मुंबई: भारत की आर्थिक राजधानी कहलाने वाला महाराष्ट्र अब एक नए कीर्तिमान की ओर तेजी से बढ़ रहा है. अमेरिका की मशहूर निवेश और रिसर्च कंपनी Morgan Stanley की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस रिपोर्ट को साझा करते हुए कहा कि Morgan Stanley जैसी विश्वसनीय संस्था ने महाराष्ट्र को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के टॉप आर्थिक क्षेत्रों में गिना है. यह राज्य की नीतियों, नेतृत्व और विकास योजनाओं का सीधा परिणाम है.
महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा विदेशी निवेश आकर्षित करने वाला राज्य है और राष्ट्रीय निर्यात में 15.4% योगदान देता है. इससे राज्य की वैश्विक छवि और निवेशकों का विश्वास दोनों मजबूत हुआ है.
रिपोर्ट की मुख्य बातें
- फिलहाल महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था लगभग 536 अरब डॉलर की है, जो भारत की कुल GDP का 13.7% हिस्सा है.
- अगर यह एक स्वतंत्र देश होता, तो यह सिंगापुर जितनी बड़ी अर्थव्यवस्था होती.
- रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र दुनिया की 28वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
- राज्य की GDP प्रति व्यक्ति राष्ट्रीय औसत से 1.6 गुना अधिक है.
- FDI और निर्यात में सबसे आगे
CM देवेंद्र फडणवीस ने शेयर की रिपोर्ट
Maharashtra leading the way!
World largest and most reputed investment banking, research and financial institution Morgan Stanley has just released its latest report giving top edge to Maharashtra on almost all key economic variables.
This extremely credible ranking of our… pic.twitter.com/cb03oBWIRS
— Devendra Fadnavis (@Dev_Fadnavis) July 24, 2025
इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक प्रगति में तेजी
रिपोर्ट में मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक, नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और वधावन पोर्ट जैसे बड़े परियोजनाओं को आर्थिक विकास के इंजन के रूप में बताया गया है. साथ ही शिक्षा, लिंग समानता और स्वास्थ्य सेवाओं में भी राज्य अन्य राज्यों से आगे है.
नई तकनीक और कृषि में इनोवेशन
राज्य सरकार ने MahaAgri-AI Policy 2025–2029 की शुरुआत की है, जिसके अंतर्गत कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का प्रयोग किया जाएगा. इससे खेती को ज्यादा टिकाऊ और लाभकारी बनाया जाएगा.
हालांकि, Morgan Stanley ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र को शहरीकरण के दबाव, उद्योगों में संतुलित विकास और आय की असमानता जैसी चुनौतियों पर ध्यान देना होगा.













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