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Income Tax Return: 31 अगस्त की डेडलाइन चूके तो क्या होगा? जानिए पेनल्टी, बिलेटेड ITR और नुकसान कैरी फॉरवर्ड के नियम

गैर-ऑडिट वाले व्यावसायिक और पेशेवर आय वाले करदाताओं (ITR-3 और ITR-4) के लिए आकलन वर्ष 2026-27 का आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 निर्धारित है. यदि करदाता इस समय सीमा से चूकते हैं, तो उन्हें धारा 234F के तहत ₹5,000 तक का विलंब शुल्क और धारा 234A के अंतर्गत ब्याज देना होगा.

Income Tax Return: 31 अगस्त की डेडलाइन चूके तो क्या होगा? जानिए पेनल्टी, बिलेटेड ITR और नुकसान कैरी फॉरवर्ड के नियम
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली: व्यावसायिक और पेशेवर आय अर्जित करने वाले ऐसे करदाता, जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है, उनके लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तय है. वेतनभोगी वर्ग और पेंशनभोगियों (ITR-1 और ITR-2) के लिए सामान्य समय सीमा 31 जुलाई को समाप्त हो चुकी है, जबकि गैर-ऑडिट वाले व्यवसायियों को एक अतिरिक्त महीने का समय दिया गया था.

यदि संबंधित करदाता 31 अगस्त की समय सीमा तक अपना रिटर्न दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें पेनल्टी (विलंब शुल्क) के साथ बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) का विकल्प चुनना होगा.

किन करदाताओं पर लागू होती है 31 अगस्त की डेडलाइन?

यह समय सीमा मुख्य रूप से उन व्यक्तिगत करदाताओं, फ्रीलांसर्स, सलाहकारों और छोटे व्यापारियों पर लागू होती है जो ITR-3 या ITR-4 (सुगम) फॉर्म भरते हैं और जिन्हें आयकर कानून के तहत टैक्स ऑडिट कराने की आवश्यकता नहीं होती है.

टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले व्यवसायों और कंपनियों के लिए रिटर्न दाखिल करने की निर्धारित तिथियां अलग होती हैं.

डेडलाइन चूकने पर कितनी लगेगी पेनल्टी और ब्याज?

आयकर कानून की धारा 139(4) के तहत 31 अगस्त के बाद भी रिटर्न दाखिल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए वित्तीय दंड का प्रावधान है:

  • विलंब शुल्क (धारा 234F): यदि करदाता की कुल कर योग्य आय ₹5 लाख से अधिक है, तो उसे ₹5,000 की लेट फीस देनी होगी. वहीं, ₹5 लाख तक की आय वाले छोटे करदाताओं के लिए यह शुल्क अधिकतम ₹1,000 निर्धारित है.
  • बकाया टैक्स पर ब्याज (धारा 234A): यदि करदाता पर कोई टैक्स देनदारी बकाया है, तो निर्धारित तिथि के बाद रिटर्न दाखिल होने तक 1 प्रतिशत प्रति माह (या महीने के किसी हिस्से) की दर से ब्याज लागू होगा.

नुकसान को कैरी फॉरवर्ड करने की सुविधा होगी समाप्त

समय पर रिटर्न न भरने का एक बड़ा नुकसान यह है कि करदाता अपने कारोबारी या निवेश संबंधी नुकसान को भविष्य के वर्षों के मुनाफे से समायोजित (Set-off) करने के लिए आगे नहीं ले जा सकेंगे:

  • कैरी फॉरवर्ड पर रोक: कैपिटल गेन (पूंजीगत लाभ), व्यापार या पेशे के घाटे और सट्टेबाजी के नुकसान को बिलेटेड रिटर्न में आगे के वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति नहीं मिलती.
  • अपवाद: हाउस प्रॉपर्टी (गृह संपत्ति) से होने वाले नुकसान को बिलेटेड रिटर्न में भी आगे के वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जा सकता है.

बिलेटेड रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि: 31 दिसंबर

31 अगस्त की डेडलाइन छूट जाने के बाद करदाता आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.

31 दिसंबर के बाद सामान्य व्यवस्था के तहत उस वर्ष का रिटर्न दाखिल करना संभव नहीं होगा, जब तक कि आयकर विभाग की ओर से कोई विशेष नोटिस जारी न किया जाए या करदाता 'अपडेटेड रिटर्न' (ITR-U) के प्रावधानों के अंतर्गत न आए.

30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन है अनिवार्य

आईटीआर पोर्टल पर फॉर्म अपलोड करने मात्र से प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती:

  • रिटर्न दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर ई-सत्यापन (e-Verification) करना अनिवार्य है.
  • यदि समय सीमा के भीतर सत्यापन नहीं किया जाता है, तो जिस दिन वेरिफिकेशन होगा, उसी दिन को वास्तविक फाइलिंग की तारीख माना जाएगा. इससे समय पर भरा गया फॉर्म भी 'बिलेटेड' श्रेणी में आ सकता है.
  • सत्यापन न होने की स्थिति में रिटर्न को अमान्य (Invalid) घोषित किया जा सकता है.

टैक्स विशेषज्ञों की सलाह है कि अंतिम समय में पोर्टल पर तकनीकी दबाव या सर्वर की समस्याओं से बचने के लिए करदाता समय रहते अपनी फाइलिंग और ई-सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर लें.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 26, 2026 06:12 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).