Mysuru Dasara Controversy: जेडीएस ने बीजेपी से अलग रुख अपनाया, Banu Mushtaq के आमंत्रण पर 'नो ऑब्जेक्शन'

मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए कर्नाटक सरकार ने बुकर पुरस्कार विजेता लेखिका बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया है. इस फैसले पर बीजेपी और उसके सहयोगी जेडीएस के बीच मतभेद सामने आया है. जहाँ बीजेपी ने इस आमंत्रण का विरोध किया है, वहीं जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने इसका समर्थन किया है, जिससे दोनों सहयोगियों के बीच अलग-अलग रुख साफ हो गया है.

कर्नाटक सरकार ने मैसूर दशहरा उत्सव में बानू मुश्ताक को आमंत्रित किया है. (Photo Credits : X)

Mysuru Dasara 2025: मैसूर दशहरा उत्सव का उद्घाटन करने के लिए कर्नाटक सरकार ने जानी-मानी लेखिका बानू मुश्ताक (Banu Mushtaq) को आमंत्रित किया है. इस फैसले पर बीजेपी और उसके सहयोगी दल जनता दल (सेक्युलर) के बीच मतभेद सामने आया है. जहाँ एक ओर बीजेपी ने इस आमंत्रण का विरोध किया है, वहीं दूसरी ओर जेडीएस ने इसका समर्थन किया है.

केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी (JD(S) leader HD Kumaraswamy) ने साफ कहा कि उन्हें इस आमंत्रण पर कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बानू मुश्ताक को देवी चामुंडेश्वरी की शोभायात्रा की अगुवाई करने की बड़ी ज़िम्मेदारी दी है, और वह इस कदम का समर्थन करते हैं.

कुमारस्वामी का यह बयान बीजेपी के विरोध से बिलकुल अलग है. मैसूर के बीजेपी सांसद यदुवीर वाडियार ने बानू मुश्ताक की कन्नड़ भाषा, राज्य के झंडे और देवी चामुंडेश्वरी पर की गई पुरानी टिप्पणियों पर सवाल उठाए थे.

एक अन्य केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इस फैसले को "हिंदू भावनाओं का अपमान" बताया. उन्होंने X पर एक पोस्ट में लिखा कि मैसूर दशहरा देवी चामुंडेश्वरी का एक पवित्र त्यौहार है, जो आस्था और परंपरा से जुड़ा है, न कि कोई "सांस्कृतिक शो". उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा, "जिस व्यक्ति की हमारी देवी में आस्था नहीं है, उसे पहली पूजा करने के लिए कहना देवी और हर भक्त का सीधा अपमान है."

पूर्व मैसूर सांसद और बीजेपी नेता प्रताप सिम्हा ने भी आपत्ति जताई. उन्होंने साफ किया कि उनका विरोध बानू मुश्ताक के मुसलमान होने को लेकर नहीं है, और उन्होंने साहित्य में उनके योगदान को सराहा. लेकिन उन्होंने उनके धार्मिक जुड़ाव पर सवाल उठाए, "क्या बानू मुश्ताक देवी चामुंडी में विश्वास रखती हैं? क्या उन्होंने कभी हमारी परंपराओं का पालन किया है? यह कोई सरकारी कार्यक्रम नहीं है, यह देवी में अटूट आस्था व्यक्त करने की एक परंपरा है. क्या वह इस काम के लिए सही व्यक्ति हैं?"

दूसरी ओर, कांग्रेस सरकार अपने फैसले पर कायम है. सरकार का कहना है कि दशहरा एक सांस्कृतिक उत्सव है और इसे जाति या धर्म के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.

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