देश

न्याय के इंतजार में चली गई मणिपुर गैंगरेप पीड़िता

ढाई साल पहले कुकी-जो समुदाय की एक युवती ने अपने साथ हुए गैंगरेप के खिलाफ आवाज उठाई.

न्याय के इंतजार में चली गई मणिपुर गैंगरेप पीड़िता
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

ढाई साल पहले कुकी-जो समुदाय की एक युवती ने अपने साथ हुए गैंगरेप के खिलाफ आवाज उठाई. लेकिन मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई. लंबे समय तक मानसिक और शारीरिक पीड़ा से जूझने के बाद उसने 11 जनवरी को अंतिम सांस ली."वह अपनी मां के अलावा कमरे में किसी को नहीं आने देती थी. वह अपने भाइयों को देखकर डर जाती थी और उनसे दूर रहने के लिए कहती थी. बस एक ही सवाल दोहराती कि मैं जिंदा क्यों हूं और मुझे इंसाफ कब मिलेगा. ऐसी एक भी रात नहीं थी जब वह उस दिन की भयावह यादों के बिना सो पाई हो. अक्सर आधी रात को वह मदद के लिए चीख उठती. उसे अपने बलात्कारियों के चेहरे और उन्होंने किस रंग की शर्ट पहनी थी, सब याद था," ये बताते वक्त मीरा हाओकिप के चेहरे पर निराशा और दुख दोनों जाहिर होते हैं.

मई 2023 में मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा भड़क उठी. इस दौरान कई महिलाएं अपहरण और बलात्कार जैसी घटनाओं का शिकार बनीं. इसी हिंसा की पीड़ित किलिंगपी हाओकिप केवल 18 साल की थीं. 15 मई 2023 को इंफाल में एक एटीएम बूथ के पास से उनका अपहरण किया गया. उनके साथ मारपीट की गई और गैंगरेप किया. उस समय राज्य में बीजेपी की सरकार थी और एन बीरेन सिंह मुख्यमंत्री थे.

किलिंगपी ढाई साल तक अपने स्वास्थ्य के साथ संघर्ष करती रहीं. उन्हें गंभीर शारीरिक चोटें आई थीं. वह काफी समय से गर्भाशय से जुड़ी समस्या से परेशान थीं. घटना के बाद से किलिंगपी डिप्रेशन और मानसिक तनाव से भी जूझ रही थीं.

किलिंगपी की बहन मीरा हाओकिप ने डीडब्ल्यू से बातचीत में बताया, "वह बहुत मुश्किल से खाना खाती थी. क्रिसमस के बाद से किलिंगपी की तबीयत बिगड़ गई. वह 8 जनवरी की रात से उल्टी कर रही थी. उसे फीवर था. सांस लेने में दिक्कत होने लगी. जिसके बाद माता-पिता उसे 40 किलोमीटर दूर स्थानीय अस्पताल ले गए. किलिंगपी की जान नहीं बचाई जा सकी और 11 जनवरी को चुराचांदपुर के सिंघात सरकारी अस्पताल में उसका निधन हो गया.”

नहीं मिली पुलिस और मेडिकल सहायता

किलिंगपी एक आम कुकी-जो युवा लड़की थीं. हिंसा से पहले उनका परिवार न्यू चेकऑन इलाके में किराए के मकान में रहता था. पिता रिक्शा चलाते हैं जबकि मां सार्वजनिक शौचालयों की सफाई का काम करती हैं. उनके दो भाई और एक बहन हैं. किलिंगपी अपने परिवार की मदद करना चाहती थीं. इसी वजह से उन्होंने कम उम्र में ही इंफाल के एक ब्यूटी पार्लर में काम करना शुरू कर दिया. उनका सपना था कि वह आगे चलकर अपना खुद का सैलून खोलें.

यह घटना 15 मई 2023 को शाम करीब 5 बजे की है. न्यू चेकऑन एटीएम बूथ के पास से चार लड़के किलिंगपी को जबरन मारुती स्विफ्ट गाड़ी में बिठाकर ले गए. आरोप है कि ये लोग घाटी इलाके में सक्रिय मैतेई संगठन आराम्बाई टेंगोल से जुड़े थे. वे किलिंगपी को वांगखेई अयांगपाली ले गए जहां मैतेई महिलाओं के समूह मीरा पैबी की सदस्य भी मौजूद थीं. डीडब्ल्यू के पास एफआईआर की कॉपी है जिसके अनुसार, यहां से किलिंगपी को एक बोलेरो गाड़ी में बैठाकर पहाड़ों की ओर ले जाया गया, जहां तीन लड़कों ने उनके साथ रेप किया.

किलिंगपी ने आरोप लगाया कि मीरा पैबी की सदस्यों ने ही उन्हें उन लड़कों के हवाले किया था. किलिंगपी की बहन मीरा ने डीडब्ल्यू को बताया, "वह किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागी. एक ऑटो-रिक्शा चालक उन्हें बिष्णुपुर पुलिस स्टेशन ले गया. यहां सभी अफसर मैतेई समुदाय के थे. इसलिए ऑटो-रिक्शा चालक ने किलिंगपी को इंफाल आर्मी कैंप छोड़ दिया. उनके शरीर पर खून था. हम सबको किलिंगपी की हालत देखकर समझ आ गया था कि उसके साथ कुछ बहुत बुरा हुआ है. कैंप में कोई डॉक्टर नहीं था. हमने खुद ही उसका इलाज किया."

सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जुलाई में किलिंगपी और उनके परिवार को समुदाय के अन्य लोगों के साथ कांगपोकपी स्थानांतरित कर दिया गया. उसी महीने एक वीडियो सामने आया. वीडियो में भीड़ से घिरी दो महिलाओं को निर्वस्त्र परेड कराते देखा जा सकता था. इस घटना ने पूरे देश में आक्रोश पैदा कर दिया. एक लंबी चुप्पी के बाद पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2023 में मणिपुर हिंसा पर अपनी प्रतिक्रिया दी.

किलिंगपी ने तय किया कि जो कुछ उनके साथ हुआ, किसी और महिला के साथ नहीं होना चाहिए. घटना के करीब तीन महीने बाद 20 जुलाई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान आया और उसके अगले ही दिन 21 जुलाई 2023 को किलिंगपी ने कांगपोकपी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई. मामले को हत्या के प्रयास, अपहरण, सामूहिक बलात्कार (गैंगरेप) और एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (1989) से संबंधित विभिन्न धाराओं के तहत रजिस्टर किया गया.

फिलहाल इस मामले की सुनवाई गुवाहाटी की विशेष सीबीआई अदालत में चल रही है. अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. किलिंगपी की मां का कहना है कि वह अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई जारी रखेंगी.

न्याय और मुआवजे के लिए इंतजार करता परिवार

किलिंगपी की मां ने डीडब्ल्यू से बात की. परिवार सिंघात के एक गांव के किनारे मिट्टी और टीन से बनी झोपड़ी में रहता है. उनका सब कुछ इंफाल में हुई हिंसा की आग में जल गया. वे चाहते हैं कि सरकार एक घर देकर उनकी मदद करे.

वह कहती हैं, "कांगपोकपी के जिला उपायुक्त की मदद से किलिंगपी का गुवाहाटी में शुरुआती इलाज कराना संभव हो सका. किलिंगपी के इलाज के लिए पहली बार केंद्र सरकार से पिछले साल सितंबर में फंड मिला था. कुछ कुकी संगठनों ने भी हमारी आर्थिक सहायता की है. आखिरी बार सीबीआई से भी उसी दौरान बात हुई थी."

कुकी-जो महिला मंच की संयोजक मार्लिन हाओकिप ने डीडब्ल्यू को बताया कि कुकी महिलाओं के खिलाफ हत्या, बलात्कार और यातना के 33 मामले हैं जिनके लिए वकील की तलाश है. उन्होंने पीएमओ, एनसीडब्ल्यू और एनएचआरसी को पत्र लिखा है.

मार्लिन कहती हैं, "हमारे पास कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं. हम ऐसे वकीलों से संपर्क करने की प्रक्रिया में हैं जो हमारी महिलाओं के मामले लड़ने के लिए तैयार हों. समस्या यह है कि हमारे समुदाय में बहुत कम डॉक्टर और वकील हैं जो हमारा प्रतिनिधित्व कर सकें. हमने किलिंगपी के परिवार की मदद के लिए विभिन्न कुकी संगठनों से पैसे इकट्ठा किए हैं."

उन्होंने आगे बताया, "हमें केंद्र सरकार से वित्तीय मदद मिल रही है. लेकिन यह राजधानी इंफाल के रास्ते हम तक पहुंचती है. इंफाल में कुकी समुदाय लगभग नहीं है. हमारा कोई नेता भी वहां मौजूद नहीं. जब हम अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, तो कोई जवाब नहीं मिलता."

जनसमुदाय की मांग

कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ने 22 जनवरी को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने समुदाय की मांगों को दोहराया. वे चाहते हैं कि महिलाओं की मौत को हिंसा के कारण हुआ अपराध माना जाए. साथ ही वे एक अलग केंद्र शासित प्रदेश की मांग कर रहे हैं. राज्य में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं.

मीरा कहती हैं कि इस घटना के बाद से ही महिलाओं को निर्देश हैं कि वे दोपहर दो बजे तक घर लौट आएं. उन्होंने कहा, "जब भी किलिंगपी सुरक्षा बलों को पास से गुजरते सुनती थी, उसका शरीर सुन्न हो जाता और वह फिर से मदद के लिए रोती. उसका जाना एक राष्ट्रीय क्षति है. केंद्र सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' की बात करती है. फिर भी हमारी कई कुकी महिलाओं के साथ बलात्कार हुआ और कई की हत्या कर दी गई. हम उन सभी के लिए न्याय चाहते हैं.”

गोपनीयता बनाए रखने के लिए पीड़िता, उनकी मां और बहन का असली नाम नहीं बताया गया है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jan 25, 2026 02:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).