PM-CM हों या मंत्री, अब 30 दिन जेल में रहे तो पद से देना होगा इस्तीफा, सरकार ला रही है नया कानून

केंद्र सरकार एक नया कानून ला रही है, जिसके तहत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री समेत किसी भी मंत्री को 30 दिन से ज़्यादा जेल में रहने पर पद छोड़ना होगा. यह बिल गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी नेताओं पर नकेल कसने और राजनीति में जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से संसद में पेश किया जा रहा है. इस नियम के लागू होने के बाद, 31वें दिन मंत्री का पद स्वतः समाप्त हो जाएगा.

(Photo Credits: X)

आज संसद से एक बड़ी खबर आ रही है. केंद्र सरकार एक ऐसा नियम लाने जा रही है, जिसके बाद अगर कोई बड़ा नेता - चाहे वो प्रधानमंत्री हों, मुख्यमंत्री हों या कोई और मंत्री - किसी गंभीर आपराधिक मामले में 30 दिन से ज़्यादा जेल में रहता है, तो उसे अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी.

अब तक ऐसा कोई नियम क्यों नहीं था?

आप सोच रहे होंगे कि ऐसा पहले क्यों नहीं था? दरअसल, अभी हमारे देश के कानून में एक बहुत बड़ी कमी है. मौजूदा नियमों के हिसाब से, अगर किसी PM, CM या मंत्री को गिरफ्तार कर लिया जाता है या वो न्यायिक हिरासत में जेल चले जाते हैं, तो उन्हें पद से हटाने का कोई साफ़ प्रावधान नहीं है. इसी कानूनी खामी को दूर करने के लिए सरकार यह बड़ा कदम उठा रही है.

सरकार क्या कर रही है?

केंद्र सरकार आज लोकसभा में तीन नए बिल (विधेयक) पेश करेगी. इन बिलों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगर कोई नेता गंभीर आपराधिक मामले में पकड़ा जाता है और जेल जाता है, तो वह अपने पद पर बना न रह सके.

इन बिलों में शामिल हैं:

  1. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025
  2. संविधान (एक सौ तीसवां संशोधन) विधेयक, 2025
  3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025

क्या है नया नियम?

नए कानून का नियम बहुत सीधा और सरल है:

उदाहरण के लिए, जम्मू-कश्मीर के लिए बनाए जा रहे नियम के अनुसार, अगर कोई मंत्री 30 दिन तक हिरासत में रहता है, तो 31वें दिन उपराज्यपाल उसे मुख्यमंत्री की सलाह पर हटा देंगे. और अगर मुख्यमंत्री सलाह नहीं देते हैं, तो अगले दिन वह मंत्री खुद ही पद से हट जाएगा. ऐसा ही सिस्टम केंद्र और बाकी राज्यों के लिए भी बनाया जा रहा है.

इस कानून की ज़रूरत क्यों पड़ी?

सरकार का मानना है कि यह बदलाव बहुत ज़रूरी है ताकि चुने हुए नेताओं में जनता का विश्वास बना रहे. सरकार का कहना है कि:

कुल मिलाकर, यह कानून राजनीति में जवाबदेही और शुचिता लाने की एक बड़ी कोशिश है. अब देखना यह होगा कि संसद में इस बिल पर आगे क्या होता है.

Share Now

\