तेज प्रताप का नया दांव: महुआ से अकेले लड़ेंगे चुनाव? RJD को नुकसान या NDA को फायदा? समझिए पूरा खेल

लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है. उन्होंने ऐलान कर दिया है कि वो वैशाली जिले की महुआ सीट से चुनाव लड़ेंगे, लेकिन अपनी पुरानी पार्टी RJD से नहीं, बल्कि अकेले यानी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर. इस ऐलान के साथ ही उन्होंने RJD की पहचान वाली हरी टोपी उतारकर अपनी नई 'टीम तेज प्रताप' (TTP) की पीली टोपी पहन ली है.

यह खबर इसलिए बड़ी है क्योंकि महुआ सीट पर अभी RJD के ही विधायक मुकेश रौशन हैं. अब तेज प्रताप के मैदान में उतरने से RJD की टेंशन बढ़ गई है और बिहार की राजनीति में कई सवाल खड़े हो गए हैं. आइए इस पूरे सियासी समीकरण को समझते हैं.

ये सब हो क्यों रहा है?

सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि तेज प्रताप अब RJD का हिस्सा नहीं हैं. कुछ समय पहले, उनके पिता लालू प्रसाद यादव ने खुद उन्हें 'गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार' के कारण पार्टी और परिवार से 6 साल के लिए निकाल दिया था. इसके बावजूद तेज प्रताप का महुआ से पुराना नाता रहा है. वो 2015 में इसी सीट से विधायक और मंत्री भी रह चुके हैं. इसी पुराने रिश्ते का हवाला देकर वो महुआ पर अपना हक जता रहे हैं.

वोटों का गणित: RJD का वोट बंटा तो NDA को फायदा

असली खेल यहीं से शुरू होता है. राजनीति में चुनाव जीतना वोटों का गणित होता है.

  • RJD का कोर वोट: RJD की सबसे बड़ी ताकत उसका 'मुस्लिम-यादव' (M-Y) वोट बैंक है. सालों से यह वोट बैंक लालू यादव के साथ मजबूती से खड़ा रहा है.
  • तेज प्रताप का असर: तेज प्रताप, लालू के बेटे और यादव समाज से होने के नाते इसी वोट बैंक में सेंध लगाएंगे. हो सकता है कि कई युवा और उनके समर्थक उन्हें ही वोट दें.
  • फायदा किसका?: मान लीजिए कि RJD के उम्मीदवार को 100 में से 60 वोट मिलते हैं और NDA उम्मीदवार को 40. तो RJD जीत जाएगी. लेकिन अगर तेज प्रताप मैदान में उतरकर RJD के 60 में से 25 वोट भी ले जाते हैं, तो RJD के पास बचेंगे सिर्फ 35 वोट. ऐसे में 40 वोट वाला NDA उम्मीदवार आसानी से जीत जाएगा.

सीधी सी बात है कि तेज प्रताप भले ही खुद न जीतें, लेकिन वो RJD के वोट काटकर अपनी ही पुरानी पार्टी को हराने का काम कर सकते हैं. इसका सीधा फायदा BJP और NDA गठबंधन को होगा.

RJD के लिए अब क्या चुनौती है?

तेज प्रताप के इस कदम से RJD और तेजस्वी यादव के सामने कई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं.

  1. वोटों का बंटवारा: सबसे बड़ी चुनौती महुआ सीट पर अपने ही वोटों को बिखरने से रोकना है.
  2. तेजस्वी के नेतृत्व पर सवाल: यह तेजस्वी यादव के नेतृत्व के लिए भी एक परीक्षा की तरह है. क्या वो अपने भाई के इस चैलेंज से निपट पाएंगे?
  3. गलत संदेश जाने का डर: विपक्ष इसे RJD के अंदर की फूट और परिवार के झगड़े के तौर पर पेश करेगा, जिससे पार्टी की छवि को नुकसान हो सकता है.

RJD अब पूरी कोशिश करेगी कि वो सामाजिक न्याय और तेजस्वी यादव की युवा छवि को आगे रखकर इस नुकसान की भरपाई करे. लेकिन यह तो तय है कि महुआ सीट पर अब मुकाबला बेहद दिलचस्प और RJD के लिए पहले से कहीं ज़्यादा मुश्किल हो गया है.

कुल मिलाकर, तेज प्रताप का पीली टोपी पहनकर महुआ से चुनाव लड़ना सिर्फ एक सीट का मामला नहीं है, बल्कि यह RJD के अंदरूनी समीकरण, तेजस्वी के नेतृत्व और बिहार की पूरी राजनीति पर असर डाल सकता है.