Assembly By Election Results 2026: भारत के पांच राज्यों—गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नगालैंड और त्रिपुरा की सात विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों के लिए आज, 4 मई 2026 को मतगणना शुरू हो गई है. इन सीटों पर मतदान 9 अप्रैल और 23 अप्रैल को हुआ था. मौजूदा विधायकों के निधन के कारण रिक्त हुई इन सीटों पर आए चुनाव परिणाम क्षेत्रीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.
महाराष्ट्र: बारामती सीट पर सबकी नजर
महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट इस उपचुनाव का सबसे चर्चित केंद्र बनी हुई है. उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के असामयिक निधन के बाद यह सीट रिक्त हुई थी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने यहां से उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा है. पवार परिवार का गढ़ माने जाने वाली इस सीट पर जीत सुनिश्चित करना सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन गया है.
कर्नाटक और गुजरात में कड़ा मुकाबला
कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे दक्षिण सीटों पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला देखा जा रहा है. ये सीटें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं एच.वाई. मेटी और शामनूर शिवशंकरप्पा के निधन के बाद खाली हुई थीं. भाजपा ने इन सीटों पर नए चेहरों को उतारकर कांग्रेस के दुर्ग में सेंध लगाने की कोशिश की है.
वहीं गुजरात की उमरेठ सीट (आणंद जिला) पर भाजपा ने दिवंगत विधायक गोविंद परमार के बेटे हर्षद परमार को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने उनके मुकाबले भृगुराजसिंह चौहान को उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.
त्रिपुरा और नगालैंड के समीकरण
त्रिपुरा की धर्मनगर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है. विधानसभा अध्यक्ष बिस्वा बंधु सेन के निधन के बाद यहां भाजपा, कांग्रेस और सीपीआई(एम) के बीच कड़ी टक्कर है. उत्तर-पूर्व के ही दूसरे राज्य नगालैंड की कोरिडांग सीट पर सत्ताधारी गठबंधन के साझा उम्मीदवार और अन्य निर्दलीय प्रत्याशियों के बीच मुकाबला है.
गोवा में उपचुनाव रद्द
गौरतलब है कि गोवा की पोंडा विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव निर्धारित था. हालांकि, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मतदान से कुछ घंटे पहले ही इस चुनाव को रद्द करने का आदेश दिया था, जिसके चलते आज वहां मतगणना नहीं हो रही है.
सुरक्षा और परिणाम की घोषणा
चुनाव आयोग ने सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं. दोपहर तक शुरुआती रुझान स्पष्ट होने की संभावना है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन उपचुनावों के नतीजे न केवल खाली सीटों को भरेंगे, बल्कि आगामी बड़े चुनावों के लिए जनता के मूड का संकेत भी देंगे.













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