EPFO Retains 8.25% Interest Rate: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश के संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को राहत देते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भविष्य निधि (PF) जमा पर 8.25 प्रतिशत की ब्याज दर को बरकरार रखने का फैसला किया है. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय न्यासी बोर्ड (CBT) की 239वीं बैठक में इस दर को मंजूरी दी गई, जिसे बाद में वित्त मंत्रालय ने भी अपनी अंतिम स्वीकृति दे दी है. श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद, मासिक रनिंग बैलेंस के आधार पर कैलकुलेट किया गया यह ब्याज इसी महीने (जून 2026) ग्राहकों के खातों में क्रेडिट कर दिया जाएगा. यह लगातार तीसरा साल है जब ईपीएफओ ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करते हुए इसे स्थिर रखा है.
क्यों खास है 8.25% की यह ब्याज दर?
सैलरी पाने वाले देश के लाखों कर्मचारियों के लिए ईपीएफ (EPF) रिटायरमेंट के बाद की सुरक्षा का एक सबसे बड़ा और सरकारी गारंटी वाला जरिया है. मौजूदा आर्थिक परिवेश में जहां निश्चित आय वाले कई अन्य निवेश साधनों (Fixed Income Instruments) की ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, वहीं पीएफ पर 8.25 प्रतिशत का रिटर्न बेहद आकर्षक माना जा रहा है. देश में उपलब्ध इसी तरह के अन्य डेट-स्टाइल (ऋण-आधारित) बचत विकल्पों की तुलना में यह सबसे अधिक गारंटीड रिटर्न देने वाली योजनाओं में से एक है. यह भी पढ़े: EPFO 3.0 Withdrawal Rules: अब यूपीआई और एटीएम से सीधे निकाल सकेंगे पीएफ का पैसा, बदल गए निकासी के नियम
अन्य छोटी बचत योजनाओं के मुकाबले मजबूत स्थिति
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पीएफ पर मिलने वाला यह रिटर्न अन्य स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की तुलना में काफी बेहतर है. वर्तमान में पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) पर जहां 7.1 प्रतिशत की ब्याज दर मिल रही है, वहीं वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) पर यह दर 8.2 प्रतिशत है. इसके अलावा, पीएफ खाते में नियोक्ता (Employer) द्वारा दिया जाने वाला मैचिंग कॉन्ट्रीब्यूशन इसके वास्तविक रिटर्न को और अधिक बढ़ा देता है.
पुराना रिकॉर्ड और वित्तीय संतुलन की चुनौती
ईपीएफओ के ब्याज दरों का इतिहास देखें तो यह 1990 के दशक में 12 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर भी रहा है. हालांकि, साल 1977-78 के बाद से यह लगातार 8 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है. कोरोना काल के बाद वित्त वर्ष 2021-22 में यह दर घटकर चार दशक के निचले स्तर यानी 8.10 प्रतिशत पर आ गई थी, लेकिन बाद में इसमें सुधार हुआ और पिछले तीन सालों से यह 8.25 प्रतिशत पर बनी हुई है.
आयोग के लिए इस आकर्षक दर को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती भी रहा है. चालू वित्त वर्ष (FY26) की बैठक के दौरान यह बात सामने आई है कि इस दर पर ब्याज भुगतान करने से ईपीएफओ को करीब 944.06 करोड़ रुपये के संभावित घाटे का सामना करना पड़ सकता है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में संगठन के पास 5,480.34 करोड़ रुपये का सरप्लस (अधिशेष) फंड मौजूद था.
'EPFO 3.0' और यूपीआई से निकासी की तैयारी
आने वाले दिनों में ईपीएफओ अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह बदलने जा रहा है. संगठन जल्द ही 'EPFO 3.0' प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की तैयारी में है. इस नए और अपग्रेडेड सिस्टम के आने के बाद पीएफ खाताधारक यूपीआई (UPI) के जरिए भी अपने खाते से पैसे निकाल सकेंगे, जिससे निकासी की प्रक्रिया बेहद तेज और आसान हो जाएगी.
इसके साथ ही, सीबीटी ने छूट प्राप्त प्रतिष्ठानों (Exempted Establishments) के अनुपालन संबंधी मुद्दों को सुलझाने के लिए एकमुश्त माफी योजना (Amnesty Scheme) को भी मंजूरी दी है, ताकि अधिक से अधिक कंपनियों और कर्मचारियों को ईपीएफ अधिनियम, 1952 के सुरक्षा दायरे में लाया जा सके.












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