गया कि एक नवंबर को मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी तहसील स्तरीय राजस्व और पुलिस अधिकारियों को अपने तैनाती स्थल पर 24 घंटे मौजूद रहने की हिदायत दी थी, तो अपर जिलाधिकारी ने कहा, "हिदायतें तो मिलती ही रहती हैं."

उल्लेखनीय है कि उपजिलाधिकारियों के हाजिर न रहने पर सबसे ज्यादा परेशानी पुलिस अधिकारियों को झेलनी पड़ रही है. पुलिस उपाधीक्षक (सीओ) नरैनी ओमप्रकाश ने कहा, "खनिज विभाग ने 17 अप्रैल, 2017 को जारी शासनादेश संख्या-355 (2)/86-2017-371/2005 के द्वारा राजस्व और पुलिस अधिकारियों का एक संयुक्त विशेष कार्यबल का गठित किया है, जिसमें अवैध खनन रोकने की जिम्मेदारी उपजिलाधिरी (एसडीएम) और पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) को सौंपी गई है.     यह भी पढ़ें:  उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो का दौरा करेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लेकिन, उपजिलाधिकारी (नरैनी) कार्य दिवस में सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक तो तहसील मुख्यालय पर मौजूद रहते हैं, लेकिन इसके बाद वह जिला मुख्यालय रवाना हो जाते हैं. ऐसे में अवैध बालू खनन की सूचना पर या कोई सड़क दुर्घटना होने पर सड़क जाम की स्थिति से निपटने में अकेले पुलिस को जूझना पड़ता है." उन्होंने बताया, "16 मार्च, 2018 को प्रमुख सचिव ने जारी एक पत्र में कहा है कि अवैध बालू खनन पर कोई भी पुलिस अधिकारी सीधे कार्रवाई नहीं करेगा और अवैध खनन की सूचना विशेष कार्यबल को देगा.

ऐसा न करने पर उनकी संलिप्तता मानी जाएगी." सीओ ने कहा, "प्रमुख सचिव के पत्र से पुलिस अधिकारियों की स्थिति सांप और छछूंदर जैसी बनी हुई है. रात में ही ज्यादातर अवैध खनन की सूचनाएं मिलती हैं. उस समय उपजिलाधिकारी 35 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय में होते हैं. पुलिस को सीधे कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है और कार्रवाई न करने पर 'संलिप्तता' का डर सता रहा है." यह भी पढ़ें:  CM योगी को मिला आजम खान का 'साथ', कहा- अयोध्या में श्रीराम की मूर्ति 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' से भी ऊंची हो

पुलिस क्षेत्राधिकारी (अतर्रा) कुलदीप सिंह भी यही बात कहते हैं. उन्होंने कहा, "उपजिलाधिकारी अपने कार्य दिवस के सात घंटे तक तो तहसील में रहते हैं. इसके बाद वह जिला मुख्यालय चले जाते हैं. बालू का अवैध खनन हो या आम आदमी की अन्य समस्याएं, अकेले झेलना पड़ता है. बालू का अवैध खनन रोकने में पुलिस के लिए सबसे बड़ा रोड़ा प्रमुख सचिव का पत्र है, जिस पर हम अकेले कोई कदम नहीं उठा सकते हैं. इसका फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं."

यहां बता दें कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक नवंबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सूबे के सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और पुलिस क्षेत्राधिकारियों को अपनी तैनाती स्थल के ही सरकारी आवास में रात गुजारने और क्षेत्र में उपलब्ध रहने की कड़ी हिदायत दी थी.

 

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 10, 2018 04:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).