मुंबई: छत्रपति संभाजीनगर. महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में वट पूर्णिमा के त्योहार के बीच 'पत्नी पीड़ित' पुरुषों का एक अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन सामने आया है. जहां एक तरफ हिंदू परंपरा के अनुसार विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री (वट पूर्णिमा) पर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं, वहीं दूसरी ओर पत्नियों द्वारा कथित उत्पीड़न से परेशान पुरुषों ने रविवार को 'पिंपल पूर्णिमा' मनाई. 'पत्नी-पीड़ित पुरुष आश्रम' नामक संगठन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में पुरुषों ने पीपल के पेड़, कौवे की तस्वीर और यमराज की पूजा कर न्याय की गुहार लगाई.
पीपल के पेड़ की 108 उल्टी परिक्रमा और यमराज से प्रार्थना
यह प्रतीकात्मक आंदोलन पिछले सात वर्षों से लगातार आयोजित किया जा रहा है. रविवार सुबह आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल पुरुषों ने 'मुंजा' (एक लोक मान्यता के अनुसार अविवाहित आत्मा) की विशेष पूजा की. यह भी पढ़े: Viral Video: 'गर्लफ्रेंड डिप्रेशन में है, इसलिए आया हूं'; जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' प्रदर्शन के बीच इस युवक ने जीता सोशल मीडिया का दिल
इस दौरान परंपराओं के विपरीत, प्रदर्शनकारियों ने देव प्रतिमा की सात बार सीधी (क्लॉकवाइज) और 108 बार उल्टी (एंटी-क्लॉकवाइज) परिक्रमा की. अपनी व्यथा को समाज के सामने रखने के लिए कार्यक्रम में उपस्थित कई पुरुषों ने व्यंग्यात्मक और मजाकिया गीत भी प्रस्तुत किए.
अनोखा प्रदर्शन
मजेदार: “अरे वाह! वटसावित्री से पहले ‘पत्नी पीड़ित पुरुषों’ ने अनोखा आंदोलन किया! पिंपळ के पेड़ की १०८ उल्टी प्रदक्षिणा ! 🌳🤣
यहां पिंपळ खुद कह रहा है – ‘भाई, मुझे तो बचा लो!’
एडवोकेट भारत फुलारे बोले – ‘हमारा संघर्ष महिलाओं के खिलाफ नहीं, बस…
— NewsTigerG (@NewsTigerG) June 29, 2026
'झगड़ालू पत्नी के साथ रहने से बेहतर मुंजा बनना
आश्रम के अध्यक्ष एडवोकेट भारत फुलारे ने इस मौके पर सरकार, न्यायपालिका और समाज पर पुरुषों की समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, "हमारा यह संघर्ष महिलाओं के खिलाफ नहीं है. हम केवल कानून के समक्ष दोनों पक्षों के लिए समान न्याय की मांग कर रहे हैं. देश के मौजूदा कानून काफी हद तक महिलाओं का पक्ष लेते हैं, जिससे संवैधानिक सिद्धांतों का निष्पक्ष क्रियान्वयन नहीं हो पाता."
उन्होंने यमराज से प्रार्थना करते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि एक झगड़ालू पत्नी के साथ रोज-रोज के मानसिक तनाव में जीने से बेहतर है कि इंसान 'मुंजा' बन जाए.
राष्ट्रीय पुरुष आयोग के गठन की मांग
इस अनूठे प्रदर्शन के जरिए संगठन ने सरकार से मांग की है कि देश में पुरुषों के साथ होने वाले कथित घरेलू उत्पीड़न और झूठे मुकदमों की निष्पक्ष जांच के लिए एक अलग 'राष्ट्रीय पुरुष आयोग' का गठन किया जाए.
इस कार्यक्रम के दौरान आश्रम के उपाध्यक्ष सुरेश फुलारे, सचिव चरणसिंग गुसिंगे, उमेश दुधत, सोमनाथ मनाल, एकनाथ राठौड़, भाऊसाहेब सालुंखे, प्रविण कांबले, श्रीराम तांगड़े, संजय भांड, दिनेश दुधत और संजय घोलवे सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे. सोशल मीडिया पर इस अनोखे आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो खूब चर्चा बटोर रहे हैं.












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