Fake Loan App से चूना लगाने वाले 4 ठग यूपी और राजस्थान से गिरफ्तार, 2 लाख लोगों को बना चुके हैं शिकार

मुंबई साइबर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान से चार ठगों के एक गिरोह को गिरफ्तार किया है. पीड़ितों की संख्या के लिहाज से इसे देश का सबसे बड़ा साइबर रैकेट में से एक माना जा रहा है. पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने देशभर में 2 लाख से अधिक लोगों को लोन प्रोसेसिंग फीस (Loan Processing Fees) के नाम पर चूना लगाया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: PTI)

मुंबई: मुंबई (Mumbai) साइबर पुलिस ने उत्तर प्रदेश और राजस्थान से चार ठगों के एक गिरोह को गिरफ्तार किया है. पीड़ितों की संख्या के लिहाज से इसे देश का सबसे बड़ा साइबर रैकेट में से एक माना जा रहा है. पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने देशभर में 2 लाख से अधिक लोगों को लोन प्रोसेसिंग फीस (Loan Processing Fees) के नाम पर चूना लगाया है. चारों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां उन्हें पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. हरियाणा पुलिस ने टीका पंजीकरण के नाम पर साइबर ठगी को लेकर चेताया

प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस रैकेट को कक्षा आठ ड्रॉपआउट चला रहा था. इस काम में उसका साथ कुछ इंजिनियर और ऐप डेवलपर भी दे रहे थे. पुलिस के अनुसार 36 वर्षीय गिरोह का मुखिया संजीव कुमार सिंह (Sanjeev Kumar Singh) ने कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर इंजीनियरों और ऐप डेवलपर्स के साथ मिलकर लगभग 11 लोन ऐप बनाए थे. पुलिस ने कहा कि बदमाशों ने लोन देने की पेशकश की और पीड़ितों को लोन प्रोसेसिंग फीस के नाम पर धोखा दिया.

डीसीपी (साइबर) रश्मि करंदीकर (Rashmi Karandikar) ने कहा कि उनकी सोशल एनालिसिस टीम को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री योजना लोन (Pradhan Mantri Yojana Loan) और मुद्रा लोन (Mudra Loan) जैसे ऐप की लिंक होने की बात पता चली, जिसमें लोन देने का दावा किया गया था. ऐप्स के अलावा, आरोपियों ने एक वेबसाइट भी बनाई थी और पीड़ितों को वहां अपने डिटेल्स भरने पड़ते थे, जिसके बाद उन्हें जयपुर (Jaipur) और यूपी (UP) में आरोपियों द्वारा स्थापित दो कॉल सेंटरों से एक कॉल किया जाता था.

डीसीपी ने कहा “आरोपी उनसे लोन प्रोसेसिंग फीस के नाम पर 5,000 रुपये से 25,000 रुपये के बीच की राशि मांगते थे. चूंकि राशि छोटी होने के चलते कई पीड़ितों ने इसकी शिकायत नहीं दी, जबकि कई पीड़ितों ने सोचा की उनके लोन आवेदन को स्वीकार नहीं किया गया है.” जांच में पता चला है कि इन नौ फर्जी ऐप्स को 2.5 लाख बार डाउनलोड किया गया है.

उन्होंने बताया कि “आरोपियों ने दो अखबारों में लोन विज्ञापन भी दिए थे. उन्होंने देशभर के लोगों को आकर्षित करने के लिए अखबारों और सोशल मीडिया में इन फर्जी लोन ऐप के विज्ञापन में लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए.”

पुलिस टीम को 25 ई-वॉलेट (e-wallet) और बैंक खाते भी मिले हैं, जिनके माध्यम से फर्जी तरीके से कमाए गए पैसे का लेन-देन किया जाता था. पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंकों में खाता खुलवाया था.

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