SC/ST कानून संशोधन विधेयक को राज्यसभा से भी मिली हरी झंडी
लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 पारित हो गया. इस संशोधन के जरिए सर्वोच्च न्यायालय का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा.
नई दिल्ली: लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा में भी अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन विधेयक, 2018 पारित हो गया. इस संशोधन के जरिए सर्वोच्च न्यायालय का वह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा, जिसके तहत एससी/एसटी अत्याचार निवारण के मामले में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी गई थी.
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर शीर्ष अदालत के आदेश को निरस्त कर एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के मूल प्रावधानों को बरकरार रखने की गुहार लगाई थी. सर्वोच्च कोर्ट के आदेश में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) विधेयक, 1989 के वास्तविक प्रावधानों को कमजोर बनाया गया था.
अदालत के आदेश में कहा गया था कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक(एसएसपी) की मंजूरी जरूरी होगी. लेकिन यह संभव नहीं है, क्योंकि भारत के अधिकतर जगहों पर एसएसपी नहीं हैं.
केंद्र सरकार ने इस अधिनियम के तहत अब 47 अपराधों को शामिल किया गया है, जबकि पहले इसमें सिर्फ 22 अपराधों को शामिल किया गया था.
बता दें कि इस कानून में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च के महिने में कुछ संशोधनों की संतुति करते हुए कुछ बदलाव किए थे. जिसके बाद एससी/एसटी संगठनों ने 'भारत बंद' बुलाया था, जिसमें दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं हुई थीं.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2018 04:20 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

