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हरियाणा का बड़ा बैंकिंग घोटाला: रिटायरमेंट के ठीक पहले IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, जानिए 657 करोड़ रुपये के इस फ्रॉड की पूरी कहानी

हरियाणा के बहुचर्चित 657 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने निलंबित आईएएस अधिकारी प्रदीप कुमार को उनके रिटायरमेंट के दिन ही गिरफ्तार कर लिया है. जानिए क्या हैं आरोप.

हरियाणा का बड़ा बैंकिंग घोटाला: रिटायरमेंट के ठीक पहले IAS प्रदीप कुमार गिरफ्तार, जानिए 657 करोड़ रुपये के इस फ्रॉड की पूरी कहानी
IDFC First Bank (Photo Credits: IANS)

हरियाणा (Haryana) प्रशासनिक हलके से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (Central Bureau of Investigation) (CBI) ने एक बड़े भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के पूर्व सदस्य सचिव और निलंबित आईएएस (IAS) अधिकारी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बीच मंगलवार, 30 जून को उनकी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के ठीक पहले की गई। प्रदीप कुमार पर राज्य के बहुचर्चित 657 करोड़ रुपये के बैंकिंग घोटाले में सीधे तौर पर शामिल होने और सरकारी फंड का गबन करने का गंभीर आरोप है. यह भी पढ़ें: Sambhal Land Scam: करोड़ों की सरकारी जमीन निजी हाथों में सौंपने का खेल, पूर्व पालिका अध्यक्ष और ईओ सहित 32 लोगों पर एफआईआर दर्ज

रिटायरमेंट के दिन ही क्यों हुई गिरफ्तारी?

CBI के मुताबिक, गिरफ्तारी का समय कोई संयोग नहीं बल्कि जांच एजेंसी की मजबूरी थी. वरिष्ठ नौकरशाह प्रदीप कुमार लंबे समय से जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे और बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद पेश होने से बच रहे थे. अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्होंने पंचकूला की एक अदालत में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अर्जी भी लगा रखी थी, जिस पर सुनवाई होनी बाकी थी. इस बीच, सीबीआई की ट्रैकिंग टीमों ने उनके ठिकाने का पता लगाया और रिटायरमेंट के कागजी कामकाज पूरे होने से चंद घंटे पहले उन्हें दबोच लिया.

क्या हैं आरोप: बिना मंजूरी के खुला सीक्रेट बैंक खाता

जांच एजेंसी के फॉरेंसिक ऑडिट में यह बात साफ हुई है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अपने कार्यकाल के दौरान प्रदीप कुमार ने नियमों को ताक पर रखकर काम किया। सीबीआई ने कहा, "उन्होंने निवेश से जुड़े सारे फैसले अपने स्तर पर लिए थे. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) बनाने के नाम पर सरकारी धन को तय सीमा से कहीं अधिक मात्रा में चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) की शाखा में भेजा गया."

हैरान करने वाली बात यह है कि इस बैंक खाते को खोलने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास न तो कोई आंतरिक रिकॉर्ड है, न ही कोई कार्यकारी मंजूरी या मिनट्स मौजूद हैं. यह पूरा खाता विभागीय अनुमति के बिना, पूरी गोपनीयता के साथ सिर्फ घोटाले को अंजाम देने के लिए खोला गया था.

169 करोड़ रुपये की सीधे तौर पर चपत

यह पूरा संस्थागत घोटाला हरियाणा के 8 अलग-अलग सरकारी विभागों को मिलाकर कुल 657 करोड़ रुपये का है, लेकिन इसमें सबसे बड़ा नुकसान प्रदीप कुमार के ही विभाग को उठाना पड़ा. बैंक में एफडी बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये ट्रांसफर तो किए गए, लेकिन बैंक ने कभी कोई वास्तविक फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद जनरेट ही नहीं की. इसके बजाय, बिना किसी आधिकारिक अनुमति के अनधिकृत डेबिट नोट्स के जरिए पैसे को बैंक से तुरंत निकाल लिया गया और शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया. इस फर्जीवाड़े के कारण हरियाणा सरकार के खजाने को सीधे तौर पर 169 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है.

घोटाले की पूरी तस्वीर और अब तक की कार्रवाई

इस बड़े बैंकिंग घोटाले की शुरुआती जांच राज्य की एंटी-करप्शन यूनिट कर रही थी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा सरकार ने इसे केंद्रीय एजेंसी सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी. इस मामले में गिरफ्तार होने वाले प्रदीप कुमार तीसरे आईएएस अधिकारी हैं. इनसे पहले वरिष्ठ नौकरशाह राम कुमार सिंह और पंकज अग्रवाल को भी सीबीआई हिरासत में ले चुकी है.

अब तक इस मामले में सीबीआई 17 संस्थाओं और व्यक्तियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. आरोपियों की इस सूची में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 वरिष्ठ अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 लोक सेवक, 6 बिचौलिए और मनी ट्रेल को छिपाने के लिए इस्तेमाल की गईं 2 फ्रंट कंपनियां शामिल हैं.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 01, 2026 02:07 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).