पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता आरिफ जिलानी ने बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार के खिलाफ एक पोस्टर जारी कर नया विवाद खड़ा कर दिया है. इस पोस्टर में नीतीश कुमार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वर्दी में दिखाया गया है. यह पोस्टर पटना में आरजेडी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास के सामने लगाया गया है.
वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर तंज
यह पोस्टर आरिफ जिलानी ने वक्फ संशोधन विधेयक पर नीतीश कुमार के रुख की आलोचना करते हुए जारी किया है. बताया जा रहा है कि जिलानी इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की चुप्पी और उनके स्टैंड से नाराज हैं. उन्होंने इस पोस्टर के जरिए नीतीश कुमार पर कटाक्ष करते हुए उन्हें संघ से जुड़ा हुआ दिखाने की कोशिश की है.
राजनीतिक माहौल गरमाया
इस पोस्टर के सामने आने के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. जेडीयू नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है, वहीं आरजेडी खेमे में भी इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी जा रही है. आरिफ जिलानी ने यह पोस्टर ऐसे समय में लगाया है जब बिहार में गठबंधन की राजनीति पहले से ही अस्थिर है और आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर सभी दलों में सियासी घमासान जारी है.
#WATCH | Patna | RJD leader Arif Jilani puts up a poster criticising Bihar CM & JD(U) leader Nitish Kumar over his stand on the Waqf Amendment Bill
The poster has been put opposite the residence of RJD leader & former CM Rabri Devi. pic.twitter.com/GZUrXnX9RE
— ANI (@ANI) April 4, 2025
पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद
यह पहला मौका नहीं है जब बिहार की राजनीति में इस तरह के पोस्टर वॉर देखने को मिले हैं. इससे पहले भी कई बार राजनीतिक दलों ने एक-दूसरे पर तंज कसने के लिए पोस्टरों का सहारा लिया है. पटना की दीवारें अक्सर ऐसे राजनीतिक पोस्टरों से भरी रहती हैं, जो नेताओं की नीतियों और उनके फैसलों पर सवाल उठाते हैं.
नीतीश कुमार की प्रतिक्रिया का इंतजार
अब देखना यह होगा कि इस पोस्टर विवाद पर खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या प्रतिक्रिया देते हैं. क्या वह इस पर कोई बयान देंगे या इसे नजरअंदाज करेंगे? वहीं, आरजेडी नेतृत्व भी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए है कि यह जिलानी का व्यक्तिगत कदम है या पार्टी की ओर से एक संकेत.
बिहार की राजनीति में पोस्टर वॉर कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार यह मुद्दा वक्फ संशोधन विधेयक से जुड़ा हुआ है, जिससे राज्य के अल्पसंख्यक समुदाय में नाराजगी देखने को मिल सकती है.













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