देश

Maharashtra FDA: महाराष्ट्र एफडीए कर्मचारियों का बड़ा आरोप, स्टाफ की कमी से कराई जा रही डबल शिफ्ट; बढ़ते काम के दबाव पर जताई चिंता

गौरतलब है कि यह शिकायत ऐसे समय सामने आई है जब महाराष्ट्र एफडीए राज्यभर में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई तेज कर रहा है. हालांकि, कर्मचारियों के आरोपों पर एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

Maharashtra FDA: महाराष्ट्र एफडीए कर्मचारियों का बड़ा आरोप, स्टाफ की कमी से कराई जा रही डबल शिफ्ट; बढ़ते काम के दबाव पर जताई चिंता

Maharashtra FDA Staff Allege Double Shifts: महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के 29 कर्मचारियों ने स्टाफ की भारी कमी के बीच डबल शिफ्ट में काम कराने का आरोप लगाया है. कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ते कार्यभार के कारण खाद्य पदार्थों, दवाओं और कॉस्मेटिक उत्पादों के सैंपलों की जांच की गुणवत्ता और सटीकता प्रभावित हो रही है. इस संबंध में कर्मचारियों ने 15 जुलाई को महाराष्ट्र के एफडीए मंत्री नरहरी झिरवाल को लिखित शिकायत भेजी है. Maharashtra FDA: महाराष्ट्र एफडीए का बड़ा एक्शन, मुंबई के इन 5 बड़े क्लबों के फूड लाइसेंस सस्पेंड; जानें नाम और वजह

शिकायत में छत्रपति संभाजीनगर स्थित एफडीए प्रयोगशाला के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के निर्देशों के बाद उनसे लंबे समय तक काम कराया जा रहा है, छुट्टियों पर रोक लगाई गई है और लंबित सैंपलों की जांच जल्द पूरी करने का दबाव बनाया जा रहा है.

डबल शिफ्ट में कराया जा रहा काम

कर्मचारियों के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार के नियमों के तहत प्रयोगशाला का कार्यालय समय सुबह 9:45 बजे से शाम 6:15 बजे तक निर्धारित है. हालांकि पिछले एक महीने से कर्मचारियों को दो शिफ्टों में काम करने के निर्देश दिए गए हैं.

पहली शिफ्ट: सुबह 7:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक

दूसरी शिफ्ट: दोपहर 12:00 बजे से रात 8:00 बजे तक

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हर शनिवार कार्यालय आने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की छुट्टी लेने पर रोक लगा दी गई है.

सैंपलों की जांच पर असर पड़ने का दावा

कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा स्टाफ के साथ वैज्ञानिक मानकों के अनुसार सैंपलों की जांच करना संभव नहीं है. उनका दावा है कि पर्याप्त संख्या में लैब असिस्टेंट, सफाई कर्मचारी और अन्य सहायक स्टाफ की कमी है.

शिकायत के अनुसार, एक विश्लेषक (Analyst) सामान्य परिस्थितियों में एक महीने में केवल 12 से 14 दवा सैंपलों की गुणवत्ता जांच कर सकता है. वहीं FSSAI की 2021 की गाइडलाइन के मुताबिक एक विश्लेषक सामान्य स्टाफिंग की स्थिति में 40 से 50 खाद्य सैंपलों का विश्लेषण कर सकता है.

कर्मचारियों का आरोप है कि ड्रग इंस्पेक्टर और फूड सेफ्टी अधिकारियों से आने वाले सैंपलों की संख्या प्रयोगशाला की क्षमता से कहीं अधिक है, जिससे लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है.

कर्मचारियों ने की अधिक विश्लेषकों की नियुक्ति की मांग

कर्मचारियों ने सरकार से अधिक विश्लेषकों की नियुक्ति करने की मांग की है ताकि सैंपलों की समय पर और सटीक जांच हो सके. उनका कहना है कि केवल काम के घंटे बढ़ाने या दो शिफ्ट लागू करने से जांच की क्षमता में समान अनुपात में वृद्धि नहीं होगी.

मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

शिकायत में कर्मचारियों ने यह भी कहा कि लगातार लंबे समय तक काम करने और साप्ताहिक अवकाश नहीं मिलने से उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. इसके अलावा पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने में भी कठिनाई हो रही है, जिससे कर्मचारियों की कार्यक्षमता और प्रयोगशाला के काम की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है.

गौरतलब है कि यह शिकायत ऐसे समय सामने आई है जब महाराष्ट्र एफडीए राज्यभर में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ निरीक्षण और कार्रवाई तेज कर रहा है. हालांकि, कर्मचारियों के आरोपों पर एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 30, 2026 02:22 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).