राजस्थान में 'डिस्टर्ब एरिया एक्ट' को मंजूरी, संवेदनशील इलाकों में प्रॉपर्टी बेचना-खरीदना होगा मुश्किल, जानें क्या है यह नया कानून

राजस्थान की भाजपा सरकार ने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और "जनसांख्यिकीय असंतुलन" को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'राजस्थान अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध और अशांत क्षेत्रों में बेदखली से संरक्षण विधेयक, 2026' के मसौदे को मंजूरी दे दी गई.

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Rajasthan Disturbed Area Act: राजस्थान की भाजपा सरकार ने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और "जनसांख्यिकीय असंतुलन" को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'राजस्थान अचल संपत्ति हस्तांतरण निषेध और अशांत क्षेत्रों में बेदखली से संरक्षण विधेयक, 2026' के मसौदे को मंजूरी दे दी गई. यह प्रस्तावित कानून पड़ोसी राज्य गुजरात के 'डिस्टर्ब एरिया एक्ट' (अशांत क्षेत्र अधिनियम) की तर्ज पर तैयार किया गया है.

क्या है नया कानून और किन इलाकों पर होगा लागू?

इस विधेयक के तहत सरकार उन क्षेत्रों को 'अशांत क्षेत्र' (Disturbed Areas) घोषित कर सकेगी जहां सांप्रदायिक तनाव का इतिहास रहा है या जहां आबादी के ढांचे में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है. यह भी पढ़े :  Rajasthan Cabinet Decisions: राजस्थान मंत्रिमंडल का अहम फैसला, इन लोगों को मिलेगी सरकारी नौकरी

सरकार का तर्क: 'डिस्ट्रैस सेल' पर लगेगी रोक

संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कैबिनेट ब्रीफिंग में बताया कि दंगों या भीड़भाड़ वाली हिंसा के दौरान अक्सर लोग डर के मारे अपनी संपत्ति को औने-पौने दामों (Throwaway Prices) पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं. उन्होंने कहा, "यह बिल लोगों को जबरन या दबाव में की जाने वाली बिक्री से बचाएगा. इससे पुराने निवासियों का पलायन रुकेगा और सामाजिक ताना-बाना बना रहेगा."

जयपुर का पुराना शहर (परकोटा), जो अपनी मिश्रित आबादी और संवेदनशील इतिहास के लिए जाना जाता है, इस कानून के तहत अधिसूचित होने वाला पहला क्षेत्र हो सकता है.

विपक्ष का विरोध: "ध्रुवीकरण की राजनीति"

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस विधेयक को असंवैधानिक बताते हुए इसकी तीखी आलोचना की है. राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि भाजपा "गुजरात मॉडल" के जरिए समाज में विभाजन पैदा करना चाहती है. उन्होंने तर्क दिया कि 'जनसांख्यिकीय असंतुलन' जैसा कोई कानूनी शब्द नहीं है और यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार का उल्लंघन करता है. विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि इस कानून से रियल एस्टेट बाजार और निवेश पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

पृष्ठभूमि और आगामी प्रक्रिया

गुजरात में यह कानून 1991 से लागू है और वहां समय-समय पर इसमें संशोधन कर इसे और सख्त बनाया गया है. राजस्थान सरकार अब इस विधेयक को 28 जनवरी से शुरू हो रहे विधानसभा के आगामी बजट सत्र में पेश करेगी. यदि यह पारित हो जाता है, तो राजस्थान गुजरात के बाद ऐसा कानून बनाने वाला देश का दूसरा राज्य होगा.

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