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UNICEF Climate Risk Report 2026: भारत में भीषण गर्मी की चपेट में 39.2 करोड़ बच्चे; यूनिसेफ की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

यूनिसेफ की 'चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026' के अनुसार, भारत में लगभग 39.2 करोड़ बच्चे (देश की बाल आबादी का 92 प्रतिशत) अत्यधिक गर्मी की स्थिति में रहने को मजबूर हैं. इनमें से 8.9 करोड़ बच्चे सीधे तौर पर गंभीर हीटवेव (लू) का सामना कर रहे हैं, जो उनके स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन के लिए बड़ा खतरा है.

UNICEF Climate Risk Report 2026: भारत में भीषण गर्मी की चपेट में 39.2 करोड़ बच्चे; यूनिसेफ की रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pexels)

नई दिल्ली, 17 जून: संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की एक नई और चिंताजनक रिपोर्ट में भारत में भीषण गर्मी (Scorching Heat) और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण बच्चों पर मंडराते गंभीर खतरों को लेकर चेतावनी जारी की गई है. यूनिसेफ की 'चिल्ड्रन्स क्लाइमेट रिस्क रिपोर्ट 2026' के मुताबिक, भारत में लगभग 39.2 करोड़ (32.9 करोड़ से अधिक) बच्चे अत्यधिक गर्मी (Extreme Heat) की स्थितियों में रह रहे हैं, जो देश की कुल बाल आबादी का तकरीबन 92 प्रतिशत है. इसके अलावा, रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 8.9 करोड़ बच्चे सीधे तौर पर खतरनाक लू (Heatwaves) के थपेड़ों को झेल रहे हैं. बढ़ते तापमान के कारण बच्चों के स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा और उनके जीवित रहने की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. यह भी पढ़ें: Ebola Virus Outbreak: इबोला संकट पर दुनिया अलर्ट, WHO ने घोषित की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी; भारत ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर नागरिकों को सतर्क रहने की दी सलाह

बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से 'हीट एक्शन प्लान' में बड़ी कमियां

रिपोर्ट में इस बात पर विशेष रूप से चिंता जताई गई है कि यद्यपि भारत के कई राज्यों और शहरों ने बढ़ते तापमान से निपटने के लिए 'हीट एक्शन प्लान' (Heat Action Plans) लागू किए हैं, लेकिन इन योजनाओं में बच्चों को लेकर कोई विशेष रणनीति नहीं बनाई गई है.

यूनिसेफ के आकलन के अनुसार, मौजूदा प्रशासनिक योजनाओं में शिशुओं, स्कूल जाने वाले बच्चों और किशोरों की विशिष्ट शारीरिक कमजोरियों और जरूरतों को ध्यान में रखने वाले आयु-विशिष्ट (Age-specific) उपायों की भारी कमी है.

स्कूल, आंगनवाड़ी और रात की गर्मी पर ध्यान देने की जरूरत

यूनिसेफ ने सिफारिश की है कि देश के नीति निर्माताओं को अपने हीट एक्शन प्लान का दायरा बढ़ाना चाहिए. संस्था का कहना है कि इसके अंतर्गत स्कूलों और आंगनवाड़ियों को सक्रिय रूप से शामिल किया जाना जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक गर्मी के दौरान पढ़ाई का माहौल बच्चों के लिए असुरक्षित हो जाता है.

इसके साथ ही, रिपोर्ट में 'रात के बढ़ते तापमान' (Nighttime Heat) के मुद्दे को भी रेखांकित किया गया है, जो बच्चों की नींद, शारीरिक रिकवरी और उनके समग्र विकास को प्रभावित करता है. यूनिसेफ ने लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Interventions) के लिए जिला स्तर पर बच्चों की संवेदनशीलता की मैपिंग करने का सुझाव दिया है.

दक्षिण एशिया में भारत शीर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शामिल

जलवायु जोखिम के मामले में यह रिपोर्ट भारत को इस क्षेत्र के सबसे संवेदनशील देशों की सूची में रखती है, जहां अत्यधिक गर्मी सबसे बड़े खतरे के रूप में उभरी है. क्षेत्रीय स्तर पर जलवायु जोखिम स्कोर के मामले में भारत केवल पाकिस्तान और बांग्लादेश से पीछे है.

विशेषज्ञों का कहना है कि वयस्क लोगों की तुलना में बच्चों में डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी), हीटस्ट्रोक और लंबे समय तक अत्यधिक तापमान में रहने के कारण विकासात्मक प्रभाव पड़ने का खतरा कहीं अधिक होता है। विशेष रूप से घनी आबादी वाले और शहरी हीट-स्ट्रेस क्षेत्रों में यह संकट और गहरा गया है.

वैश्विक स्तर पर भी हालात चिंताजनक

वैश्विक परिदृश्य की बात करें तो दुनिया भर में लगभग 1.1 अरब बच्चे कम से कम तीन परस्पर जुड़े जलवायु खतरों का एक साथ सामना कर रहे हैं. यूनिसेफ ने दुनिया भर की सरकारों से उत्सर्जन में कटौती में तेजी लाने और दीर्घकालिक जोखिमों को कम करने के लिए स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों की ओर बढ़ने का आग्रह किया है.

रिपोर्ट के निष्कर्ष यह स्पष्ट करते हैं कि यदि समय रहते बच्चों को एक अलग और अत्यधिक संवेदनशील समूह मानकर उनके अनुकूल नीतियां नहीं बनाई गईं, तो आने वाले वर्षों में उनके स्वास्थ्य और शिक्षा पर इसके बेहद गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 17, 2026 09:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).