RBI Repo Rate: आरबीआई की बैठक में बड़ा ऐलान, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; जानिए होम और ऑटो लोन EMI पर क्या पड़ेगा असर
विवरण भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद रेपो रेट पर हुए फैसले का आपकी होम और ऑटो लोन की EMI पर क्या असर पड़ेगा, जानिए इस विस्तृत खबर में.
RBI Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने अपनी नवीनतम समीक्षा बैठक में प्रमुख नीतिगत दर (रेपो रेट) को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई तीन दिवसीय बैठक के बाद यह घोषणा की गई. केंद्रीय बैंक के इस फैसले का सीधा प्रभाव उन लाखों ग्राहकों पर पड़ेगा, जिन्होंने विभिन्न बैंकों से होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन ले रखा है. रेपो रेट में कोई बदलाव न होने के कारण कर्जदारों की मासिक किस्त (EMI) में तत्काल कोई बदलाव देखने को नहीं मिलेगा.
क्या है रेपो रेट और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है जिस पर देश का केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण प्रदान करता है. यह दर भारतीय अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति और महंगाई को नियंत्रित करने का एक प्रमुख साधन है. यह भी पढ़े: Bank Holiday 2026 List: अगले साल 100 से ज्यादा दिनों तक बंद रहेंगे बैंक, RBI ने छुट्टियों का कैलेंडर किया जारी; देखें पूरी लिस्ट
जब रिजर्व बैंक रेपो रेट में कटौती करता है, तो बैंकों के लिए कर्ज लेना सस्ता हो जाता है, जिससे वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराते हैं. इसके विपरीत, रेपो रेट बढ़ने पर बैंकों की लागत बढ़ती है और लोन महंगे हो जाते हैं. वर्तमान में रेपो दर 5.25% पर स्थिर रखी गई है.
कर्जदारों और नए लोन ग्राहकों पर क्या होगा असर?
रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के फैसले से उन वर्तमान कर्जदारों को बड़ी राहत मिली है जो ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चिंता कर रहे थे.
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मौजूदा कर्जदार: फ्लोटिंग रेट वाले होम और ऑटो लोन की EMI में फिलहाल कोई बदलाव नहीं होगा.
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एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग रेट (EBLR): बैंकों द्वारा रेपो रेट से जुड़े ऋणों की ब्याज दरों में तत्काल कोई वृद्धि या कमी नहीं की जाएगी.
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नए कर्जदार: नए लोन लेने वाले आवेदकों को भी मौजूदा बाजार ब्याज दरों पर ही ऋण मिलेगा.
वैश्विक परिस्थितियां और आगे की राह
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, रिजर्व बैंक ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दबावों को ध्यान में रखते हुए अपना 'न्यूट्रल' (तटस्थ) रुख बनाए रखा है. केंद्रीय बैंक का मुख्य उद्देश्य देश की आर्थिक वृद्धि को गति देने के साथ-साथ महंगाई दर को लक्षित सीमा के भीतर बनाए रखना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में खुदरा मुद्रास्फीति नियंत्रित रहती है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है, तो भविष्य की नीतिगत समीक्षा बैठकों में दर कटौती की संभावना बन सकती है. फिलहाल, यह निर्णय अर्थव्यवस्था में वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए एक संतुलित कदम है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 11:34 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

