VIRAL VIDEO: इंसानियत की मिसाल! तमिलनाडु के मदुरै में 76 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अधिकारी अपनी पेंशन से हर हफ्ते सैकड़ों बंदरों को खिलाती हैं भोजन
तमिलनाडु के मदुरै में रहने वाली 76 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मालती समाज के लिए मिसाल बनी हुई हैं. वह साल 2015 से अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा तिरुपरनकुंद्रम क्षेत्र में रहने वाले सैकड़ों बंदरों को भोजन कराने में खर्च कर रही हैं.
VIRAL VIDEO: तमिलनाडु के मदुरै में मानवता और जीव दया की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. यहां रहने वाली 76 वर्षीय सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मालती पिछले करीब एक दशक से अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा तिरुपरनकुंद्रम के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बेजुबान बंदरों को खाना खिलाने में खर्च कर रही हैं. बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद वह हर शनिवार को इन बेजुबानों की सेवा के लिए नियम से पहुंचती हैं. उनके एक बार आवाज लगाने पर ही वहां करीब 350 से 400 बंदर इकट्ठा हो जाते हैं.
साल 2015 में शुरू हुआ सेवा का यह सफर
मालती ने इस सेवा कार्य की शुरुआत साल 2015 में की थी. उस दौरान उन्होंने तिरुपरनकुंद्रम मुरुगन मंदिर और उसके आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बंदरों की भारी आबादी को भोजन के लिए संघर्ष करते देखा था. जंगली और पथरीला इलाका होने के कारण इन जीवों को आसानी से भोजन नहीं मिल पाता था. इसके बाद उन्होंने खुद के खर्च पर इन्हें नियमित रूप से भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प लिया. शुरुआत में वह हर दिन यहां आती थीं. हालांकि, अब उम्र से जुड़ी समस्याओं और चलने-फिरने में होने वाली कठिनाइयों के कारण वह हर शनिवार को यहां आकर अपनी सेवा जारी रखे हुए हैं. यह भी पढ़े: Jammu Encroachment News: जम्मू में घर ढहने के बाद इंसानियत की मिसाल, हिंदू पड़ोसी ने पत्रकार परिवार को दी जमीन
मानवता की मिसाल
#WATCH | Tamil Nadu: Malathi, a 76-year-old resident of Madurai, has been using a significant portion of her pension to feed monkeys living around Tirupparankundram since 2015. Despite her age and health challenges, she continues to visit several locations every Saturday, where… pic.twitter.com/3PBRtmdOao
— ANI (@ANI) June 23, 2026
छह अलग-अलग स्थानों पर जुटते हैं सैकड़ों बंदर
हर शनिवार दोपहर करीब 3.30 बजे मालती तिरुपरनकुंद्रम क्षेत्र के छह अलग-अलग स्थानों का दौरा करती हैं. इनमें मंदिर परिसर, सरवण पोइगई, पालचुनाईकंडा सुब्रमण्यम मंदिर, मयिल थोप्पू (मयूर उपवन) और किला क्षेत्र शामिल हैं. इन जगहों पर वह जैसे ही बंदरों को आवाज लगाती हैं, सभी उम्र के छोटे-बड़े बंदर भोजन के लिए दौड़ पड़ते हैं. मालती के अनुसार, गुफा मंदिर के पास करीब 150 और मयूर उपवन में लगभग 200 बंदरों का झुंड उनके बुलावे पर आता है.
जनसेवा और देश सेवा में बीता लंबा जीवन
76 वर्षीय मालती का पूरा जीवन दूसरों की सेवा के लिए समर्पित रहा है. साल 2010 में सेवानिवृत्त होने से पहले उन्होंने तमिलनाडु पुलिस विभाग में 33 वर्षों तक अपनी सेवाएं दी थीं. पुलिस विभाग में शामिल होने से पहले उन्होंने गांधीग्राम विश्वविद्यालय में शारीरिक शिक्षा निदेशक (डायरेक्टर ऑफ फिजिकल एजुकेशन) के रूप में कार्य किया था. इसके अलावा वह कोडाईकनाल के एक अंतरराष्ट्रीय स्कूल में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं.
बेजुबानों की सेवा से मिलती है मानसिक शांति
पेंशन के पैसों से इन बेजुबानों का पेट भरकर मालती को असीम आनंद मिलता है. उनका कहना है कि इन जानवरों की देखभाल करने से उन्हें गहरी मानसिक संतुष्टि और खुशी मिलती है. समाज द्वारा अक्सर उपेक्षित कर दिए जाने वाले इन जीवों के प्रति उनका यह समर्पण उनकी गहरी करुणा को दर्शाता है. मालती की इच्छा है कि वह जब तक शारीरिक रूप से सक्षम हैं, अपने जीवन के अंतिम क्षणों तक इस मानवीय कार्य को इसी तरह जारी रखेंगी.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 23, 2026 08:44 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

