VIDEO: लालबागचा राजा का भव्य विसर्जन, बाप्पा को दी गई भावुक विदाई, वीडियो में देखें आस्था का समंदर
मुंबई के लालबागचा राजा को विसर्जन कर दिया गया. (Photo Credit : AI)

मुंबई, 7 सितंबर 2025: मुंबई की सड़कें आज सुबह एक अनोखे दृश्य की गवाह बनीं. आसमान से बरसती बूंदें और भक्तों की आंखों से बहते आंसू एक साथ समंदर में मिल रहे थे. मौका था मुंबई के सबसे प्रिय, लालबागचा राजा के विसर्जन का. 10 दिनों तक भक्तों के बीच रहने के बाद, बप्पा अपने घर लौट गए, और पीछे छोड़ गए बस यादें और अगले साल जल्दी आने का एक अटूट वादा.

आस्था का महाकुंभ: 22 घंटे का सफर

यह सिर्फ एक विसर्जन यात्रा नहीं थी, बल्कि आस्था का एक चलता-फिरता महाकुंभ था. 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन शुरू हुई यह शोभायात्रा करीब 22 घंटे तक चली. लालबाग से गिरगांव चौपाटी तक का पूरा रास्ता गुलाबी रंग के जनसैलाब में तब्दील हो गया था. लाखों भक्त, एक जैसे गुलाबी परिधानों में, ढोल-ताशों की गूंज पर थिरकते हुए "गणपति बाप्पा मोरया, पुढच्या वर्षी लवकर या" के जयकारे लगा रहे थे. देर रात हुई बारिश भी उनके जोश और भक्ति को रत्ती भर भी कम नहीं कर पाई.

क्यों खास हैं 'नवसाचा गणपति'?

लालबागचा राजा सिर्फ एक मूर्ति नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धड़कन और अटूट आस्था का प्रतीक हैं. साल 1934 से स्थापित हो रहे गणपति के इस स्वरूप को 'नवसाचा गणपति' के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है 'मन्नतें पूरी करने वाले गणपति'. हर साल उनकी 18 से 20 फीट की विशाल और मनमोहक मूर्ति का दर्शन करने के लिए देश-विदेश से करोड़ों लोग मुंबई आते हैं.

जब भक्ति में डूबे सितारे

बप्पा की भक्ति में क्या आम और क्या खास, सब एक समान हो जाते हैं. इस साल भी अंबानी परिवार समेत कई बड़े सितारे राजा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे. उद्योगपति अनंत अंबानी तो विसर्जन जुलूस में आम भक्तों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते और नाचते दिखे. गुलाबी कुर्ते में सजे अनंत ने बप्पा की आरती की और भीड़ के साथ भक्ति में सराबोर नजर आए. उनके अलावा विक्की कौशल और आयुष्मान खुराना जैसे बॉलीवुड कलाकारों ने भी बाप्पा का आशीर्वाद लिया. यह नजारा सचमुच दिखाता है कि गणपति के लिए सब एक हैं.

सुरक्षा और पर्यावरण का संगम

इस विशाल आयोजन को संभालना एक बड़ी चुनौती थी. मुंबई पुलिस ने हजारों जवानों को तैनात कर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे. एक फर्जी बम की धमकी से कुछ देर के लिए तनाव बना, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी ने किसी भी अनहोनी को होने नहीं दिया. इस साल की सबसे प्रशंसनीय बात यह रही कि उत्सव को पर्यावरण के अनुकूल मनाया गया. राजा की मूर्ति 'शाडू' मिट्टी से बनी थी, जो पानी में आसानी से घुल जाती है और समुद्री जीवन को कोई नुकसान नहीं पहुंचाती.

जैसे ही क्रेन की मदद से राजा की मूर्ति को अरब सागर में धीरे-धीरे विसर्जित किया गया, हर किसी की आंखें नम हो गईं. यह विदाई की एक भावुक घड़ी थी, लेकिन यह अंत नहीं है. यह एक नए इंतजार की शुरुआत है, क्योंकि मुंबई अब अगले साल फिर से अपने राजा का स्वागत करने के लिए तैयार है.