Mumbai Water Tanker Strike: मुंबई में 10% पानी कटौती के बीच लोगों की और बढ़ सकती है मुश्किलें, कल से निजी वॉटर टैंकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल; जानें उनकी मांगें

मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन के अनुसार, सेवाएं रोकने का यह निर्णय केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा लागू किए गए कड़े नियमों के कारण लिया गया है. यह संस्था कुओं और बोरवेल से भूजल निकालने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है, जिसका उपयोग टैंकर संचालक करते हैं.

Mumbai Water Tanker Strike: मुंबई के नागरिकों के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं. शहर के निजी वॉटर टैंकर ऑपरेटर्स ने सोमवार, 8 जून 2026 से अपनी सेवाओं को अनिश्चितकालीन समय के लिए बंद करने का फैसला किया है. मुंबईकर पहले से ही नगर निगम (BMC) द्वारा लागू की गई 10 प्रतिशत पानी की कटौती और जलाशयों के घटते जलस्तर का सामना कर रहे हैं. ऐसे में मानसून की शुरुआत से ठीक पहले टैंकरों की इस हड़ताल से शहर में पानी की किल्लत और अधिक गहराने की आशंका पैदा हो गई है.

मुंबई की कुल पानी की जरूरतों का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा निजी टैंकरों के माध्यम से पूरा किया जाता है. जब भी नगर निगम की आपूर्ति कम पड़ती है, तब ये टैंकर ही सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए मुख्य सहारा बनते हैं.  यह भी पढ़े:  Mumbai Water Crisis: मुंबई में कल से पानी के टैंकरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल; सोसायटियों, अस्पतालों और उद्योगों पर मंडराया जल संकट

कड़े नियमों के विरोध में ऑपरेटर्स का फैसला

मुंबई वॉटर टैंकर एसोसिएशन के अनुसार, सेवाएं रोकने का यह निर्णय केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (CGWA) द्वारा लागू किए गए कड़े नियमों के कारण लिया गया है. यह संस्था कुओं और बोरवेल से भूजल निकालने की प्रक्रिया को नियंत्रित करती है, जिसका उपयोग टैंकर संचालक करते हैं.

नए नियमों के तहत निजी टैंकर आपूर्तिकर्ताओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना, कुएं वाली जगह पर कम से कम 200 वर्ग मीटर भूमि के स्वामित्व का प्रमाण देना, पानी की गुणवत्ता के दस्तावेज सौंपना और डिजिटल फ्लो मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा उन्हें ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) के पेयजल मानकों का पालन भी करना होगा.

नियमों को मुंबई के लिहाज से अव्यावहारिक बताया

टैंकर ऑपरेटर्स का कहना है कि मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरी माहौल में इन नियमों का पालन करना व्यावहारिक नहीं है. एसोसिएशन के अध्यक्ष जसबीर सिंह बीरा ने कहा कि सीजीडब्ल्यूए द्वारा निर्धारित शर्तें मुंबई की जमीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं. इन नियमों के तहत व्यवसाय चलाना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा है, इसलिए लगभग 2,000 टैंकरों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन को मजबूरन सेवाएं निलंबित करनी पड़ रही हैं.

एसोसिएशन के प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने स्पष्ट किया कि जब तक प्रशासन के साथ बैठक कर बातचीत के जरिए कोई सौहार्दपूर्ण समाधान नहीं निकल जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.

आवासीय सोसायटियों और होटल उद्योग में चिंता

इस घोषणा के बाद उन इलाकों में चिंता बढ़ गई है जो पूरी तरह या आंशिक रूप से टैंकर के पानी पर निर्भर हैं. चांदीवली की सिंक्रोनिसिटी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के चेयरमैन मनदीप सिंह मक्कड़ ने बताया कि नगर निगम की आपूर्ति लगातार नहीं मिलती है, जिसके कारण कमी के दिनों में सोसायटियों को पूरी तरह टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है.

दूसरी तरफ, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग ने भी इस हड़ताल को लेकर चेतावनी जारी की है. बांद्रा और खार में रेस्तरां मालिक राहुल रोहरा के अनुसार, पिछले कुछ समय से पानी का दबाव वैसे ही कम है और कई प्रतिष्ठान भूजल स्रोतों पर निर्भर हैं. अगर टैंकर सेवा बंद होती है, तो आतिथ्य सत्कार (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र में बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा और पानी की कालाबाजारी बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है.

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