BREAKING: कसाब को फांसी दिलवाने वाले वरिष्ठ वकील उज्ज्वल निकम बनेंगे राज्यसभा सांसद, हर्षवर्धन श्रृंगला समेत 4 लोगों को राष्ट्रपति मुर्मू ने किया मनोनीत
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यसभा के लिए चार प्रमुख व्यक्तित्वों को मनोनीत किया है. इन व्यक्तित्वों में वरिष्ठ वकील उज्ज्वल देवराव निकम (Ujjwal Deoraoji Nikam) , जो मुंबई आतंकी हमले के आरोपी कसाब को फांसी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं, भी शामिल हैं. इसके अलावा, हर्षवर्धन श्रृंगला, जो भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, सी. सदानंदन मस्ते, जो केरल के वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं, और मीनाक्षी जैन, जो एक प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद् हैं, को भी राष्ट्रपति ने राज्यसभा के लिए मनोनीत किया. इन सभी नामों के मनोनयन के बाद, गृह मंत्रालय ने शनिवार को एक अधिसूचना जारी की.

 जानें उज्ज्वल निकम के बारे में

उज्ज्वल निकम एक प्रसिद्ध और वरिष्ठ वकील हैं जिन्होंने मुंबई आतंकी हमले के आरोपी अजमल कसाब को फांसी दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी. उनकी कड़ी मेहनत और कानूनी विशेषज्ञता ने उन्हें न्याय की मिसाल बना दिया. अब वह संसद के ऊपरी सदन, राज्यसभा में एक सदस्य के रूप में अपनी भूमिका निभाएंगे. यह भी पढ़े: Rajya Sabha Elections: सोनिया गांधी तथा भाजपा के दो उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित

हर्षवर्धन श्रृंगला की भूमिका

हर्षवर्धन श्रृंगला एक वरिष्ठ राजनयिक हैं और 1984 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी रहे हैं. उन्होंने अपने 35 साल के लंबे करियर में भारत और विदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है. उनके राज्यसभा में मनोनयन से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति से जुड़ी महत्वपूर्ण समझ को संसद में योगदान मिलेगा.

सी. सदानंदन मस्ते और मीनाक्षी जैन

सी. सदानंदन मस्ते एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् हैं, जो केरल राज्य से हैं। उन्होंने सामाजिक कार्यों में कई महत्वपूर्ण योगदान किए हैं.

मीनाक्षी जैन एक प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद्

मीनाक्षी जैन एक प्रख्यात इतिहासकार और शिक्षाविद् हैं. उनका कार्य भारतीय इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में अत्यधिक महत्वपूर्ण रहा है, और उनके मनोनयन से राज्यसभा में ऐतिहासिक दृष्टिकोण से ज्ञान का योगदान होगा.

यह मनोनयन संविधान के अनुच्छेद 80(1)(a) और उसी अनुच्छेद के खंड (3) के तहत किए गए हैं, जो राष्ट्रपति को राज्यसभा के लिए सदस्य मनोनीत करने का अधिकार प्रदान करता है.