2.3 लाख मौतें... 2004 सुनामी का खौफनाक मंजर, वो भयानक दिन जब समुद्र ने बरपाया था कहर

26 दिसंबर 2004 को हिंद महासागर में आई विनाशकारी सुनामी ने भारत समेत 14 देशों में भारी तबाही मचाई थी. इस आपदा में 2.3 लाख लोगों की जानें गईं और लाखों लोग बेघर हो गए, जिसका भारत के तटीय राज्यों पर गहरा असर पड़ा. इस त्रासदी के बाद, भारत ने भविष्य की आपदाओं से निपटने के लिए एक आधुनिक सुनामी चेतावनी प्रणाली (INCOIS) स्थापित की.

2004 Indian Ocean Tsunami: हाल ही में रूस के पास एक बड़े भूकंप के बाद प्रशांत महासागर में सुनामी की चेतावनी जारी की गई. इस घटना ने 2004 में आई हिंद महासागर की उस भयानक सुनामी की यादों को फिर से ताज़ा कर दिया है, जिसने दुनिया भर में तबाही मचाई थी. आइए, उस दर्दनाक दिन को याद करते हैं और जानते हैं कि उसके बाद क्या बदला.

2004 की हिंद महासागर सुनामी: एक भयानक सुबह

26 दिसंबर 2004 की सुबह थी. इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के पास समुद्र के नीचे 9.1 तीव्रता का एक ज़बरदस्त भूकंप आया. इस भूकंप ने सुनामी को जन्म दिया, जिसने कुछ ही घंटों में 14 देशों के तटीय इलाकों में भारी तबाही मचा दी.

इस आपदा में लगभग 2.3 लाख लोगों की जानें गईं और लाखों लोग बेघर हो गए. कई बस्तियाँ और शहर पूरी तरह से लहरों में समा गए.

भारत पर इसका क्या असर हुआ?

भारत उन देशों में से था, जहाँ सुनामी ने सबसे ज़्यादा कहर बरपाया. इसका सबसे बुरा असर पूर्वी तट पर, खासकर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पुडुचेरी और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पर पड़ा.

तमिलनाडु के नागपट्टिनम, कन्याकुमारी और कुड्डालोर जैसे मछली पकड़ने वाले कस्बों में हज़ारों लोगों की मौत हो गई. समुद्र की लहरें कई किलोमीटर अंदर तक आ गईं और लोगों के घर, परिवार और रोजी-रोटी, सब कुछ छीन लिया.

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में तो तबाही और भी भयानक थी. कई गाँव पूरी तरह से पानी में डूब गए और हज़ारों लोग लापता हो गए. यह इलाका दूर होने की वजह से राहत और बचाव कार्य में भी बहुत मुश्किलें आईं.

तबाही का केंद्र और लहरों का क़हर

भूकंप का केंद्र इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा के पास था, इसलिए सबसे ज़्यादा मौतें (लगभग 2 लाख) इंडोनेशिया में ही हुईं. सुनामी की लहरें कई जगहों पर 30 फीट (करीब 9 मीटर) तक ऊंची उठीं और तट से 6 किलोमीटर अंदर तक घुस गईं.

उस समय सुनामी की चेतावनी देने वाला कोई आधुनिक सिस्टम नहीं था, जिस वजह से लोगों को अपनी जान बचाने का मौका ही नहीं मिला. थाईलैंड और श्रीलंका जैसे देशों में छुट्टियाँ मना रहे हज़ारों विदेशी पर्यटक भी इस आपदा का शिकार हो गए.

कितना बड़ा था नुकसान?

इस सुनामी से हुआ नुकसान कल्पना से भी परे था. अकेले इंडोनेशिया में 1,39,000 घर, 3,400 स्कूल और 500 से ज़्यादा अस्पताल तबाह हो गए. सड़कें, बंदरगाह और हवाई अड्डे भी बर्बाद हो गए.

भारत में 10,000 से ज़्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि हज़ारों लोग लापता या घायल हुए. पूर्वी तट पर मछली पकड़ने वाले समुदायों की आजीविका पूरी तरह से खत्म हो गई.

आपदा के बाद भारत के सुधारात्मक कदम

इस भयानक तबाही के बाद, भारत ने आपदा प्रबंधन को लेकर कई बड़े और ज़रूरी कदम उठाए.

  1. चेतावनी प्रणाली की स्थापना: भारत ने हैदराबाद में इंडियन नेशनल सेंटर फॉर ओशन इंफॉर्मेशन सर्विसेज (INCOIS) की स्थापना की. यह सेंटर भूकंपीय गतिविधियों पर नज़र रखता है और सुनामी आने की स्थिति में तुरंत चेतावनी जारी करता है.
  2. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: भारत अब यूनेस्को द्वारा स्थापित हिंद महासागर सुनामी चेतावनी और शमन प्रणाली (IOTWMS) का हिस्सा है.
  3. सामुदायिक तैयारी: देश भर में "सुनामी रेडी" जैसे कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, ताकि तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को जागरूक किया जा सके और नियमित अभ्यास के ज़रिए उन्हें किसी भी आपदा के लिए तैयार रखा जा सके.

2004 की सुनामी एक ऐसी त्रासदी थी जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. इसने हमें सिखाया कि प्रकृति की शक्ति के आगे हम कितने असहाय हो सकते हैं, लेकिन साथ ही यह भी दिखाया कि कैसे एकजुट होकर हम बड़ी से बड़ी आपदा से उबर सकते हैं और भविष्य के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं.

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