Satara: पैर फिसला तो हादसा तय! स्कूल जाने के लिए लोहे के पोल का बच्चे कर रहे है इस्तेमाल, नीचे बह रहा है उफनता नाला, सातारा जिले का VIDEO आया सामने

देश में शहरी भागों में बड़े बड़े ब्रिज और चमचमाती सड़के होती है. लेकिन दूर दराज के गांवों में आज भी लोगों को सड़क और नदी,नालों पर ब्रिज नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को और छोटे छोटे बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है

Credit-(X,@fpjindia)

सातारा, महाराष्ट्र: देश में शहरी भागों में बड़े बड़े ब्रिज और चमचमाती सड़के होती है. लेकिन दूर दराज के गांवों में आज भी लोगों को सड़क और नदी,नालों पर ब्रिज नहीं होने की वजह से ग्रामीणों को और छोटे छोटे बच्चों को अपनी जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है. पिछले कुछ दिनों में हमने मध्य प्रदेश के कई जिलों के ग्रामीणों भागों में ऐसी घटनाएं देखी है और इसके वीडियो भी देखें है, जहांपर गर्भवती महिलाओं को खाट के सहारे नदी पार करवाई जा रही है, तो वही मध्य प्रदेश के ही सिवनी जिले में दो दिन पहले ही छात्रों का ऐसा वीडियो सामने आया है,जहांपर छात्र कीचड़ भरे रास्ते से स्कूल जाने को मजबूर है. अब महाराष्ट्र के ग्रामीण भागों की भी हालत ऐसी ही है. पिछले दिनों हमने पालघर जिले का वीडियो देखा था, जिसमें छात्र नदी पार करते हुए स्कूल जा रहे थे. अब सातारा जिले से एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है. जहांपर स्कूल के छोटे छोटे बच्चे एक उफनते हुए नाले पर रखे इलेक्ट्रिक के छोटे पोल से नाला पार कर रहे है.

अगर इनका पैर यहां से फिसलता है तो हादसा होना तय है. इस वीडियो को सोशल मीडिया X पर @fpjindia नाम के हैंडल से शेयर किया गया है. ये भी पढ़े:VIDEO: स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालने के लिए मजबूर छात्र, उफनती नदी पार करते हुए दिखे बच्चे, महाराष्ट्र के पालघर जिले का वीडियो आया सामने

पोल पार करते बच्चे

जगमीन गांव के हालात खराब

ये हालात गांव जगमीन गांव के है. पास बहने वाला नाला मानसून में लबालब भर जाता है. इसे पार किए बिना स्कूल जाना संभव नहीं. स्थायी पुल के अभाव में स्थानीय लोगों ने एक बिजली के खंभे को नाले पर रखकर अस्थायी पुल तैयार किया है, और इसी से रोज बच्चे पार जाते हैं. यह पुल न केवल संकरा है, बल्कि बरसात में फिसलन भरा और बेहद खतरनाक हो जाता है.

हर दिन मौत के साये में स्कूल का सफर

बारिश के मौसम में नाले में बहाव तेज होता है, रास्तों पर कीचड़, फिसलन और झाड़ियों से होकर गुजरना पड़ता है.बिजली के खंभे पर जमी काई और संकरी सतह बच्चों के लिए खतरे की घंटी है. कई बार बच्चों का पैर फिसलते-फिसलते बचता है, और नाले में गिरने का खतरा बना रहता है.

मशहूर पर्यटन स्थल है फिर भी हालात खराब

जगमीन गांव वही स्थान है जहां से प्रसिद्ध ठोसेघर वाटरफॉल का उद्गम होता है. यहां हजारों पर्यटक आते हैं, लेकिन स्थानीय लोगों की तकलीफें न किसी प्रशासन की नजर में आती हैं, न किसी जनप्रतिनिधि की. गांव की आबादी लगभग 300 है, और यहां ना पक्की सड़क है, ना पुल, ना सुरक्षित स्कूल तक पहुंचने का रास्ता.

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी

इन बच्चों की हालत 'जान जोखिम में, लेकिन मन में शिक्षा की आस' जैसी है. बच्चों को पता भी नहीं कि वे कितने खतरनाक रास्ते से गुजरते हैं.अफसोस की बात ये है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि भी इस परिस्थिति से अनजान बने हुए हैं, जैसे इस गांव का कोई वजूद ही न हो.मानसून में अतिवृष्टि, धुंध, जंगली जानवरों की आशंका और खेती लायक जमीन की कमी के चलते ग्रामीणों को सातारा या मुंबई की ओर पलायन करना पड़ता है. गर्मियों में यहां कुछ रौनक रहती है, लेकिन बाकी समय गांव वीरान रहता है.

रोजगार और पर्यटन विकास की जरूरत

कृषि और पर्यटन विभाग यदि मिलकर प्रयास करें, तो इस क्षेत्र में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. इससे न केवल गांव का विकास होगा, बल्कि बच्चों को सुरक्षित जीवन और शिक्षा का अधिकार भी मिलेगा.

 

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