Mahanagar Gas Fraud: महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, APK फाइल और कॉल फॉरवर्डिंग ट्रिक से खाली हो रहे बैंक खाते; जानें कैसे बचें

महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित कई राज्यों में महानगर गैस लिमिटेड (MGL) के नाम पर एक नया साइबर फ्रॉड तेजी से फैल रहा है. जालसाज उपभोक्ताओं को गैस कनेक्शन काटने की फर्जी धमकी देकर उनके फोन में दुर्भावनापूर्ण APK फाइलें डाउनलोड करवा रहे हैं और बैंक खाते खाली कर रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

मुंबई, 18 मई: महाराष्ट्र (Maharashtra) और कर्नाटक (Karnataka) सहित देश के कई राज्यों में महानगर गैस लिमिटेड (Mahanagar Gas Limited) (MGL) के उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर किया जा रहा साइबर फ्रॉड (Cyber ​​Fraud) तेजी से पैर पसार रहा है. जालसाज इस धोखाधड़ी के लिए गैस कनेक्शन काटने की फर्जी धमकी, दुर्भावनापूर्ण एपीके (APK) फाइलों और कॉल फॉरवर्डिंग जैसी खतरनाक ट्रिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. साइबर अपराधियों (Cybercriminals) द्वारा सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों को निशाना बनाने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अधिकारियों और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने देशव्यापी अलर्ट जारी किया है. यह भी पढ़ें: साइबर फ्रॉड पर वार: गृह मंत्रालय और RBI की संस्था के बीच समझौता, AI से होगी 'म्यूल अकाउंट्स' की पहचान

डराने वाला मैसेज और फर्जी 'गैस ऐप' का जाल

धोखाधड़ी की शुरुआत एक डराने वाले संदेश से होती है. जालसाज खुद को एमजीएल (MGL) का अधिकारी बताकर उपभोक्ताओं को एसएमएस (SMS) या व्हाट्सएप पर तत्काल संदेश भेजते हैं. इस मैसेज में दावा किया जाता है कि ग्राहक का पिछला गैस बिल बकाया है और यदि तुरंत भुगतान नहीं किया गया, तो "आज रात" ही उनका गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा.

जब घबराए हुए उपभोक्ता उनके दिए नंबर पर संपर्क करते हैं, तो उन्हें वेरिफिकेशन या बिल भुगतान के बहाने एक लिंक भेजा जाता है. ग्राहकों से इस लिंक के जरिए एक "आधिकारिक ऐप" डाउनलोड करने को कहा जाता है, जो वास्तव में एक संदेहास्पद एपीके (APK) फाइल होती है.

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रिमोट एक्सेस और कॉल फॉरवर्डिंग से चोरी हो रहे ओटीपी

साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एक बार जब उपभोक्ता इस अज्ञात एपीके फाइल को अपने फोन में इंस्टॉल कर लेता है, तो यह मैलवेयर (Malware) जालसाजों को पीड़ित के मोबाइल फोन का पूरा रिमोट एक्सेस (नियंत्रण) दे देता है. इसके जरिए ठग फोन में मौजूद बैंकिंग ऐप्स, पासवर्ड और संवेदनशील डेटा तक आसानी से पहुंच जाते हैं. यह भी पढ़ें: साइबर ठगों पर CBI का बड़ा वार, फर्जी नोटिस की पहचान के लिए लॉन्च किया AI हेल्पबॉट ‘ABHAY’

इसके अतिरिक्त, कुछ मामलों में स्कैमर्स ग्राहकों को वेरिफिकेशन के नाम पर अपने फोन से एक विशिष्ट कोड या नंबर डायल करने के लिए कहते हैं. विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि ये कोड गुप्त रूप से पीड़ित के फोन पर 'कॉल और एसएमएस फॉरवर्डिंग' (Call and SMS Forwarding) को सक्रिय कर देते हैं. इससे बैंक द्वारा भेजे जाने वाले ओटीपी (OTP) और अलर्ट सीधे जालसाजों के पास पहुंच जाते हैं, जिससे वे आसानी से पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं.

प्राधिकरण और साइबर सेल की एडवाइजरी

महानगर गैस लिमिटेड और साइबर अपराध शाखा ने उपभोक्ताओं को सुरक्षित रहने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:

अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की संदिग्ध कॉल, संदेश या लिंक प्राप्त होने पर तुरंत इसकी सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन में दें या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं.

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