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Maharashtra Anganwadi Workers: आंगनवाड़ी कर्मचारियों की 6 अक्टूबर को राज्यव्यापी हड़ताल, आजाद मैदान में करेंगी आंदोलन; जानें उनकी मांगें

महाराष्ट्र में आंगनवाड़ी कर्मचारियों ने सरकारी कर्मचारी का दर्जा, वेतनमान, पेंशन और ग्रेच्युटी जैसी अपनी लंबित मांगों को लेकर 6 अक्टूबर को राज्यव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. मुंबई के आजाद मैदान में शक्ति प्रदर्शन के साथ 'जेल भरो' आंदोलन भी किया जाएगा.

Maharashtra Anganwadi Workers: आंगनवाड़ी कर्मचारियों की 6 अक्टूबर को राज्यव्यापी हड़ताल, आजाद मैदान में करेंगी आंदोलन; जानें उनकी मांगें
(Photo Credits WC)

Maharashtra Anganwadi Workers: महाराष्ट्र राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के आह्वान पर 6 अक्टूबर को राज्यभर की आंगनवाड़ी सेविकाएं और कर्मचारी एक दिवसीय राज्यव्यापी सांकेतिक हड़ताल पर जा रही हैं. मुंबई के आजाद मैदान में दोपहर 2 बजे आंगनवाड़ी कर्मचारी भारी संख्या में जुटकर अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगी और 'जेल भरो' आंदोलन को अंजाम देंगी. संगठन के सचिव राजेश सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि यह कदम कर्मचारियों को सरकारी दर्जे और अन्य लंबित मांगों को लेकर उठाया गया है.

क्या हैं आंगनवाड़ी कर्मचारियों की प्रमुख मांगें?

लंबे समय से आंगनवाड़ी कर्मचारी खुद को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग कर रही हैं. इसके साथ ही उनकी प्रमुख मांगों में वेतनमान (सैलरी स्केल), मासिक पेंशन और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ग्रेच्युटी का लाभ शामिल है. संगठन का कहना है कि इन मुद्दों पर मुख्यमंत्री के साथ कई बार बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन सेवानिवृत्त आंगनवाड़ी कर्मचारियों की पेंशन और ग्रेच्युटी को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं किया गया है.  यह भी पढ़े:  Bank Strike Update: आम लोगों को बड़ी राहत, देशव्यापी बैंक हड़ताल स्थगित, शाखाओं में पहले की तरह सामान्य रूप से होगा कामकाज

51 सालों से कर रहीं अथक सेवा

वर्तमान में महाराष्ट्र के अंदर समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत 1 लाख 10 हजार 664 आंगनवाड़ी केंद्रों में लगभग 2 लाख आंगनवाड़ी कर्मचारी कार्यरत हैं. ये कर्मचारी 6 महीने से लेकर 6 साल तक के बच्चों को पोषण आहार देने, अनौपचारिक शिक्षा प्रदान करने और गर्भवती व स्तनपान कराने वाली माताओं को स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का महत्वपूर्ण काम कर रही हैं. पिछले 51 वर्षों से ये कर्मचारी जमीनी स्तर पर लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा रही हैं.

अतिरिक्त कामों का बोझ, फिर भी न्याय नहीं

मूल काम के अलावा आंगनवाड़ी कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी, मातृवंदना योजना, लेक लाडकी योजना, लाडकी बहिन योजना, घरकुल योजना और दिव्यांग बच्चों के सर्वेक्षण जैसे कई अन्य काम भी सौंपे जाते हैं. हर दिन 8 से 10 घंटे काम करने के बावजूद सरकार उन्हें सरकारी कर्मचारी मानने को तैयार नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए संगठन ने मांग की है कि उन्हें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के समान वेतन और भत्ते दिए जाएं.

प्रोत्साहन भत्ते का नहीं हुआ भुगतान

संगठन ने सरकार पर आरोप लगाया है कि 4 अक्टूबर 2024 के सरकारी आदेश के बावजूद लगभग 40 प्रतिशत आंगनवाड़ी कर्मचारियों को उनके काम के स्वरूप के आधार पर मिलने वाले प्रोत्साहन भत्ते का भुगतान नहीं किया गया है. कर्मचारियों की मांग है कि इस प्रोत्साहन राशि को उनके मानदेय (Honorarium) में जोड़कर हर महीने नियमित रूप से दिया जाए.

अपनी इन्हीं मांगों की तरफ राज्य सरकार का ध्यान खींचने के लिए 6 अक्टूबर को राज्यभर में हड़ताल रखी गई है. संगठन के सचिव राजेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार को इन लंबित मांगों पर तत्काल फैसला लेना चाहिए, अन्यथा आजाद मैदान में यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 05, 2026 03:17 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).