UP Police Praised: यूपी पुलिस की तारीफ, पत्नी से झगड़े के बाद युवक ने इंस्टाग्राम पर डाला 'मौत का संदेश', 5 मिनट में बचाई जान

लखनऊ में यूपी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए एक युवक की जान बचाई. पत्नी से विवाद के बाद युवक ने इंस्टाग्राम पर सुसाइड नोट पोस्ट किया था, जिसके बाद पुलिस ने महज 5 मिनट में उसकी लोकेशन ट्रेस कर उसे सुरक्षित बचा लिया.

(Photo Credits Pixabay)

UP Police Praised: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में यूपी पुलिस का एक मानवीय और बेहद सक्रिय चेहरा सामने आया है. यहाँ एक युवक ने अपनी पत्नी से हुए विवाद के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक आत्मघाती पोस्ट साझा कर दी. इससे पहले कि युवक कोई गलत कदम उठा पाता, यूपी पुलिस की सोशल मीडिया सेल और स्थानीय पुलिस ने महज 5 मिनट के भीतर उसकी लोकेशन ट्रैक की और मौके पर पहुंचकर उसकी जान बचा ली. पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई की अब चारों ओर सराहना हो रही है.

इंस्टाग्राम पोस्ट और अलर्ट

घटना के अनुसार, युवक का अपनी पत्नी से किसी बात को लेकर गंभीर झगड़ा हुआ था. मानसिक तनाव में आकर उसने इंस्टाग्राम पर अपनी मौत की ओर इशारा करते हुए एक संदेश पोस्ट कर दिया. जैसे ही यह पोस्ट सार्वजनिक हुई, मेटा (Meta) के निगरानी तंत्र ने इसे संदिग्ध पाया और तुरंत यूपी पुलिस के सोशल मीडिया सेंटर को अलर्ट भेज दिया.  यह भी पढ़े: UP Constable Recruitment 2026: यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा की तारीखों का ऐलान, 32,679 पदों के लिए 8-9 और 10 जून को दो पालियों में एग्जाम

5 मिनट का 'रेस्क्यू ऑपरेशन'

अलर्ट मिलते ही लखनऊ पुलिस तुरंत हरकत में आई. पुलिस ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए युवक की लाइव लोकेशन का पता लगाया. सूचना मिलते ही संबंधित थाने की टीम महज 5 मिनट में युवक के पास पहुंच गई. पुलिस को देखते ही युवक भावुक हो गया. टीम ने उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाकर उसकी काउंसलिंग की और उसे समझाया कि आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं है.

मेटा और यूपी पुलिस का सफल गठबंधन

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश पुलिस और मेटा (फेसबुक/इंस्टाग्राम) के बीच साल 2022 से एक विशेष समझौता लागू है. इसके तहत यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या से संबंधित सामग्री पोस्ट करता है, तो मेटा तुरंत पुलिस मुख्यालय को ईमेल और फोन के माध्यम से अलर्ट भेजता है.

मानसिक स्वास्थ्य और पुलिस की अपील

पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी से करें. साथ ही, यदि परिवार में कोई सदस्य तनाव या अवसाद में दिखे, तो उससे संवाद करें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों या हेल्पलाइन नंबरों की मदद लें. पुलिस की इस तत्परता ने एक बार फिर साबित किया है कि तकनीक और मानवीय संवेदनशीलता मिलकर अनमोल जीवन बचा सकते हैं.

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