Republic Day 2026: भारत ने आज अपने 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक अभूतपूर्व दृश्य देखा. भारतीय सेना के रीमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (RVC) के एक विशेष पशु दस्ते ने पहली बार राष्ट्रीय परेड में हिस्सा लिया. "मूक योद्धाओं" के रूप में पहचाने जाने वाले इन जानवरों के दस्ते ने दुनिया को यह दिखाया कि आधुनिक तकनीक के दौर में भी देश की दुर्गम सीमाओं की रक्षा में पशुओं का योगदान कितना महत्वपूर्ण है. कैप्टन हर्षिता यादव के नेतृत्व में इस दल ने अपनी अनुशासित चाल से दर्शकों को हैरान कर दिया.
बैक्ट्रियन ऊंट और जांस्कर टट्टू: दुर्गम क्षेत्रों के साथी
परेड के अग्रभाग में लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान से आए दो कूबड़ वाले बैक्ट्रियन ऊंट नजर आए. हाल ही में सेना में शामिल किए गए ये ऊंट 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई और शून्य से नीचे के तापमान में 250 किलोग्राम तक वजन ढोने में सक्षम हैं. यह भी पढ़े: Republic Day 2026: कर्तव्य पथ पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की दहाड़, तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी ने दिखाया ‘विजय’ का दम; VIDEO
इनके साथ लद्दाख की ही दुर्लभ नस्ल के चार जांस्कर टट्टू भी चले. अपनी छोटी कद-काठी के बावजूद ये टट्टू सियाचिन जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रसद पहुंचाने और गश्त करने में सेना की रीढ़ माने जाते हैं. ये -40 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी 70 किलोमीटर तक की दूरी तय करने की क्षमता रखते हैं.
देखें ऐतिहासिक प्रदर्शन का वीडियो
#WATCH | From the high deserts and icy heights of Ladakh to the skies above the nation, India’s Republic Day celebrations honor the unsung heroes of the frontlines
The Bactrian Camels of Galwan and Nubra carry loads up to 200 kg at altitudes above 15,000 ft, providing vital… pic.twitter.com/lVBVw5U7jR
— DD News (@DDNewslive) January 26, 2026
आसमान के शिकारी और देशी नस्ल के श्वान
इस ऐतिहासिक दल में चार रैप्टर्स (शिकारी पक्षी) भी शामिल थे, जिन्हें सेना ने विशेष रूप से बर्ड-स्ट्राइक रोकने और संवेदनशील इलाकों में निगरानी के लिए प्रशिक्षित किया है.
सैन्य कुत्तों के दस्ते में 'आत्मनिर्भर भारत' की झलक दिखी. इस बार पारंपरिक नस्लों के साथ-साथ पांच स्वदेशी नस्लों—मुधोल हाउंड, रामपुर हाउंड, चिप्पीपराई, कोम्बाई और राजपालयम—के 10 कुत्तों ने मार्च किया. ये 'साइलेंट वॉरियर्स' आतंकवाद विरोधी अभियानों, बम निरोधक और खोज एवं बचाव कार्यों में माहिर हैं.
नवाचार और परंपरा का अद्भुत मेल
यह पहली बार है जब इतने विविध प्रकार के जानवरों को एक साथ एक संगठित दस्ते के रूप में प्रदर्शित किया गया. सेना के अधिकारियों के अनुसार, यह दस्ता न केवल हमारी परंपरा का प्रतीक है, बल्कि यह परिचालन नवाचार और सैन्य क्षमताओं में बढ़ती आत्मनिर्भरता को भी दर्शाता है. ये जानवर उन क्षेत्रों में सेना की ताकत बनते हैं जहाँ मशीनों की पहुंच सीमित हो जाती है.
जब यह पशु दस्ता सलामी मंच के सामने से गुजरा, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुख्य अतिथियों ने खड़े होकर इनका स्वागत किया. यह पल भारत के उन हजारों मूक नायकों को समर्पित रहा जो बर्फ की चोटियों और घने जंगलों में बिना किसी शिकायत के अपना फर्ज निभा रहे हैं.













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