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Mysore Dasara 2026: मैसूरु में 21 अक्टूबर को भव्य जम्बू सवारी, जानें मैसूरु दशहरा की तारीख, शाही इतिहास और विजयदशमी का खास आयोजन

कर्नाटक का सबसे बड़ा सांस्कृतिक और राजकीय उत्सव 'मैसूर दशहरा' वर्ष 2026 में 11 दिनों तक धूमधाम से मनाया जाएगा. शरद नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि भव्य विजयादशमी और प्रसिद्ध 'जम्बू सवारी' का आयोजन 21 अक्टूबर को किया जाएगा

Mysore Dasara 2026: मैसूरु में 21 अक्टूबर को भव्य जम्बू सवारी, जानें मैसूरु दशहरा की तारीख, शाही इतिहास और विजयदशमी का खास आयोजन
Mysore Dasara

 Mysore Dasara 2026: कर्नाटक की सांस्कृतिक राजधानी मैसूरु अपने सबसे बड़े राज्योत्सव 'मैसूर दशहरा' (नाडहब्बा) के लिए पूरी तरह तैयार है. वर्ष 2026 में यह भव्य उत्सव 11 दिनों तक चलेगा, जिसकी शुरुआत 11 अक्टूबर (रविवार) को शरद नवरात्रि के साथ होगी. इस उत्सव का सबसे मुख्य और भव्य आकर्षण 21 अक्टूबर (बुधवार) को विजयादशमी के अवसर पर आयोजित होने वाली ऐतिहासिक 'जम्बू सवारी' (हाथियों का जुलूस) होगी. इस अवसर पर पूरे कर्नाटक में सार्वजनिक अवकाश घोषित रहेगा.   यह भी पढ़े:   Happy Diwali & Prosperous New Year Wishes: दिवाली और मंगलमय नव वर्ष की दें बधाई, इन शुभकामना संदेशों के जरिए मनाएं यह पर्व

मैसूर दशहरा 2026: मुख्य तिथियां और समय सारणी

मैसूर दशहरा के दौरान अनुष्ठानों और सार्वजनिक आयोजनों का समय निम्नलिखित है:

  • 11 अक्टूबर 2026 (रविवार): शरद नवरात्रि की शुरुआत और चामुंडी पहाड़ियों पर पूजा-अर्चना.

  • 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार): महानवमी और 'आयुध पूजा' का विशेष आयोजन.

  • 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार): विजयादशमी उत्सव.

  • 21 अक्टूबर 2026 (बुधवार): प्रसिद्ध 'जम्बू सवारी' (हाथी जुलूस) और बन्नीमंतप में मशाल परेड (टार्चलाइट परेड).

14वीं शताब्दी से जुड़ा है शाही इतिहास

मैसूर दशहरा की परंपरा ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है. मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा के अवतार माँ चामुंडेश्वरी ने चामुंडी पहाड़ियों पर असुर महिषासुर का वध किया था. इसी विजय के प्रतीक के रूप में यह पर्व मनाया जाता है.

ऐतिहासिक रूप से इस उत्सव की शुरुआत 14वीं-15वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासकों द्वारा की गई थी. विजयनगर के पतन के बाद, मैसूर के वोडेयार राजवंश ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया. राजा वोडेयार प्रथम ने 1610 ईस्वी में श्रीरंगपटनम में शाही दशहरा उत्सव की शुरुआत की थी. वर्ष 1805 में कृष्णराज वोडेयार तृतीय ने मैसूर पैलेस में 'खास दरबार' (शाही सभा) लगाने की शुरुआत की, जिसे आज भी वोडेयार राजवंश के यदुवीर कृष्णदत्त चामराजा वोडेयार द्वारा निजी तौर पर निभाया जाता है.

जम्बू सवारी और मैसूर पैलेस की जगमगाहट

मैसूर दशहरा अपने आकर्षक आयोजनों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है:

  • मैसूर पैलेस की रोशनी: उत्सव के 11 दिनों तक ऐतिहासिक मैसूर पैलेस को रोजाना शाम 7 बजे से रात 10 बजे तक लगभग 1,00,000 बल्बों की रोशनी से जगमगाया जाता है.

  • जम्बू सवारी (21 अक्टूबर): विजयादशमी के दिन मैसूर पैलेस से बन्नीमंतप तक एक विशाल जुलूस निकाला जाता है. इसमें 750 किलोग्राम के सोने के हौदे (हाथी की पीठ पर रखी जाने वाली सीट) में देवी चामुंडेश्वरी की मूर्ति विराजमान होती है. सुसज्जित हाथी, सांस्कृतिक झांकियां, लोक कलाकार और सैन्य बैंड इस जुलूस की शोभा बढ़ाते हैं.

  • मशाल परेड (Panjina Kavayatthu): 21 अक्टूबर की शाम बन्नीमंतप मैदान में घुड़सवारी के करतब, कलाबाज़ियों और आतिशबाजी के साथ मशाल परेड का आयोजन किया जाता है, जिसके साथ उत्सव का समापन होता है.

  • दशहरा प्रदर्शनी: Doddakere Maidan में आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में हस्तशिल्प स्टॉल, सांस्कृतिक प्रदर्शनियों और मनोरंजन के इंतजाम होते हैं.

कर्नाटक के अन्य हिस्सों में उत्सव का रं

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 05, 2026 05:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).