सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की उम्र होती है अलग-अलग, क्यों?
Judges Retirement Age: सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र होती है. मौजूदा संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज 65 वर्ष की उम्र में रिटायर होते हैं.
Judges Retirement Age : देश में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों (Judges) की अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र को लेकर कई तरह के तर्क दिए जाते है. संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि 25 उच्च न्यायालयों (High Court) के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं.
रिपोर्ट के अनुसार, कानून के कुछ जानकर मानते है कि जजों की अलग-अलग रिटायरमेंट उम्र न्यायिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. इस फर्क को खत्म कर रिटायरमेंट की उम्र समान कर देनी चाहिए. इससे न्यायिक प्रणाली को मजबूती मिलेगी, और देश को अनुभवी जजों की सेवाएं ज्यादा समय तक मिलती रहेंगी. सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र को लेकर संसद और विधि आयोगों में पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है.
क्या कहते हैं संविधान के नियम?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(2) के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज 65 साल की उम्र तक अपनी सेवा दे सकते हैं. दूसरी तरफ, अनुच्छेद 217 के अनुसार, हाईकोर्ट के जज 62 साल की उम्र में रिटायर होते हैं. इस अंतर को लेकर कई बार संसद और कानूनी समितियों में चर्चा हो चुकी है, लेकिन अभी तक इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.
जजों के रिटायरमेंट की उम्र के फर्क से कई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आती हैं. उदाहरण के तौर पर, एक काबिल और अनुभवी हाई कोर्ट के जज को 62 साल की उम्र में रिटायर होना पड़ता है, जबकि अगर वही जज सुप्रीम कोर्ट में नहीं चुने जाते है, तो उनकी सेवा का फायदा देश को और नहीं मिल पाता है.
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आज जब देश भर की अदालतों में लाखों केस लंबित हैं, तब ऐसे जजों की जरूरत और भी बढ़ जाती है, जो अनुभव से फैसले जल्दी और बेहतर तरीके से कर सकें. अगर हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र भी 65 साल कर दी जाए, तो इससे न्यायिक प्रणाली पर बोझ थोड़ा कम हो सकता है.
इस मुद्दे पर पहले भी कई बार विचार हो चुका है. 2010 में सरकार ने एक बिल (विधेयक) पेश किया था, जिसमें हाईकोर्ट के जजों की रिटायरमेंट उम्र 62 से बढ़ाकर 65 साल करने का प्रस्ताव था, लेकिन वह बिल संसद में पास नहीं हो सका. इसके बाद 2019 और 2021 में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई, लेकिन इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 15, 2025 12:47 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

