'ऑपरेशन टाइगर' पर शिवसेना (UBT) का महायुति पर तीखा हमला: कहा-'किसानों के लिए पैसे नहीं, विधायकों को खरीदने के लिए असीमित फंड'
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने अपने मुखपत्र 'सामना' के जरिए महाराष्ट्र की महायुति सरकार पर तीखा हमला बोला है. छह सांसदों के पाला बदलने (ऑपरेशन टाइगर) को लेकर उद्धव गुट ने सरकार पर भ्रष्टाचार, किसान उपेक्षा और लोकतांत्रिक विफलताओं के गंभीर आरोप लगाए हैं.
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मुंबई: महाराष्ट्र में राजनीतिक दलबदल और 'ऑपरेशन टाइगर' (Operation Tiger) को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है. शिवसेना (Shiv Sena) (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने मंगलवार, 23 जून 2026 को सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Deputy Chief Minister Eknath Shinde) पर राज्य की छवि धूमिल करने का आरोप लगाया. पार्टी के मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में उद्धव गुट ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार जल संकट और किसानों की बदहाली जैसे गंभीर मुद्दों को सुलझाने के बजाय दलबदल का जश्न मना रही है. शिवसेना (UBT) ने दावा किया कि यह "पैसे की अहंकारी राजनीति" राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रही है.
यह राजनीतिक विवाद सोमवार को शिवसेना (UBT) के छह बागी सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने के बाद उपजा है, जिसे सत्तापक्ष द्वारा 'ऑपरेशन टाइगर' नाम दिया गया था. यह भी पढ़ें: New 'Shiv Sena Bhavan': मुंबई में नया 'शिवसेना भवन' बनाने की तैयारी में शिंदे गुट, 'मातोश्री' के पास या दादर में खोजी जा रही जमीन
'सामना' में तीखा कटाक्ष: दलबदल के जश्न पर उठाए सवाल
'सामना' के संपादकीय में उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के उस बयान की कड़ी आलोचना की गई, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन के सफल होने की बात कही थी. संपादकीय में लिखा गया, "जब महाराष्ट्र संकटों के पहाड़ का सामना कर रहा है, तब गृहमंत्री का दलबदलुओं की तारीफ करना और इसे एक सफल ऑपरेशन बताना अनुचित है."
उद्धव गुट ने मजाकिया और तीखे लहजे में आरोप लगाया कि इस पूरे दलबदल खेल (Operation Tiger) में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है. संपादकीय में सवाल उठाया गया कि जब राज्य के बुनियादी मुद्दों के लिए फंड की कमी का रोना रोया जाता है, तो राजनीतिक जोड़-तोड़ के लिए असीमित संसाधन कहां से आ जाते हैं.
ग्रामीण इलाकों में सूखा और मुंबई में जल संकट
शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र में जारी प्रशासनिक लापरवाही और प्राकृतिक संकटों की ओर ध्यान आकर्षित किया. संपादकीय के अनुसार, मानसून में देरी के कारण ग्रामीण महाराष्ट्र में पानी की भारी किल्लत पैदा हो गई है, जिससे चारा संकट और बड़े पैमाने पर पलायन का खतरा मंडरा रहा है.
इसके साथ ही, मुंबई को पानी की आपूर्ति करने वाले सात प्रमुख जलाशयों का जलस्तर गिरकर केवल 8.5 प्रतिशत रह गया है, जिसके कारण शहर में पानी की कटौती लागू करनी पड़ी है. विपक्ष का आरोप है कि संकट के इस दौर में सरकार जनता को राहत देने के बजाय राजनीतिक आयोजनों और फोटो-अप्स में व्यस्त है.
किसानों की बदहाली और नीट (NEET) पेपर लीक का मुद्दा
संपादकीय में महाराष्ट्र के कृषि संकट को प्रमुखता से रेखांकित किया गया. फडणवीस के उस बयान पर कि 'कर्जमाफी स्थायी समाधान नहीं है', सामना ने पलटवार करते हुए पूछा कि यदि कर्जमाफी समाधान नहीं है, तो सरकार किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और उचित फसल बीमा का लाभ क्यों नहीं दे पा रही है। उद्धव गुट ने आरोप लगाया, "राज्य में किसानों की आत्महत्याएं नहीं रुक रही हैं। सरकार के पास तड़पते किसानों के लिए पैसे नहीं हैं, लेकिन राजनेताओं को खरीदने के लिए असीमित फंड है।"
इसके अलावा, शिवसेना (UBT) ने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए दावा किया कि महाराष्ट्र नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) पेपर लीक घोटाले का मुख्य केंद्र बनकर उभरा है। पार्टी का आरोप है कि इस घोटाले में गिरफ्तार लोगों के तार सत्ताधारी दल से जुड़े हैं, जिससे राज्य के लाखों युवाओं का भविष्य अंधकार में चला गया है.
शासन की विफलता और विपक्ष के नेता का पद खाली
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने सरकार की महत्वाकांक्षी 'लाडकी बहिन' योजना को भी छलावा करार दिया। पार्टी का दावा है कि चुनाव समाप्त होते ही लगभग 81 लाख महिलाओं को मिलने वाली वित्तीय सहायता को रोक दिया गया है. इसके साथ ही विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों में गंभीर सूखा, बढ़ती बेरोजगारी और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की घेरेबंदी की गई है.
लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए संपादकीय में कहा गया कि वर्तमान में महाराष्ट्र विधानमंडल के दोनों सदन बिना किसी 'विपक्ष के नेता' (Leader of the Opposition) के चल रहे हैं. विपक्ष का आरोप है कि महायुति गठबंधन ने सदन में असहज करने वाले सवालों और जांच से बचने के लिए जानबूझकर इन नियुक्तियों में देरी की है, जो राज्य में लोकतांत्रिक कामकाज के लिए एक अभूतपूर्व झटका है. उद्धव गुट ने मांग की है कि जब तक सरकार इन बुनियादी मुद्दों पर जवाब नहीं देती, तब तक विधानसभा सत्र को स्थगित रखा जाना चाहिए.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 23, 2026 04:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

