RBI Monetary Policy: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, क्या अब होम लोन EMI में मिलेगी राहत? समझिए पूरा गणित
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है. इसके साथ ही फिक्स्ड रिवर्स रेपो रेट 3.35%, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00%, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50%, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) 3.00% और स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) 18.00% पर भी कोई बदलाव नहीं किया गया है.
RBI Monetary Policy: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी मौद्रिक नीति में रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है. इसके साथ ही फिक्स्ड रिवर्स रेपो रेट 3.35%, स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5.00%, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट 5.50%, कैश रिजर्व रेशियो (CRR) 3.00% और स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR) 18.00% पर भी कोई बदलाव नहीं किया गया है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसका होम लोन लेने वालों की EMI पर क्या असर पड़ेगा. RBI Repo Rate: आरबीआई की बैठक में बड़ा ऐलान, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार; जानिए होम और ऑटो लोन EMI पर क्या पड़ेगा असर
क्या होती है रेपो रेट?
रेपो रेट वह ब्याज दर होती है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक अवधि के लिए कर्ज देता है. जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिसका असर होम लोन, कार लोन और अन्य लोन की ब्याज दरों पर पड़ सकता है. वहीं रेपो रेट घटने पर बैंकों के लिए फंड सस्ता होता है और लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं.
होम लोन EMI पर क्या होगा असर?
इस बार RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका मतलब है कि जिन लोगों का फ्लोटिंग रेट होम लोन रेपो रेट से जुड़ा हुआ है, उनकी EMI में फिलहाल कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है. वहीं जिन लोगों का फिक्स्ड रेट होम लोन है, उनकी EMI पहले की तरह ही जारी रहेगी. हालांकि, अंतिम फैसला संबंधित बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी का होता है. यदि बैंक अपनी आंतरिक फंडिंग लागत या अन्य कारणों से ब्याज दरों में बदलाव करता है, तो EMI पर असर पड़ सकता है.
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है और आपकी ब्याज दर 8.25% है. अगर RBI रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करता और आपका बैंक भी ब्याज दर नहीं बढ़ाता या घटाता है, तो आपकी EMI पहले की तरह ही रहेगी.
लेकिन यदि भविष्य में RBI रेपो रेट 0.25% घटाता है और बैंक इसका पूरा फायदा ग्राहकों को देता है, तो आपकी ब्याज दर 8.25% से घटकर 8.00% हो सकती है. ऐसे में आपकी मासिक EMI लगभग ₹25,568 से घटकर ₹25,093 हो जाएगी. यानी हर महीने करीब ₹475 की बचत होगी.
वहीं अगर रेपो रेट 0.25% बढ़ता है और बैंक ब्याज दर बढ़ा देता है, तो आपकी EMI बढ़ सकती है या फिर कुछ मामलों में लोन की अवधि (Tenure) बढ़ाई जा सकती है.
(ध्यान दें: यह केवल एक उदाहरण है. वास्तविक EMI आपके लोन की राशि, ब्याज दर, अवधि और बैंक की नीति पर निर्भर करेगी.)
रिवर्स रेपो रेट का क्या मतलब है?
फिक्स्ड रिवर्स रेपो रेट 3.35% वह दर है, जिस पर बैंक अपनी अतिरिक्त नकदी RBI के पास जमा कर सकते हैं. यह दर मुख्य रूप से बैंकिंग सिस्टम में नकदी (Liquidity) के प्रबंधन के लिए होती है. इसका होम लोन EMI पर सीधा असर नहीं पड़ता. आमतौर पर होम लोन की ब्याज दरें रेपो रेट और बैंकों की लेंडिंग पॉलिसी से अधिक प्रभावित होती हैं.
RBI की प्रमुख ब्याज दरें
रेपो रेट: 5.25%
फिक्स्ड रिवर्स रेपो रेट: 3.35%
स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00%
मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50%
कैश रिजर्व रेशियो (CRR): 3.00%
स्टैच्यूटरी लिक्विडिटी रेशियो (SLR): 18.00%
किसे मिलेगी राहत?
रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से मौजूदा होम लोन ग्राहकों को EMI बढ़ने की चिंता नहीं होगी. वहीं नए होम लोन लेने वाले ग्राहकों को भी फिलहाल मौजूदा ब्याज दरों पर ही लोन मिलने की संभावना है, जब तक बैंक अपनी ओर से कोई बदलाव नहीं करते.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 05, 2026 11:49 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

