Prayagraj Shocker: घरवालों के बाल नोंच-नोंचकर खाती थी लड़की, पेट में बन गया 'बालों का पहाड़'; प्रयागराज के डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान
Representative Image Created Using AI

Prayagraj Trichobezoar Treatment: प्रयागराज में डॉक्टरों ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने सबको हैरान कर दिया. news18.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कौशांबी की 21 साल की मंजू को बचपन से बाल खाने की अजीब लत लग गई थी. वो अपने ही नहीं, अपनी मां और बहनों के बाल नोचकर खा जाती थी. धीरे-धीरे ये बाल उसके पेट में इकट्ठा होते गए और एक भारी गांठ का रूप ले लिया. शुरुआत में मंजू को हल्का पेट दर्द, उल्टी और कमजोरी जैसी परेशानियां होने लगीं. भूख खत्म हो गई थी और वजन भी तेजी से घटने लगा था.

परिवार वाले उसे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल लेकर गए, लेकिन कोई सही इलाज नहीं मिल सका. कई जांचें कराईं गईं, पर बीमारी पकड़ में नहीं आई और न ही कोई डॉक्टर ऑपरेशन करने को तैयार हुआ.

ये भी पढें: Prayagraj Rain: प्रयागराज के कई इलाकों में भारी बारिश, जलभराव से बढ़ी लोगों की समस्या; मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

पेट से आधा किलो का ट्यूमर निकला

आखिरकार प्रयागराज के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर्स ने युवती की हालत को समझते हुए तत्काल सर्जरी का फैसला लिया. सर्जरी आसान नहीं थी, क्योंकि युवती के पेट में जो बाल जमा हो गए थे, वो अब एक गांठ यानी ट्यूमर जैसा बन चुका था, जिसे मेडिकल भाषा में ट्राइकोबेजोअर (Trichobezoar) कहा जाता है. डॉक्टरों ने पेट की सर्जरी कर उस गांठ को बाहर निकाला, जो करीब आधा किलो वजन की थी. उसका आकार लगभग 1.5 फीट लंबा और 10 सेंटीमीटर चौड़ा था.

2 घंटे के जटिल ऑपरेशन के बाद बची जान

पूरे ऑपरेशन में करीब दो घंटे लगे. खाने की थैली को सावधानीपूर्वक खोला गया, बाल की गांठ निकाली गई और फिर आंतों की सफाई कर सब कुछ दोबारा सही तरीके से जोड़ दिया गया. सर्जरी पूरी तरह सफल रही और मंजू अब बिल्कुल ठीक है, सामान्य खाना खा रही है और मानसिक स्थिति भी स्थिर है.

बच्चों के बदले व्यवहार को न करें नजरअंदाज

डॉक्टर्स का कहना है कि यह केस बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन समय पर इलाज होने से जान बचा ली गई. इस घटना से हमें यह सीख मिलती है कि अगर बच्चों या किसी भी उम्र के व्यक्ति में मानसिक या व्यवहारिक बदलाव दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें. समय पर इलाज ही जीवन बचा सकता है.